Unique School Fee Model : क्या आपने कभी सोचा है कि किसी स्कूल की फीस पैसे के अलावा किसी और चीज से भरी जा सकती है? खासकर आज के दौर में जहां बार्टर सिस्टम लगभग खत्म हो चुका है. यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन असम में एक ऐसा स्कूल है, जहां बच्चे हर हफ्ते प्लास्टिक बैग, बोतलें और अन्य प्लास्टिक कचरा जमा करके अपनी फीस अदा करते हैं. गुवाहाटी के पास पामोही गांव में स्थित अक्षर फाउंडेशन (Akshar Foundation) शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण का ऐसा मॉडल बन चुका है, जिसकी चर्चा देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में हो रही है.
एक बैग में किताबें, दूसरे में प्लास्टिक कचराइस स्कूल की सबसे खास पहचान यह है कि यहां आने वाले बच्चों के पास दो बैग होते हैं. एक बैग में किताबें और कॉपियां होती हैं, जबकि दूसरे में प्लास्टिक कचरा. स्कूल प्रशासन बच्चों से हर हफ्ते प्लास्टिक कचरा जमा करवाता है. इसका मकसद केवल फीस लेना नहीं, बल्कि बच्चों को पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी समझाना भी है.
कचरे की समस्या से निकला अनोखा समाधानअसम में हर दिन करीब 500 टन कचरा निकलता है, जिसका बड़ा हिस्सा या तो लैंडफिल में जमा हो जाता है या फिर जला दिया जाता है. इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है. इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए परमिता शर्मा और माजिन मुख्तार ने साल 2016 में अक्षर फाउंडेशन की शुरुआत की. उनका मकसद था कि शिक्षा को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा जाए और बच्चों को कम उम्र से ही सस्टेनेबल लाइफस्टाइल का महत्व समझाया जाए.
बच्चे खुद बनाते हैं ‘इको ब्रिक्स'स्कूल में जमा होने वाले प्लास्टिक कचरे को फेंका नहीं जाता. इसके बजाय बच्चों को उससे ‘इको ब्रिक्स' (Eco Bricks) बनाना सिखाया जाता है. ये ईंटें प्लास्टिक कचरे को बोतलों में भरकर तैयार की जाती हैं और बाद में अलग-अलग निर्माण कार्यों में इस्तेमाल की जा सकती हैं. इससे प्लास्टिक रीसाइकिल भी होता है और पर्यावरण को होने वाले नुकसान में भी कमी आती है.
पढ़ाई के साथ सीखते हैं रोजगार के हुनरअक्षर फाउंडेशन सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है. यहां बच्चों को सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, मोबाइल रिपेयरिंग, सिलाई, बढ़ईगिरी (कारपेंट्री) जैसी प्रोफेशनल स्किल्स भी सिखाई जाती हैं. स्कूल में एक खास पॉइंट सिस्टम भी है, जहां बच्चे सीखने और एक्टिविटीज में भाग लेने के बदले नंबर हासिल करते हैं. इन नंबर्स का इस्तेमाल वे अलग-अलग चीजें खरीदने में कर सकते हैं.
शिक्षा के साथ समाज और पर्यावरण में बदलावअक्षर फाउंडेशन का यह अनोखा मॉडल स्कूल ड्रॉपआउट दर को कम करने में भी सफल रहा है. यह स्कूल साबित करता है कि शिक्षा केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद समाज और पर्यावरण में बदलाव लाना भी है. आज यह स्कूल उन लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है, जो शिक्षा को नई सोच और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ना चाहते हैं.
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