थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर मचे बवाल के बीच सीबीएसई ने साफ कर दिया था कि 9वीं में तीसरी भाषा में फेल होने वाले छात्रों को 10वीं बोर्ड में बैठने का मौका मिलेगा. इसी बीच दिल्ली सरकार ने भी अब अपनी उस विवादित पॉलिसी को वापस ले लिया है, जिसके तहत अगर छात्र पिछली क्लास में चुने गए तीसरी भाषा के विषय (R3) में पास नहीं हुए तो उन्हें 10वीं की बोर्ड परीक्षा में नहीं बैठने देने का नियम था. इससे पहले, शिक्षा निदेशालय ने कहा था कि जो छात्र नौवीं कक्षा में R3 में पास नहीं हो पाते हैं, यदि वे अन्य नियमों को पूरा करते हैं तो उन्हें 10वीं कक्षा में प्रमोट कर दिया जाएगा, लेकिन 10वीं बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए उन्हें 10वीं में पढ़ाई के दौरान इस विषय को पास करना अनिवार्य होगा.
दिल्ली सरकार ने बदल दिया नियम
दिल्ली सरकार की तरफ से अपनी पॉलिसी में बदलाव करते हुए बताया गया कि इस प्रावधान को अब वापस ले लिया गया है और अब इस मामले में सीबीएसई (CBSE) के दिशानिर्देश ही लागू होंगे. एक अधिकारी ने बताया कि पुराने आदेश के अर्थ को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी, इसलिए इस प्रावधान को वापस लिया गया है. बता दें कि CBSE की तरफ से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और स्कूली शिक्षा के लिए NCF-SE 2023 के तहत मई में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू की गई थी.
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क्या है सीबीएसई की पॉलिसी?
CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी के तहत नौवीं और 10वीं कक्षा के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य है, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए. सीबीएसई के दिशानिर्देशों के तहत, R3 का मूल्यांकन पूरी तरह से स्कूल स्तर के स्तर पर किया जाता है और इसके लिए 10वीं की कोई अलग बोर्ड परीक्षा देने की जरूरत नहीं होती है. हालांकि तीसरी भाषा की परीक्षा को पास करना जरूरी होगा, इसके बिना सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा. फिलहाल इस साल के छात्रों को इससे छूट दी गई है. हालांकि 9वीं में तीसरी भाषा में फेल होने वाले छात्रों को 10वीं में प्रमोट किया जाएगा और बोर्ड परीक्षा भी देने की इजाजत होगी.
दिल्ली सरकार की क्या थी पॉलिसी
दिल्ली शिक्षा विभाग की संशोधित नौवीं कक्षा की परीक्षा और पदोन्नति नीति इस हफ्ते की शुरुआत में जारी की गई थी. इसके तहत तीसरी भाषा को अनिवार्य बना दिया था और इसके लिए स्कूल स्तर पर मूल्यांकन का प्रावधान किया था. संशोधित व्यवस्था में नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) को भी एक अनिवार्य विषय बनाया गया है, साथ ही गणित और विज्ञान में वैकल्पिक उन्नत स्तर (Advanced Level) की परीक्षाओं का विकल्प भी दिया गया है.
इस नई योजना के तहत, 6 मुख्य विषय होंगे. इनमें भाषा-1, भाषा-2, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, और व्यावसायिक शिक्षा (कौशल विकास) शामिल हैं. निदेशालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से नौवीं कक्षा के लिए 'गणित बेसिक' और 'गणित स्टैंडर्ड' परीक्षा स्ट्रक्चर को भी खत्म कर दिया है. हालांकि, 2026-27 में 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी.
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