
चेन्नई:
पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने टेस्ट क्रिकेट के महत्व पर जोर देते हुए बुधवार को क्रिकेट प्रशासकों से लंबी अवधि के प्रारूप की सर्वोच्चता बनाए रखने की अपील की। गावस्कर ने मंसूर अली खां पटौदी मेमोरियल भाषण में क्रिकेट प्रशासकों को याद दिलाया कि यह सुनिश्चित करना उनका काम है कि टेस्ट क्रिकेट की सर्वोच्चता बनी रहे।
पटौदी का 2011 में निधन हो गया था और उनकी याद में पहली बार यह लेक्चर आयोजित किया गया। आईसीसी सीईओ डेव रिचर्डसन की उपस्थिति में गावस्कर ने कहा, ‘‘टेस्ट क्रिकेट सर्वोच्च है। इसी प्रारूप के जरिये आपकी पहचान बनती है। आप टेस्ट स्तर पर कैसा प्रदर्शन करते हैं। यह मायने रखता है। टेस्ट खेलने वाले दस देशों में से चार या पांच प्रमुख देश है जिन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि टेस्ट क्रिकेट आगे भी सर्वोच्च बना रहे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वह टेस्ट क्रिकेट है जो पुरुषों को लड़कों से अलग करता है। मैं सभी प्रशासकों से इस पर गौर करने का आग्रह करता हूं।’’
पटौदी के परिवार का कोई भी सदस्य इस अवसर पर मौजूद नहीं था। उनकी पत्नी शर्मिला टैगोर अस्वस्थ हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें लेक्चर में उपस्थित थी। गावस्कर ने पटौदी और उनके करिश्माई व्यक्तित्व को लेकर कुछ दिलचस्प किस्से सुनाये। उन्होंने कहा कि वह पटौदी थे जो भारतीय क्रिकेट में आक्रामकता लेकर आए।
गावस्कर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनके जमाने में सबसे बड़ा इनाम फिल्मी जगत की महिलाओं के साथ समय बिताना होता था जबकि आज के क्रिकेटरों के लिए आईपीएल हो सकता है। गावस्कर की इस टिप्पणी से भारत और ऑस्ट्रेलिया के युवा क्रिकेटर भी मुस्कराने लगे।
पटौदी ने 1960 के दशक में भारतीय टीम की अगुवाई की। उनके नेतृत्व में ही भारत ने 1968 में न्यूजीलैंड को हराकर पहली बार विदेशी सरजमीं पर जीत दर्ज की थी। गावस्कर ने कहा, ‘‘उन्होंने पूरी मनोवृत्ति बदल दी। उन्होंने भारतीय टीम में विश्वास भरा कि वह किसी भी टीम से खेल सकती है और जीत सकती है।’’
गावस्कर ने कहा कि इसमें बड़ी उलझन होती थी पटौदी को किस नाम से बुलाया जाए। उन्हें नवाब साहिब कहा जाए, या टाइगर, या पटौदी साहिब या कप्तान। उन्होंने कहा कि पटौदी मजाक करने में भी पीछे नहीं रहते थे। गावस्कर ने बताया कि किस तरह से एक बार उन्होंने अपने साथियों को बेवकूफ बनाया था।
गावस्कर ने कहा कि पटौदी अपने साथियों के साथ शिकार पर निकले थे और उन्होंने अपने नौकरों को डकैतों की वेशभूषा में आने के लिये कहा और बंधक बनाने का नाटक रच दिया। गावस्कर ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटरों से भी आगामी टेस्ट सीरीज में मनोरंजन का तत्व जोड़ने की अपील की। उन्होंने युवा क्रिकेटरों से कहा कि वह किसी उपलब्धि का जश्न आक्रामक अंदाज के बजाय चेहरे पर मुस्कान लाकर मनायें। उन्होंने यह टिप्पणी विराट कोहली के जश्न मनाने के तरीके को लेकर की।
पटौदी का 2011 में निधन हो गया था और उनकी याद में पहली बार यह लेक्चर आयोजित किया गया। आईसीसी सीईओ डेव रिचर्डसन की उपस्थिति में गावस्कर ने कहा, ‘‘टेस्ट क्रिकेट सर्वोच्च है। इसी प्रारूप के जरिये आपकी पहचान बनती है। आप टेस्ट स्तर पर कैसा प्रदर्शन करते हैं। यह मायने रखता है। टेस्ट खेलने वाले दस देशों में से चार या पांच प्रमुख देश है जिन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि टेस्ट क्रिकेट आगे भी सर्वोच्च बना रहे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वह टेस्ट क्रिकेट है जो पुरुषों को लड़कों से अलग करता है। मैं सभी प्रशासकों से इस पर गौर करने का आग्रह करता हूं।’’
पटौदी के परिवार का कोई भी सदस्य इस अवसर पर मौजूद नहीं था। उनकी पत्नी शर्मिला टैगोर अस्वस्थ हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें लेक्चर में उपस्थित थी। गावस्कर ने पटौदी और उनके करिश्माई व्यक्तित्व को लेकर कुछ दिलचस्प किस्से सुनाये। उन्होंने कहा कि वह पटौदी थे जो भारतीय क्रिकेट में आक्रामकता लेकर आए।
गावस्कर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनके जमाने में सबसे बड़ा इनाम फिल्मी जगत की महिलाओं के साथ समय बिताना होता था जबकि आज के क्रिकेटरों के लिए आईपीएल हो सकता है। गावस्कर की इस टिप्पणी से भारत और ऑस्ट्रेलिया के युवा क्रिकेटर भी मुस्कराने लगे।
पटौदी ने 1960 के दशक में भारतीय टीम की अगुवाई की। उनके नेतृत्व में ही भारत ने 1968 में न्यूजीलैंड को हराकर पहली बार विदेशी सरजमीं पर जीत दर्ज की थी। गावस्कर ने कहा, ‘‘उन्होंने पूरी मनोवृत्ति बदल दी। उन्होंने भारतीय टीम में विश्वास भरा कि वह किसी भी टीम से खेल सकती है और जीत सकती है।’’
गावस्कर ने कहा कि इसमें बड़ी उलझन होती थी पटौदी को किस नाम से बुलाया जाए। उन्हें नवाब साहिब कहा जाए, या टाइगर, या पटौदी साहिब या कप्तान। उन्होंने कहा कि पटौदी मजाक करने में भी पीछे नहीं रहते थे। गावस्कर ने बताया कि किस तरह से एक बार उन्होंने अपने साथियों को बेवकूफ बनाया था।
गावस्कर ने कहा कि पटौदी अपने साथियों के साथ शिकार पर निकले थे और उन्होंने अपने नौकरों को डकैतों की वेशभूषा में आने के लिये कहा और बंधक बनाने का नाटक रच दिया। गावस्कर ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटरों से भी आगामी टेस्ट सीरीज में मनोरंजन का तत्व जोड़ने की अपील की। उन्होंने युवा क्रिकेटरों से कहा कि वह किसी उपलब्धि का जश्न आक्रामक अंदाज के बजाय चेहरे पर मुस्कान लाकर मनायें। उन्होंने यह टिप्पणी विराट कोहली के जश्न मनाने के तरीके को लेकर की।
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