NEET पेपर लीक को लेकर हुए प्रदर्शन में हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर अब पटना में एक बार फिर छात्र गुस्से में हैं. पुलिस एक्शन के विरोध में पटना में सैकड़ों छात्रों और युवा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास की तरफ मार्च निकाला. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और छात्रों ने इस दौरान जमकर नारेबाजी की. NSUI, AISF और DYFI जैसे छात्र संगठनों के झंडे लहराते हुए प्रदर्शनकारी गांधी मैदान में इकट्ठा हुए और यहां से मुख्यमंत्री आवास की तरफ कूच किया, लेकिन करीब दो किलोमीटर दूर 'आयकर गोलंबर' के पास पुलिस बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक दिया गया.
क्या मांग कर रहे हैं छात्र?
प्रदर्शन करने वाले छात्रों की मांग है कि पिछले महीने राज्यव्यापी आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए और उन पर दर्ज आपराधिक मामले वापस लिए जाएं. जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच बिहार में भी प्रोटेस्ट शुरू हुआ था और बंद बुलाया गया था. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हो गई, जिसके बाद करीब 600 लोगों को हिरासत में लिया गया था. बाद में पुलिस ने लगभग आधे लोगों को नाबालिग पाए जाने पर छोड़ दिया था, जबकि बाकी लोगों को जेल भेज दिया गया था.
मुलाकात के बाद हुआ था समझौता
इस पूरे मामले को लेकर AISA अध्यक्ष नेहा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल की डीजीपी विनय कुमार से मुलाकात हुई थी, जिसके बाद राज्य गृह विभाग ने ये कहा था कि छात्रों के खिलाफ सभी मामले वापस लिए जाएंगे और जेल में बंद लोगों को रिहा किया जाएगा. अब प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस आश्वासन को अभी तक लागू नहीं किया गया है. कई छात्रों का कहना है कि उनके दोस्त अब तक घर नहीं लौटे हैं, जिनके लिए वो सड़कों पर उतर रहे हैं.
एके-47 का मामला भी उठा
सीवान से आए एक कार्यकर्ता ने कहा, "मैं उस जिले से आता हूं जहां एक पुलिसकर्मी ने छात्रों पर AK-47 राइफल से गोली चलाई थी. सिपाही को सस्पेंड तो कर दिया गया है, लेकिन हम एसपी के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग करते हैं, जो कांस्टेबल स्तर के पुलिसकर्मी के इस तरह बेकाबू होकर गोली चलाने के लिए जिम्मेदार हैं."
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम भी प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल हुए. बाद में पुलिस ने कई छात्र नेताओं और राजेश राम को भी मौके से उठा लिया था. हालांकि किसी को भी हिरासत में नहीं लिया गया.
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