कभी रेत के ढेर से समझाया जाने वाला विज्ञान का एक आसान सा उदाहरण दुनिया की बड़ी वैज्ञानिक खोजों से जुड़ सकता है, ये शायद हर किसी को हैरान कर दे. भारत के जाने माने फिजिक्स के प्रोफेसर दीपक धर ने अपनी सालों की मेहनत से ऐसा ही मुकाम हासिल किया है. उन्हें 2026 के प्रतिष्ठित डिराक मेडल से सम्मानित किया गया है. खास बात ये है कि इस सम्मान से पहले स्टीफन हॉकिंग जैसे दुनिया के बड़े वैज्ञानिक भी सम्मानित हो चुके हैं.
दीपक धर को क्यों मिला डिराक मेडल
दीपक धर को ये मेडल फिजिक्स में उनके सालों के काम के लिए मिला है. उन्होंने ये समझने में मदद की कि जब बहुत सारी चीजें एक साथ मिलकर काम करती हैं, तो उनका असर कैसे बदल सकता है. इसे समझने के लिए उन्होंने रेत के ढेर का उदाहरण दिया. सोचिए, रेत का एक ढेर है और उसमें एक-एक करके रेत के दाने डाले जा रहे हैं. ज्यादातर बार एक नया दाना डालने से कुछ खास नहीं होता. लेकिन कभी-कभी एक छोटा सा दाना पूरे ढेर को गिरा सकता है. धर ने ऐसे ही बदलाव को समझने पर काम किया. इस तरह की सोच को भूकंप, ट्रैफिक जाम और शेयर बाजार में अचानक होने वाले बदलावों को समझने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
चार वैज्ञानिकों को मिला ये मेडल
2026 का डिराक मेडल सिर्फ दीपक धर को नहीं मिला है. इस बार कुल चार वैज्ञानिकों को चुना गया है. इनमें फ्रांस के बर्नार्ड डेरिडा, भारत के दीपक धर, इटली के मार्क मेजार्ड और इजरायल के हाइम सोमपोलिंस्की शामिल हैं. डिराक मेडल की शुरुआत साल 1985 में हुई थी. इसे फिजिक्स की दुनिया में बड़े सम्मान के तौर पर देखा जाता है. अब तक दुनिया के कई बड़े वैज्ञानिकों को ये मेडल मिल चुका है. इनमें स्टीफन हॉकिंग का नाम भी शामिल है.
प्रतापगढ़ से शुरू हुआ सफर
दीपक धर का जन्म 1951 में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में हुआ था. उन्होंने 1970 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी की. इसके बाद 1972 में आईआईटी कानपुर से फिजिक्स में मास्टर डिग्री ली. आगे की पढ़ाई के लिए वे अमेरिका गए और कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से 1978 में पीएचडी की. उसी साल वे भारत लौटे और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च यानी TIFR से जुड़ गए. बाद में वे प्रोफेसर बने और लंबे समय तक फिजिक्स पर रिसर्च करते रहे.
पहले भी मिल चुके हैं बड़े सम्मान
डिराक मेडल दीपक धर के लिए पहला बड़ा सम्मान नहीं है. उन्हें साल 2023 में पद्म भूषण भी मिल चुका है. इसके अलावा 2022 में बोल्ट्जमैन मेडल, 1991 में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार और 1993 में जे. रॉबर्ट श्रिफर प्राइज भी मिला था. दीपक धर की कहानी खास इसलिए भी है क्योंकि प्रतापगढ़ से शुरू हुआ उनका सफर आज दुनिया के बड़े वैज्ञानिकों के बीच उन्हें एक खास जगह तक ले आया है.
ये भी पढ़ें - कौन हैं कोटा के संजय घेमावत? जिनके इशारों पर चलता था पूरा Google, अब 27 साल बाद छोड़ी कंपनी
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं