- SOG ने 3 डॉक्टरों को फर्जी FMG स्क्रीनिंग सर्टिफिकेट बनवाने के आरोप में गिरफ्तार किया है.
- पकड़े गए लोगों ने 25 से 29 लाख रुपए देकर फर्जी FMG परीक्षा प्रमाणपत्र बनवाया.
- इन लोगों ने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप की थी.
विदेश से MBBS करने के बाद भारत में प्रैक्टिस के लिए अनिवार्य FMG स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर पाने वाले तीन डॉक्टरों को राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने गिरफ्तार किया है. आरोप है कि तीनों ने 25 से 29 लाख रुपए तक देकर FMG स्क्रीनिंग परीक्षा के फर्जी सर्टिफिकेट बनवाए और इनके आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में रजिस्ट्रेशन या इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया. जांच में सामने आया कि परीक्षा पास नहीं कर पाने वाले कई विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स ने बिचौलियों के जरिए फर्जी सर्टिफिकेट हासिल किए और इनके आधार पर राजस्थान के अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप की.
अब तक 30 लोग हो चुके गिरफ्तार
जांच में अब तक ऐसे 100 से अधिक लोगों को चिन्हित किया जा चुका है. मामले में RMC के तत्कालीन रजिस्ट्रार सहित अब तक कुल 30 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. SOG के ADG विशाल बंसल ने बताया कि जांच में पता चला कि विदेश से एमबीबीएस करने वाले ऐसे लोगों को फर्जी एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा उत्तीर्ण प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराए जाते थे, जिनसे परीक्षा पास नहीं हो पाती थी.
FMG स्क्रीनिंग टेस्ट में 3 बार फेल
इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के लिए आवेदन कर मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कराई जा रही थी. SOG के अनुसार. डीग निवासी आशीष कुमार शर्मा ने कजाकिस्तान से 2021 में MBBS किया था. भारत लौटने के बाद उसने FMG स्क्रीनिंग परीक्षा तीन बार दी, लेकिन पास नहीं हो सका.
8 बार में भी पास नहीं हुआ FMG स्क्रीनिंग टेस्ट
शुभम गुर्जर को SOG पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. दूसरा आरोपी जयपुर के मुरलीपुरा राजेन्द्र कुमार यादव ने चीन से 2006 से 2012 के बीच MBBS की पढ़ाई की. भारत लौटने के बाद उसने FMGE (FMG स्क्रीनिंग परीक्षा) आठ बार दी, लेकिन सफल नहीं हुआ. SOG के मुताबिक, उसने बहरोड़ निवासी संदीप नामक व्यक्ति से 29 लाख रुपए में फर्जी FMG सर्टिफिकेट बनवाया और इसके आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया.
अभी वह अपनी डॉक्टर पत्नी के अस्पताल में मैनेजमेंट का काम देख रहा था. संदीप की भूमिका की जांच की जा रही है. तीसरा आरोपी नरेश रोलानिया, निवासी कोटपूतली-बहरोड़ ने कजाकिस्तान से 2021 में MBBS किया था. उसने भी FMG स्क्रीनिंग परीक्षा तीन बार दी, लेकिन पास नहीं हुआ. आरोप है कि उसके रिश्तेदार नरेंद्र ने 26 लाख रुपए में उसका फर्जी FMG सर्टिफिकेट बनवाया.
बिना परीक्षा पास मरीजों का कर रहा इलाज
इसके आधार पर नरेश ने उदयपुर मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप की. SOG के अनुसार, वह वर्तमान में कोटपूतली के एक निजी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बिना FMG स्क्रीनिंग परीक्षा पास किए और बिना RMC रजिस्ट्रेशन के मरीजों का इलाज कर रहा था. तीनों आरोपियों को 10 और 12 अगस्त को गिरफ्तार किया गया. उन्हें जयपुर महानगर द्वितीय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से 14 अगस्त तक पुलिस हिरासत मिली है.
SOG अब आरोपियों से फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने वाले नेटवर्क, बिचौलियों और RMC में रजिस्ट्रेशन कराने में कथित मदद करने वालों के बारे में पूछताछ कर रही है. SOG के मुताबिक, इस मामले में मुख्य आरोपी भानाराम माली और उसके साथ काम करने वाले शुभम गुर्जर व इन्द्रराज गुर्जर फर्जी FMG सर्टिफिकेट बनवाने और RMC में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए प्रति व्यक्ति करीब 20 से 30 लाख रुपए लेते थे.
मामले में भानाराम, उसके सहयोगियों, RMC के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, UDC अखिलेश माथुर, LDC फरहान हसन और 25 विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स सहित कई आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. SOG का कहना है कि फर्जी FMG प्रमाणपत्र के जरिए इंटर्नशिप और मेडिकल रजिस्ट्रेशन हासिल करने वाले अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है. जांच का फोकस अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य बिचौलियों और फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने वालों तक पहुंचने पर है.
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