देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर मचा घमासान थमा नहीं है. 23 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों के भविष्य को तय करने वाली यह परीक्षा एक बार फिर आयोजित की जा रही है. 3 मई का पेपर रद्द होने के बाद देश के लाखों छात्रों और उनके माता-पिता को जिस मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ा है, उसका दर्द परीक्षा केंद्रों के बाहर साफ देखा जा सकता है. तनाव, मायूसी और व्यवस्था के खिलाफ गुस्से के बीच छात्र एक बार फिर परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे हैं. आइए जानते हैं कि इस दोबारा हो रही परीक्षा पर छात्रों और उनके परिवारों का क्या कहना है.
'पेपर रद्द हुआ तो मैं बीमार पड़ गई'
हरियाणा के महेंद्रगढ़ की रहने वाली अनुष्का शर्मा परीक्षा केंद्र PM श्री KV के बाहर बैठी अपने नोट्स को आखिरी बार देख रही हैं. घबराहट उनके चेहरे पर साफ दिख रही है. अनुष्का कहती हैं, "जब पेपर रद्द हुआ तो मुझे बहुत घबराहट हुई. मैं बीमार भी पड़ गई थी, इसलिए एक तरह से यह पेपर मुझे दूसरा मौका दे रहा है."
-
पीएम मोदी के ग्लोबल विजन से लेकर RBI गवर्नर के बड़े बयान तक, अखबारों के फ्रंट पेज पर छाया NDTV समिट -
'भारतीय दयालु, ईमानदार और बुद्धिमान होते हैं', खामेनेई ने अपने प्रतिनिधि को भारत भेजते समय क्या कहा था? -
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
वहीं,अनुष्का के बदल में बैठी उनकी मां बेटी से ज्यादा परेशान नजर आईं. उन्होंने गुस्से और दुख के साथ कहा, ""यह बहुत गलत है। हम अपने बच्चों को पालते-पोसते हैं, पढ़ाते-लिखाते हैं और ये पेपर दिलाने के लिए उनके साथ जाते हैं, और फिर हमें धोखा मिलता है. बच्चे को पढ़ाना-लिखाना बहुत मुश्किल है और उससे भी ज़्यादा मुश्किल है उन्हें तकलीफ़ सहते हुए देखना."
'मैं सुन्न हो चुकी हूं, बस अब यह खत्म हो जाए'
परीक्षा केंद्र के बाहर खड़ी रिया यादव अपने हाथ में नोट्स पकड़े हुए लगातार चक्कर काट रही हैं. आखिरी समय में कुछ और पढ़ लेने की होड़ में लगी रिया कहती हैं, "मैं बस चाहती हूं कि यह सब अब खत्म हो जाए. इस समय मेरा दिमाग पूरी तरह सुन्न हो चुका है. यह मामला अब जरूरत से ज्यादा खिंच गया है, जिससे हमारी मानसिक स्थिति खराब हो रही है."
वहीं, सोहना के रहने वाले निखिल तंवर का दर्द कुछ अलग है. पेपर लीक की खबर के बाद उनका पढ़ाई से भरोसा ही उठ गया. निखिल ने बताया, "लीक के बाद मेरा ध्यान भटक गया. मैंने पढ़ाई छोड़ दी, साधारण फोन छोड़कर स्मार्टफोन ले लिया और दोस्तों के साथ घूमने लगा. मेरी पूरी तैयारी बर्बाद हो गई."
आर्थिक और मानसिक नुकसान की दोहरी मार
दोबारा परीक्षा दे रहे अंशुल चौहान ने इसके पीछे के आर्थिक बोझ को सामने रखा. अंशुल बताते हैं, "पेपर लीक होने के बाद मेरी मानसिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी. इसके अलावा, मुझे दोबारा तैयारी के लिए कोचिंग सेंटर के पास रहने के लिए मजबूरन 15,000 से 20,000 रुपये अलग से खर्च करने पड़े. हद तो यह है कि कुछ कोचिंग सेंटर्स ने रिवीजन क्लास के नाम पर हमसे एक्स्ट्रा फीस भी वसूल ली."
'यह सिर्फ छात्र की नहीं, पूरे परिवार की परीक्षा है'
परीक्षा केंद्र के बाहर सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार की धड़कनें बढ़ी हुई हैं. अपनी बहन को परीक्षा केंद्र के अंदर छोड़ते हुए बलजीत कौर कहती हैं, "यह सिर्फ एक उम्मीदवार की परीक्षा नहीं है, बल्कि पूरा परिवार इस भावनात्मक उथल-पुथल से गुजर रहा है. जब घर का कोई बच्चा इतनी तकलीफ में हो, तो परिवार कैसे चैन से बैठ सकता है?"
सिस्टम पर भरोसा अभी भी शून्य
हालांकि, कुछ छात्र जैसे शिवानी मौर्या इस बात को लेकर सकारात्मक हैं कि वे अच्छा प्रदर्शन करेंगी, लेकिन उनकी मां बेबी देवी का सरकार और टेस्टिंग एजेंसियों पर गुस्सा साफ दिखता है. वह सवाल करती हैं, "सरकार ऐसी लापरवाही कैसे होने दे सकती है? पेपर लीक का क्या मतलब है? अगर इस तनाव में किसी बच्चे की जान को नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?"
सोहना के ही शिवम तंवर ने एक डराने वाला दावा किया. उन्होंने कहा, "मुझे ऑनलाइन अब भी पेपर के पन्ने घूमते हुए दिखते हैं. मुझे टेस्टिंग एजेंसियों पर बिल्कुल भरोसा नहीं है. मुझे लगता है कि इस बार भी यह पूरी फेल हो जाएगी."
सरकार की तरफ से सुरक्षा के कड़े इंतजाम
इस बार परीक्षा को सुरक्षित कराने के लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की कई समीक्षा बैठकें हुईं. पेपर को सुरक्षित सेंटर्स तक पहुंचाने के लिए भारतीय वायु सेना (IAF) की मदद ली गई और परीक्षा केंद्रों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया. अधिकारी अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन छात्रों और अभिभावकों के दिलों में लगा घाव और सिस्टम पर खोया हुआ भरोसा इतनी जल्दी लौटता नहीं दिख रहा.
यह भी पढ़ें- "गलती सरकार करे और जान हमारे बच्चों की जाए", पेपर लीक के डर और मानसिक तनाव के बीच परीक्षा दे रहे छात्र
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं