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दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों पर सरकार सख्त, अब फीस बढ़ाने से पहले लेनी होगी बच्चों के पैरेंट्स से मंजूरी

दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों को फीस में किसी भी प्रस्तावित बढ़ोतरी करने से पहले बच्चों के माता-पिता को यह भरोसा दिलाना होगा कि बढ़ोतरी जरूरी है. इसके अलावा हर प्राइवेट स्कूल को स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी (SLFRC) का गठन 15 जुलाई तक करना होगा.

दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों पर सरकार सख्त, अब फीस बढ़ाने से पहले लेनी होगी बच्चों के पैरेंट्स से मंजूरी
दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों को 15 जुलाई बनानी होगी फीस रेगुलेशन कमेटी

दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों अब आसानी से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे. दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने गुरुवार को कहा कि दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों को फीस में किसी भी प्रस्तावित बढ़ोतरी को 18 तय पैमानों पर सही साबित करना होगा. इतना ही नहीं माता-पिता को यह भरोसा दिलाना होगा कि बढ़ोतरी जरूरी है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट में मंत्री ने आगे लिखा, दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025  के तहत फीस व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया गया है. अब हर प्राइवेट स्कूल में School Level Fee Regulation Committee (SLFRC) का गठन किया जाएगा. यह समिति शैक्षणिक सत्र 2026–27 से 2028–29 तक की फीस तय करेगी. किसी भी फीस बढ़ोतरी से पहले अभिभावकों की भागीदारी और सहमति सुनिश्चित की जाएगी, ताकि फीस तय करने की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी रहे.  मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और अभिभावक हितैषी बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है.

इसके अलावा दिल्ली सरकार ने सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे 15 जुलाई तक दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 के तहत स्कूल स्तर पर शुल्क विनियमन समिति (एसएलएफआरसी) का गठन करें. उन्होंने चेतावनी दी कि अनुपालन न करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. सूद ने कहा कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को किफायती और सुलभ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा ‘‘समाज के लिए एक पवित्र सेवा है, न कि कोई व्यावसायिक उद्यम'' है.

कौन से हैं वो 18 मानकों

आशीष सूद ने कहा कि नए ढांचे के तहत, शुल्क संशोधन चाहने वाले स्कूलों को अपना प्रस्ताव समिति के समक्ष रखना होगा और नियमों के तहत निर्धारित 18 मानकों के आधार पर फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को उचित ठहराना होगा. मंत्री ने कहा, ‘‘इन मानकों में बुनियादी ढांचे का विकास, परिवहन सुविधाएं, स्कूल भवन, सुरक्षा उपाय, प्रकाश व्यवस्था, कर्मचारियों की भर्ती और अन्य संस्थागत आवश्यकताओं पर होने वाला खर्च शामिल है. स्कूलों को यह दिखाना होगा कि प्रस्तावित शुल्क वृद्धि वास्तविक सुधारों से जुड़ी है और उसके समर्थन में उनके पास वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध हैं.'

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