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वर्कप्लेस पर महिलाएं सेफ या अनसेफ? NARI रिपोर्ट में सामने आया चौंकाने वाला आंकड़ा

NARI 2025 Report : रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि हैरेसमेंट की दो-तिहाई घटनाएं दर्ज नहीं कराई जातीं और 75 फीसदी महिलाओं का पुलिस और कानूनी व्यवस्था पर भरोसा कम है. महिला सुरक्षा के मामले में कोहिमा टॉप पर जबकि पटना, जयपुर और दिल्ली निचले स्थानों पर रहे.

वर्कप्लेस पर महिलाएं सेफ या अनसेफ? NARI रिपोर्ट में सामने आया चौंकाने वाला आंकड़ा
सर्वे के अनुसार, वर्ष 2024 में 7% महिलाओं ने सार्वजनिक स्थानों पर उत्पीड़न का सामना करने की बात कही.

Women's Safety Index : महिलाओं की सुरक्षा पर जारी NARI (National Annual Report and Index on Women's Safety) 2025 रिपोर्ट में कई अहम बड़ी बातें निकलकर आई हैं. 31 शहरों की 12,770 महिलाओं के बीच किए गए सर्वे के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में देश का कुल विमेन सेफ्टी स्कोर 65 फीसदी है. जिसमें वर्कप्लेस पर 91 फीसदी महिलाओं ने खुद को सेफ महसूस करने की बात कही. लेकिन इसके साथ एक बड़ी चिंता भी सामने आई. सर्वे में शामिल 53 फीसदी महिलाओं को यह जानकारी ही नहीं थी कि वो जिस जगह पर काम कर रही हैं वहां पर Prevention of Sexual Harassment (POSH) लागू है भी कही नहीं...

कोहिमा की महिलाएं सबसे सुरक्षित

महिलाओं की सेफ्टी को लेकर शहरों के बीच भी बड़ा अंतर दिखाई दिया. नागालैंड की राजधानी कोहिमा महिला सुरक्षा के मामले में टॉप पर रही. इसके अलावा विशाखापट्टनम, भुवनेश्वर, आइजोल, गंगटोक, ईटानगर और मुंबई भी अच्छा परफॉर्म करने वाले शहरों में शामिल रहे. दूसरी ओर, पटना, जयपुर, फरीदाबाद, दिल्ली, कोलकाता, श्रीनगर और रांची को रिपोर्ट में सबसे निचले स्थानों पर रखा गया. 

10 में से महिलाएं अपने शहर में हैं सेफ

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 10 में से करीब 6 महिलाओं ने अपने शहर को सेफ माना, लेकिन 40 फीसदी महिलाओं ने कहा कि वो पूरी तरह सेफ महसूस नहीं करती हैं. खासकर रात के समय महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता अधिक देखने को मिली. एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में 86 फीसदी महिलाओं ने सुरक्षा की भावना जताई, लेकिन रात या कैंपस से बाहर सेफ होने की बात को लेकर आशंकित रहीं..

नारी (NARI) के अनुसार, साल 2024 में 7 फीसदी महिलाओं ने पब्लिक प्लेस पर हैरेसमेंट का सामना करने की बात कही. 24 साल से कम उम्र की महिलाओं में यह आंकड़ा बढ़कर 14 फीसदी रहा, जिससे पता चलता है कि युवा महिलाएं कंपैरिजन में अधिक जोखिम में हैं.

दो तिहाई हैरेसमेंट की घटनाएं दर्ज ही नहीं हुईं

रिपोर्ट की सबसे चिंताजनक बात यह रही कि हैरेसमेंट की दो-तिहाई घटनाएं दर्ज ही नहीं कराई जातीं. केवल एक-तिहाई पीड़िताओं ने फॉर्मल कंप्लेंट दर्ज कराई. इनमें से सिर्फ 22 फीसदी शिकायतें दर्ज हुईं और केवल 16 फीसदी मामलों में कार्रवाई की गई. यही कारण है कि 75 फीसदी महिलाओं ने पुलिस और लीगल सिस्टम पर भरोसे की कमी जताई.

रिपोर्ट में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को पॉजिटिव सिग्नल बताया गया है. महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ने, सार्वजनिक परिवहन में महिला ड्राइवरों की मौजूदगी, स्मार्ट सिटी प्रोजक्ट्स के तहत CCTV निगरानी और साइबर सेफ्टी उपायों को महिलाओं का भरोसा बढ़ाने वाले कदम माना गया है. 

पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें

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