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पटवारी क्या होता है? कितनी मिलती है सैलरी, क्या-क्या काम करना पड़ता है, यहां जानिए

सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के बीच पटवारी की परीक्षा काफी पॉपुलर है. इसमें स्टेबिलिटी और अच्छी सैलरी का अहम योगदान है. इसलिए जब पटवारी की भर्ती निकलती है तो बड़ी संख्या में उम्मीदवार आवेदन करते हैं.

पटवारी क्या होता है? कितनी मिलती है सैलरी, क्या-क्या काम करना पड़ता है, यहां जानिए
मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में इस पद को पटवारी कहा जाता है.

Patwari Salary And Work : सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवा इस पद की तैयारी जोर-शोर से करते हैं. गांवों और कस्बों में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड संभालने से लेकर किसानों और प्रशासन के बीच कई जरूरी कामों में पटवारी की अहम भूमिका होती है. हालांकि, पूरे देश में इस पद का नाम एक जैसा नहीं है. कहीं इसे पटवारी कहा जाता है, कहीं लेखपाल तो कहीं तलाठी. नाम भले बदल जाए, लेकिन काम लगभग एक जैसा ही होता है. ऐसे में अगर आप भी इस नौकरी के बारे में जानना चाहते हैं तो यहां सैलरी, काम और भर्ती से जुड़ी जरूरी बातें जान सकते हैं.

पटवारी का काम क्या होता है?

पटवारी का सबसे बड़ा काम अपने इलाके की जमीन का रिकॉर्ड संभालना होता है. किस जमीन पर किसका नाम दर्ज है, किस खेत का मालिक कौन है और जमीन की खरीद-फरोख्त या बंटवारे के बाद रिकॉर्ड में क्या बदलाव करना है, जैसी जिम्मेदारियां इसी पद से जुड़ी होती हैं. कई राज्यों में फसलों से जुड़ी जानकारी जुटाने और सरकार को जरूरी आंकड़े देने का काम भी पटवारी करता है. जमीन से जुड़े विवादों में प्रशासन को जानकारी देने की जिम्मेदारी भी कई बार इसी स्तर के कर्मचारियों पर होती है.

हर राज्य में नाम अलग हो सकता है

मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में इस पद को पटवारी कहा जाता है. उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों और उत्तराखंड में इसी तरह का काम करने वाले कर्मचारी को लेखपाल कहा जाता है. महाराष्ट्र में तलाठी और गुजरात में तलाटी नाम चलता है. दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में विलेज अकाउंटेंट या विलेज ऑफिसर जैसे नाम इस्तेमाल किए जाते हैं. नाम अलग हैं, लेकिन जमीन और रेवेन्यू रिकॉर्ड संभालने का काम लगभग एक जैसा ही रहता है.

कितनी मिलती है सैलरी?

ये पद राज्य सरकार के राजस्व विभाग के तहत आता है, लिहाजा जवाब हर राज्य के लिए एक जैसा नहीं हो सकता. हर राज्य का सैलरी सिस्टम अलग होता है. भर्ती के नियम अलग होते हैं और अलाउंस भी अलग-अलग हो सकते हैं. आमतौर पर शुरुआती दौर में इन-हैंड सैलरी करीब 25 हजार रुपये से 40 हजार रुपये या उससे ज्यादा तक हो सकती है. यह रकम राज्य, पोस्टिंग और मिलने वाले अलाउंस के हिसाब से बदल सकती है.

भर्ती कैसे होती है?

भर्ती का तरीका भी हर राज्य में थोड़ा अलग हो सकता है. आम तौर पर उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा देनी पड़ती है. इसमें सामान्य ज्ञान, गणित, रीजनिंग, कंप्यूटर और राज्य से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं. परीक्षा के बाद मेरिट, दस्तावेजों की जांच और दूसरे जरूरी चरण पूरे होने के बाद उम्मीदवारों को नौकरी दी जाती है. भर्ती से जुड़ी शर्तें संबंधित राज्य सरकार तय करती है.

सरकारी नौकरी की स्टेबलिटी, अच्छी व नियमित सैलरी और आगे प्रमोशन के मौके इस पद को युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाते हैं. यही वजह है कि जब भी किसी राज्य में पटवारी, लेखपाल या तलाठी भर्ती निकलती है तो बड़ी संख्या में उम्मीदवार आवेदन करते हैं.

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