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कोटा कोचिंग का नीट 2026 में दबदबा, टॉप 10 में 4 और टॉप 100 में 44 छात्रों ने बनाई जगह

नीट एग्जाम में बिहार के नवादा जिले के वरीसालीगंज निवासी आयुष भालोटिया ने 710 अंक हासिल किए हैं. आयुष ने कहा, हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण करना और उन्हें सुधारना सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है. तैयारी के दौरान मानसिक दबाव भी आया, लेकिन परिवार और शिक्षकों के सहयोग ने हमेशा सकारात्मक बनाए रखा.

कोटा कोचिंग का नीट 2026 में दबदबा, टॉप 10 में 4 और टॉप 100 में 44 छात्रों ने बनाई जगह
फरीदाबाद निवासी पंशुल बंसल पिछले दो सालों से कोटा में पढ़ाई कर रहे हैं.

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-2026 के घोषित परिणामों में एक बार फिर कोटा कोचिंग का दबदबा देखने को मिला. परीक्षा के टॉप-10 में कोटा कोचिंग के तीन उम्मीदवारों ने जगह बनाई है. जबकि टॉप 100 में 44 छात्र शामिल रहे. रिजल्ट जारी होते ही कोटा के कोचिंग संस्थानों और छात्रावासों में जश्न का माहौल बन गया. कोटा कोचिंग के छात्र पंशुल बंसल ने ऑल इंडिया रैंक (AIR)-2 हासिल कर शहर का नाम रोशन किया है. वहीं आयुष भालोटिया ने AIR-4 और गौरव सिंह ने AIR-9 प्राप्त की. इन शानदार परिणामों के बाद कोटा ने एक बार फिर मेडिकल प्रवेश परीक्षा में अपनी मजबूत पहचान कायम रखी है. देर रात जारी हुए रिजल्ट के बाद खुशी का माहौल नजर आया. ऑल इंडिया में चौथी रैंक हासिल करने वाले आयुष भालोटिया से एनडीटीवी ने खास बातचीत की

परिणामों में आर्यन गुप्ता और पंशुल बंसल ने 720 में से 715 अंक हासिल किए हैं. टाई-ब्रेकर नियम के आधार पर आर्यन को ऑल इंडिया रैंक-1 और पंशुल को ऑल इंडिया रैंक-2 मिली है. इसके अलावा आयुष भालोटिया ने AIR-4, आर्यन दूबे ने AIR-7 और गौरव सिंह ने AIR-9 हासिल कर कोटा कोचिंग का परचम लहराया, कोटा कोचिंग के दावे के अनुसार उपलब्ध आंकड़ों में  टॉप-100 के 44 सफल विद्यार्थियों में 36 नियमित क्लासरूम और 8 डिस्टेंस लर्निंग व ऑनलाइन टेस्ट सीरीज से जुड़े रहे. वहीं 690 या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले 138 विद्यार्थियों की सूची में कोटा कोचिंग के 60 छात्र शामिल हैं. परिणाम घोषित होते ही कोटा में खुशी और जश्न का माहौल देखने को मिला. 

"सफलता के लिए करियर के प्रति पैशन होना जरूरी"

फरीदाबाद निवासी पंशुल बंसल ने नीट-2026 में 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-2 प्राप्त की. पंशुल पिछले दो वर्षों से कोटा में रहकर नियमित क्लासरूम तैयारी कर रहे थे. पंशुल का कहना है कि उन्होंने सातवीं कक्षा में ही डॉक्टर बनने का लक्ष्य तय कर लिया था. उनका मानना है कि छोटी उम्र में लक्ष्य तय करने से उसी दिशा में सोच विकसित होती है और तैयारी आसान हो जाती है. उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने कभी पढ़ाई को लेकर दबाव नहीं बनाया.

कोटा आने के बाद उन्हें देशभर के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल मिला, जिसने लगातार बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया. पंशुल के अनुसार वे घंटों पढ़ाई करने के बजाय क्वालिटी स्टडी पर भरोसा करते थे. थ्योरी से ज्यादा प्रश्नों की प्रैक्टिस पर ध्यान दिया. उनका कहना है कि यदि किसी छात्र में अपने करियर को लेकर पैशन है तो वह निश्चित रूप से सफलता हासिल कर सकता है. पढ़ाई के अलावा पंशुल को संगीत का भी शौक है और वे पियानो बजाने की अंतरराष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं भी पास कर चुके हैं,

"डेली रिवीजन और मॉक टेस्ट ही मेरी सफलता की कुंजी"

बिहार के नवादा जिले के वरीसालीगंज निवासी आयुष भालोटिया ने 710 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक- 4 हासिल की है. आयुष ने बताया कि उनका सपना बचपन से डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना था. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने नियमित पढ़ाई, लगातार रिवीजन और मॉक टेस्ट को सबसे ज्यादा महत्व दिया. आयुष क्लास के अलावा रोजाना 7 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी करते थे और मनोरंजन के लिए शतरंज खेलते थे. उन्होंने नीट की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को सलाह दी कि एनसीईआरटी पर मजबूत पकड़, नियमित रिवीजन, मॉक टेस्ट और अनुशासन ही बड़ी सफलता की असली कुंजी हैं.

"जो फैकल्टी ने कहा, वही किया और सफलता मिल गई"

राजस्थान के अलवर जिले के गाडुवास गांव निवासी गौरव सिंह ने 720 में से 705 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-9 हासिल की. गौरव पिछले सात वर्षों से कोटा में रहकर पढ़ाई कर रहे थे. उनकी बड़ी बहन भी मेडिकल की पढ़ाई कर रही हैं और उन्हें देखकर ही गौरव ने डॉक्टर बनने का सपना देखा.
गौरव का कहना है कि उन्होंने तैयारी के दौरान नियमित क्लास अटेंड की, एनसीईआरटी को कई बार पढ़ा, लगातार रिवीजन किया और हर टेस्ट को गंभीरता से लिया. वे क्लास के अलावा रोजाना 7 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी करते थे.

उन्होंने कहा कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र यही है कि शिक्षकों के निर्देशों का पूरी ईमानदारी से पालन किया जाए और हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण कर उन्हें सुधारा जाए. स्मार्टफोन का उपयोग किया, लेकिन केवल पढ़ाई के लिए और उसका दुरुपयोग नहीं किया. मनोरंजन के लिए वे क्रिकेट खेलते थे.

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