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'खुशीशाला' क्या है? राजस्थान के 1500 सरकारी स्कूलों में क्यों शुरू हुआ यह अनोखा मेंटल हेल्थ प्रोग्राम?

राजस्थान ने 1,500 सरकारी प्राइमरी स्कूलों में 'खुशीशाला' मेंटल हेल्थ प्रोग्राम शुरू किया है. जानिए कैसे यह अनूठी पहल कक्षा 1 से 5वीं तक के बच्चों का तनाव दूर कर रही है.

'खुशीशाला' क्या है? राजस्थान के 1500 सरकारी स्कूलों में क्यों शुरू हुआ यह अनोखा मेंटल हेल्थ प्रोग्राम?
राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (RSCERT) द्वारा लागू की गई 'खुशीशाला' पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना है.

आज के दौर में मेंटल हेल्थ (Mental Health) को लेकर चर्चाएं तो बहुत होती हैं, लेकिन जब बात छोटे बच्चों की आती है, तो अक्सर इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है. इसी सोच को बदलते हुए राजस्थान सरकार ने प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. राज्य के लगभग 1,500 सरकारी स्कूलों में 'खुशीशाला' पहल की शुरुआत की गई है. यह देश का पहला ऐसा व्यवस्थित कार्यक्रम है, जो कक्षा 1 से 5वीं तक के नन्हे-मुन्ने बच्चों की मानसिक भलाई (Well-being), भावनात्मक मजबूती और उनके सामाजिक विकास पर केंद्रित है. आइए जानते हैं कि आखिर क्या है 'खुशीशाला' और क्यों आज के समय में स्कूली बच्चों के लिए यह बेहद जरूरी है.

क्या वाकई स्कूल स्तर पर मेंटल हेल्थ प्रोग्राम की जरूरत है?

अक्सर लोग सोचते हैं कि इतने छोटे बच्चों को क्या तनाव हो सकता है? लेकिन रिसर्च कुछ और ही कहानी बयां करती है. एक्सपर्ट विजया रमन और शांति थॉमस की स्टडी ('भारत में स्कूल मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम - मुद्दे और संभावित व्यावहारिक समाधान') के मुताबिक, दुनिया भर में 18 साल से कम उम्र के करीब 13 फीसदी युवा किसी न किसी गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं.

इतना ही नहीं, मेंटल हेल्थ से जुड़ी अधिकांश समस्याओं की शुरुआत 25 साल से कम उम्र में ही हो जाती है. चूंकि बच्चे अपने दिन का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा स्कूल में बिताते हैं, इसलिए स्कूल के स्तर पर ही अगर सही कदम उठाए जाएं, तो बच्चों को डिप्रेशन और तनाव से आसानी से बचाया जा सकता है.

क्या है 'खुशीशाला' और कैसे काम करेगा यह प्रोग्राम?

राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (RSCERT) द्वारा लागू की गई 'खुशीशाला' पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना है.

RSCERT की डायरेक्टर श्वेता फगेडिया के अनुसार, "खुशीशाला ने राजस्थान को प्राथमिक शिक्षा स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य और भलाई कार्यक्रम लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बना दिया है. इसका उद्देश्य बच्चों के सामाजिक-भावनात्मक कौशल को मजबूत करना है."

इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सिर्फ बच्चों पर ही नहीं, बल्कि शिक्षकों (Teachers) की क्षमता बढ़ाने पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है:

शिक्षकों के लिए खास ट्रेनिंग

इसके तहत टीचर्स को 3 दिनों के ट्रेनिंग मॉड्यूल और 21 दिनों के ऑडियो-बेस्ड कोर्स से गुजारा जाता है.

क्या सीखते हैं टीचर्स?

इस कोर्स में शिक्षकों को भावनात्मक जागरूकता (Emotional Awareness), बच्चों में तनाव को पहचानने के तरीके, मजबूत रिश्ते बनाने और खुशहाली (Well-being) के गुर सिखाए जाते हैं.

टीचर हैंडबुक और मोबाइल रिसोर्स: क्लासरूम में इन गतिविधियों को आसानी से लागू करने के लिए शिक्षकों को विशेष हैंडबुक और मोबाइल-बेस्ड रिसोर्स भी दिए गए हैं.

ट्रायल के शानदार नतीजे

छात्राओं में दिखा 69% सुधार

यह प्रोग्राम सिर्फ कागजी दावों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर इसके बेहतरीन नतीजे देखने को मिले हैं. साल 2024 में राजस्थान के सिरोही और बांसवाड़ा जिलों में इसका एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था.इस ट्रायल में 120 शिक्षक शामिल हुए थे.
प्रोजेक्ट के बाद बच्चों के सोशल-इमोशनल स्किल्स में 53 प्रतिशत का सुधार देखा गया. सबसे चौंकाने वाले और सुखद नतीजे लड़कियों में दिखे, जहां सुधार का ग्राफ 69 प्रतिशत तक रहा.

इस पहल से न सिर्फ बच्चों का पढ़ाई का तनाव कम हुआ, बल्कि खेल-खेल में सीखने की वजह से शिक्षक और छात्र के बीच का रिश्ता भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और दोस्ताना हो गया.

आगे क्या है तैयारी? 12,000 स्कूलों तक पहुंचेगी 'खुशीशाला'

पायलट प्रोजेक्ट की बड़ी सफलता को देखते हुए अब इस अभियान को बड़े पैमाने पर विस्तार दिया जा रहा है. RSCERT ने क्षमतालय फाउंडेशन के साथ मिलकर 2025 में क्लासरूम और ऑनलाइन मोड के जरिए 165 शिक्षकों को ट्रेनिंग दी. इसके साथ ही, 33 जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs) के 1,320 शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया जा चुका है.

भविष्य का प्लान

अब मौजूदा शैक्षणिक सत्र में इस कार्यक्रम का दायरा और बढ़ाया जा रहा है. पंचायत स्तर पर 11,305 शिक्षकों को ट्रेनिंग देने और राज्य भर के 649 PM SHRI स्कूलों तक इसे पहुंचाने की योजना है. डायरेक्टर श्वेता फगेडिया ने बताया कि इन ट्रेनिंग प्रोग्राम्स के पूरा होने के बाद, राजस्थान के 12,000 से ज्यादा स्कूलों में कम से कम एक ऐसा ट्रेंड टीचर मौजूद होगा, जो 'खुशीशाला' की गतिविधियों को बखूबी संभाल सकेगा.

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