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NEET में मिले थे 160 नंबर, 680 का कर दिया दावा; अब कोर्ट ने लगाया 25 हजार का जुर्माना

NEET UG Fake Claim: नीट की छात्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि उसे कम नंबर मिले हैं, एनटीए पर कई आरोप भी लगाए गए थे. हालांकि नंबर मैच करने के बाद छात्रा की पोल खुल गई.

NEET में मिले थे 160 नंबर, 680 का कर दिया दावा; अब कोर्ट ने लगाया 25 हजार का जुर्माना
NEET छात्रा ने किया था कम नंबर होने का दावा

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने NEET परीक्षा में 720 में से 680 अंक मिलने का झूठा दावा करने वाली एक छात्रा पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है.  छात्रा को असल में केवल 160 अंक मिले थे, लेकिन उसने NTA पर गंभीर आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी. जब कोर्ट में मूल OMR शीट की जांच की गई, तो छात्रा ने माना कि उसे 160 अंक ही मिले हैं. कोर्ट ने छात्रा के इस 'दोषपूर्ण' आचरण पर नाराजगी जताते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी.  इससे पहले भी हाईकोर्ट ने कुछ छात्रों पर ऐसा ही जुर्माना लगाया था, जिन्होंने ओएमआर शीट में गड़बड़ी का दावा किया था, लेकिन कोर्ट में ये दावा झूठा साबित हुआ. 

क्या है पूरा मामला?

NEET UG की एक छात्रा ने अदालत में याचिका दायर कर ये दावा किया था कि उसने NEET परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन किया था और उसे 720 में से 680 अंक मिलने चाहिए थे. रिजल्ट में जब उसे मात्र 160 अंक मिले, तो उसने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी NTA पर अपनी जिम्मेदारी ठीक से न निभाने और मूल्यांकन में भारी गड़बड़ी करने के गंभीर आरोप लगाए. इस पर जस्टिस अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए छात्रा की मूल OMR ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन शीट को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया.

कोर्ट में खुल गया राज

जब कोर्ट के समक्ष OMR शीट की बारीकी से जांच की गई और छात्रा को उसकी अपनी शीट दिखाई गई, तो उसने खुद स्वीकार कर लिया कि उसके दावों में कोई सच्चाई नहीं है और उसे वास्तव में 160 अंक ही मिले हैं. ऐसा होते ही कोर्ट ने नाराजगी जताई और कहा कि इस तरह के व्यवहार को माफ नहीं किया जा सकता है. कोर्ट ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि छात्रा के बार-बार किए गए झूठे दावों के कारण सरकारी तंत्र को अनावश्यक प्रशासनिक जांच और कागजी कार्रवाई से गुजरना पड़ा.

शुरुआत में अदालत छात्रा के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के लिए उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाने पर विचार कर रही थी. हालांकि, उसके भविष्य और छात्र होने के तथ्य को ध्यान में रखते हुए अदालत ने थोड़ी नरमी बरती और जुर्माने की राशि को घटाकर 25,000 रुपये कर दिया.

तीन छात्रों पर लगाया था पांच हजार का जुर्माना

इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने भी इसी तरह का फैसला सुनाया था. यहां तीन छात्रों ने ऐसे ही दावे करके याचिका दायर की थी, लेकिन जब कोर्ट में नंबर मैच किए गए तो दावा गलत पाया गया. इसके बाद कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए छात्रों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया था.

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