BRICS समिट के बाद पीएम मोदी के साथ साये की तरह चलने वाले इंटरप्रेटर सिद्धार्थ बाबू की खूब चर्चा हुई, उन्होंने पीएम मोदी की बाचतीत को पुतिन और शी जिनपिंग समेत बाकी नेताओं तक सटीक तरीके से पहुंचाने का काम किया. सिद्धार्थ 2017 बैच के IFS अधिकारी हैं, जिन्होंने कुछ ही समय से ये इंटरप्रेटर का काम शुरू किया है. हालांकि उनसे पहले इस तरह के काम के लिए एक महिला को सबसे ज्यादा याद किया जाता है, जो आज भी दुनियाभर के तमाम बड़े नेताओं की बातों को इंटरप्रेट करती हैं. उनका नाम डॉ गुरदीप कौर चावला है, जिन्होंने बराक ओबामा से लेकर पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेताओं के लिए इंटरप्रेटर का काम किया है. आइए जानते हैं कि गुरदीप चावला कौन हैं और उन्होंने ये मुकाम कैसे हासिल किया.
सिद्धार्थ बाबू ने यूपीएससी क्रैक करने के बाद भारतीय विदेश सेवा में नौकरी की और फिर कई तरह के कोर्स करने के बाद उन्हें इंटरप्रेटर बनने का मौका मिला. हालांकि डॉ गुरदीप कौर चावला न तो IFS अफसर हैं और ना ही उन्होंने कोई बड़ा एग्जाम क्रैक किया था, इसके बावजूद पहले भारत और फिर अमेरिका में उन्होंने अपना लोहा मनवाया.
ऐसा रहा गुरदीप चावला का करियर
गुरदीप चावला ने साल 1990 से 1996 तक भारतीय संसद में इंटरप्रेटर के तौर पर काम किया. इसके बाद उन्हें शादी के चलते अमेरिका शिफ्ट होना पड़ा. हालांकि अमेरिका जाने के बाद भी उन्होंने अपना ये हुनर नहीं छोड़ा और साल 2008 में उन्हें अमेरिकी सरकार ने प्रेसिडेंट के लिए इंटरप्रेटर नियुक्त कर दिया. 2010 में डॉ गुरदीप चावला तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ बतौर इंटरप्रेटर भारत आईं. इसके बाद उन्होंने दुनिया के कई बड़े प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों के साथ काम किया.
सुषमा स्वराज ने भेजा बुलावा
गुरदीप चावला ने वैसे तो तमाम बड़े वर्ल्ड लीडर्स के साथ काम किया है, लेकिन वो सुषमा स्वराज का एक किस्सा बताती हैं. जब भारतीय विदेश मंत्री के तौर पर उन्होंने यूएन में भाषण दिया था. उस दौरान भारतीय दूतावास ने गुरदीप चावला से संपर्क किया और कहा कि सुषमा स्वराज ने आपको बुलाया है. गुरदीप चावला ने अपने एक इंटरव्यू में बताया, "उन्होंने मेरा काम देखा था और वो चाहती थीं कि मैं ही उन्हें इंटरप्रेट करूं. जब मैं उनसे मिली तो उन्होंने कहा कि यहां आने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद... उन्होंने मुझसे कहा कि मैंने आपको इसलिए चुना है, क्योंकि आप मेरी भावनाओं को एकदम सटीक तरीके से व्यक्त कर सकती हैं. स्पीच के बाद उन्होंने लोगों से मेरा परिचय कराते हुए कहा था कि, ये तो मेरी आवाज हैं. ये मेरे लिए किसी ट्रॉफी से कम नहीं था."
कितना मुश्किल काम है इंटरप्रेट करना?
ट्रांसलेटर के तौर पर चुनौतियों को लेकर गुरदीप कौर चावला ने अपने कई इंटरव्यू में बताया है कि जब भी आप बड़ी बैठकों के दौरान इंट्रप्रेट कर रहे होते हैं तो हर शब्द को ठीक लहजे में रखना जरूरी होता है. नेताओं की भावनाओं को भी समझना होता है और फिर उसे दूसरे नेता या फिर लोगों तक पहुंचना होता है. इंट्रप्रेट करने से पहले नेताओं की शब्दावली और एक्सप्रेशन को स्टडी करना होता है. इसके लिए उनके कई भाषण सुनते हैं और समझने की कोशिश करते हैं कि वो कैसे बोलते हैं, क्या उनके दिमाग में चलता है और वो अगला शब्द कौन सा बोलने वाले हैं. हमें पहले से ही पता होता है कि जिस बारे में बात हो रही है, उसका बैकग्राउंड क्या है. हमारा काम यही है कि स्पीकर कैसे भी बोले, हमें तुरंत उसे इंट्रप्रेट करना होता है.
ये भी पढ़ें - UPSC में 15वीं रैंक लाने के बाद भी चुना IFS, ऐसे PM मोदी के ट्रांसलेटर बने सिद्धार्थ बाबू
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं