कक्षा 9 से 12 तक के करिकुलम को लागू करने में कमी और इसकी वजह से टेक्स्टबुक आने में देरी के कारण छात्रों में तनाव बढ़ रहा है. संसदीय समिति के अनुसार कक्षा 9 से 12 के करिकुलम बनाने और उसे लागू करने के बीच एक बड़ा अंतर है. समिति का कहना है कि किताबों की कमी और एप्लीकेशन-आधारित बोर्ड परीक्षा पैटर्न के कारण कक्षा 10 और 12 की परीक्षा देने वाले छात्रों में पढ़ाई का तनाव हो रहा है. साथ ही उलझन पैदा हो रही है. लोकसभा में एस्टीमेट्स कमिटी (2026-27) की दसवीं रिपोर्ट पेश की गई. यह रिपोर्ट 'देश में सस्ती और अच्छी क्वालिटी की शिक्षा देने के लिए बजट और पॉलिसी से जुड़े पहलुओं, जिसमें सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) की समीक्षा भी शामिल है' पर आधारित है.
पुराने स्टडी मटीरियल के साथ पढ़ाई
कमेटी ने पाया की CBSE ने नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) 2023 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कक्षा 9 से 12 के लिए करिकुलम फ्रेमवर्क को अपनाया है. हालांकि, पैनल ने यह भी पाया की करिकुलम तैयार करने और उसे लागू करने के बीच काफी अंतर है. NCERT अभी भी कक्षा 9 से 12 के लिए नई किताबें लाने की प्रक्रिया में है. इस वजह से स्कूलों को अक्सर पुराने स्टडी मटीरियल के साथ ही अपडेटेड और हाई-लेवल करिकुलम पढ़ाना पड़ रहा है.
NCERT और CBSE साथ मिलकर काम करे
समिति ने कहा, "टेक्स्टबुक की कमी और बोर्ड परीक्षा के नए, एप्लीकेशन-बेस्ड पैटर्न की वजह से छात्रों, खासकर 10वीं और 12वीं की परीक्षा देने वाले छात्रों में पढ़ाई को लेकर काफी तनाव और उलझन पैदा हो रही है." समिति ने शिक्षा मंत्रालय से अपील की कि वह इस बदलाव के चलते होने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए तुरंत कदम उठाए. समिति ने NCERT से यह भी कहा कि वह नई पहलों को सफल बनाने के लिए CBSE के साथ मिलकर काम करे.
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