NCERT की कक्षा 8 की सोशल साइंस किताब को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था. इस किताब को तैयार करने वाली कमेटी के अध्यक्ष प्रोफेसर मिशेल दानिनो रहे हैं. किताब के एक चैप्टर में ‘ज्यूडिशियरी' से जुड़े कुछ तर्कों पर आपत्ति उठी और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. कोर्ट की टिप्पणी के बाद NCERT ने किताब वापस ले ली और माफी भी मांगी. इस पूरे विवाद के बाद अब पहली बार मिशेल दानिनो ने इंडियन एक्सप्रेस को इंटरव्यू दिया है. जिसमें उन्होंने इस मामले पर खुलकर अपनी बात रखी. इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ‘एनसीईआरटी ने खुद को बचाने के लिए हमें बलि का बकरा बना दिया'.
सोशल साइंस में एक ही जवाब नहीं होता
प्रोफेसर दानिनो का कहना है कि सोशल साइंस कोई गणित या साइंस नहीं है. जहां हर सवाल का एक ही सही जवाब होता है. इसमें इतिहास, समाज और विचारों को समझने के अलग अलग नजरिए होते हैं. इसलिए अगर किसी बात पर बहस या अलग राय है. तो ये गलत नहीं है. बल्कि यही इस सब्जेक्ट की खासियत है. उनके मुताबिक बच्चों को ये सीखना चाहिए कि दुनिया में हर चीज एक जैसी और सीधी नहीं होती.
बच्चों से सच क्यों छुपाएं?
दानिनो ने कहा कि बच्चों को पूरी सच्चाई से दूर रखना सही नहीं है. जैसे संसद में बहस और आरोप-प्रत्यारोप होते हैं और अदालतों में फैसले देर से आते हैं. वैसे ही समाज में भी बहुत कॉम्प्लेक्सिटी है. अगर असल जिंदगी में ये सब चीजें मौजूद हैं, तो किताबों में इन्हें क्यों नहीं दिखाया जाए? उनका मानना है कि छात्रों को असली दुनिया की समझ मिलनी चाहिए, न कि सिर्फ आसान या ‘फिल्टर की हुई' तस्वीर.
नए विचारों पर डर बढ़ेगा
उन्होंने ये भी चिंता जताई कि अगर हर नए या अलग विचार पर विवाद होने लगेगा, तो लेखक और शिक्षक नई चीजें लिखने से डरने लगेंगे. इससे किताबों में नया सोच और रिसर्च कम हो सकती है. दानिनो के मुताबिक शिक्षा का काम सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि सोचने की क्षमता बढ़ाना भी है. अगर डर का माहौल रहेगा, तो शिक्षा और ज्ञान दोनों पर असर पड़ेगा.
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