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This Article is From Mar 08, 2017

India vs Australia : बेंगलुरू में हम जीत तो गए, लेकिन टीम इंडिया की राह में अब भी हैं कई मुश्किलें...

India vs Australia : बेंगलुरू में हम जीत तो गए, लेकिन टीम इंडिया की राह में अब भी हैं कई मुश्किलें...
चोटिल मुरली विजय की शामिल अभिनव मुकुंद भी खुद को साबित नहीं कर पाए (फाइल फोटो))
नई दिल्ली: बेंगलुरू टेस्ट में टीम इंडिया की जीत शानदार रही. अब तक टेस्ट में पिछड़ रही टीम इंडिया पहली बार बढ़त लेने में कामयाब दिखी. जीत कम अंतर से हो या फिर बड़े अंतर से, जीत जीत होती है. बेंगलुरू की जीत और ख़ास हो गई जब मैच के बाद कप्तान विराट कोहली ने कहा कि यह उनकी कप्तानी की सबसे मीठी जीत है. हो भी क्यों न टीम ने पुणे में करारी हार और सीरीज में 1-0 से पिछड़ने के बाद वापसी जो की है.

ऑस्ट्रेलिया के साथ सीरीज़ शुरू होने से पहले इसकी तुलना एशेज़ सीरीज़ से की जा रही थी. इस सीरीज़ को भारत-पाकिस्तान से भी बड़ी सीरीज़ बताया गया. टीम इंडिया सीरीज़ शुरू होने से पहले जीतने की सबसे मज़बूत दावेदार बनी रही. स्लेजिंग को लेकर भी खूब बयानबाज़ी हुई. दूसरी तरफ़ ऑस्ट्रेलियाई टीम के कप्तान स्टीवन स्मिथ ने टेस्ट सीरीज़ शुरू होने से पहले अपनी टीम को 'अंडरडॉग' होना भी क़बूल किया, लेकिन पुणे टेस्ट में टीम इंडिया को सबक मिल गया.

अब तक 19 टेस्ट तक अजेय रही तो इसके पीछे उसकी बल्लेबाज़ी का बड़ा हाथ रहा है. श्रीलंका से लेकर घरेलू ज़मीन पर न्यूज़ीलैंड फिर इंग्लैंड के साथ खेले गए टेस्ट मैचों में गेंदबाज़ों के साथ-साथ बल्लेबाज़ों का प्रदर्शन दमदार रहा है. शतकवीर कोहली ने ख़ुद मोर्चा संभालते हुए 4 दोहरे शतक बनाए-लेकिन अब कोहली अपने करियर के सबसे ख़राब दौर से गुजर रहे हैं तो टीम इंडिया के बाक़ी बल्लेबाज़ भी संघर्ष करते नज़र आ रहे हैं.

बेंगुलुरू में लोकेश राहुल 90 और 51 रन बनाते हुए मैन ऑफ़ द मैच बने, वहीं चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे ने भी संयम भरी पारी खेलते हुए टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई, लेकिन क्या इससे कमजोरियां छिप जाएंगी.

जीत टीम की कमज़ोरियों पर परदा डाल देती है- यहां भी कुछ ऐसा होता दिखाई दे रहा है. मैच के बाद किसी ने कप्तान कोहली से यह नहीं पूछा की क्यों भारतीय बल्लेबाज़ी ताश के पत्तों की तरह बिखर रही है. पाकिस्तान की टीम के साथ अक्सर ये देखने और सुनने में आता रहा है कि नीचे के 5 या 6 विकेट 50 से कम स्कोर में निपट जाते रहे हैं.

अपनी दमदार बल्लेबाज़ी लाइन-अप के लिए लंबे अरसे से मशहूर भारतीय टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर रही हैं. सचिन तेंदलुकर, राहुल दविड़, वीवीएस लक्ष्मण, सौरव गांगुली, वीरेंद सहवाग जैसे बल्लेबाज़ों ने दुनिया में टीम इंडिया की एक अलग पहचान बनाई लेकिन अब वह ख़त्म होता दिखाई दे रहा है.

सबसे पहले पुणे टेस्ट की बात करें तो इस टेस्ट में गेंदबाज़ी में टीम कुछ सम्मान ज़रूर बचा पाई लेकिन बल्लेबाज़ी में फ़्लॉप रही. टेस्ट की पहली पारी में लोकेश राहुल 64 रन बनाकर आउट हुए. राहुल का विकेट चौथा विकेट रहा जो भारत के 94 के स्कोर पर गिरा. इसके बाद टीम इंडिया के बाक़ी बल्लेबाज़ 11 रन के भीतर पैवेलियन लौट गए और 105 रन पर पारी ख़त्म हुई.

दूसरी पारी में भी हाल कुछ अलग नहीं रहा. टीम के आख़िर के 7 विकेट सिर्फ़ 30 रन पर गिरे. ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर नैथन लियोन और स्टीव ओ कीफ़ की फिरकी के सामने भारतीय बल्लेबाज़ बेबस नज़र आए. ख़राब शुरुआत के बाद भारत का चौथा विकेट अजिंक्य रहाणे के रूप में 77 रन पर गिरा. रहाणे का विकेट गिरने के बाद बाक़ी के बल्लेबाज़ 30 रन ही जोड़ सके और टीम 107 रन पर ऑल-आउट हो गई.

बेंगलुरू टेस्ट में भी टीम इंडिया के बल्लेबाज़ों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है. बेंगलुरू में भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी चुनी लेकिन बल्लेबाज़ इस मौक़े का फ़ायदा नहीं उठा सके. टीम के बल्लेबाज़ों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और टीम 189 रन पर ऑलआउट हुई. राहुल ने अच्छी बल्लेबाज़ी की और 90 रन बनाए लेकिन एक बार फिर टीम के बाक़ी बल्लेबाज़ों ने निराश किया. भारत के दूसरे तिहरा शतक बनाने वाले बल्लेबाज़ करुण नायर का विकेट भारतीय पारी का पांचवां विकेट रहा जो 156 रन के स्कोर पर गिरा. इसके बाद के बाक़ी 6 बल्लेबाज़ इस स्कोर में 33 रन ही जोड़ सके.

वहीं इसी टेस्ट की दूसरी पारी में भी कुछ ऐसी ही तस्वीर देखने को मिली. चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे ने पांचवें विकेट के लिए 118 रन जोड़े. दोनों की साझेदारी को देखकर लगा कि टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया तो एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य दे पाएगी लेकिन 188 रन के लक्ष्य को देखकर फ़ैन्स को मायूसी हाथ लगी. इस पारी में एक बार फिर 6 भारतीय बल्लेबाज़ सिर्फ़ 36 रन जोड़ सके. भारत के 238/4 के स्कोर रहते टीम का पांचवां विकेट रहाणे के रूप में गिरा. इसके बाद 274 रन पर पूरी पारी सिमट गई.

भारतीय टीम के बल्लेबाज़ भले जूझ रहे हों, लेकिन विराट कोहली पिछले कई मैचों में टीम की नैया पार लगाते आए हैं. इस बार दोनों टेस्ट में 10 के औसत से रन बनाने वाले कप्तान कोहली का आउट ऑफ़ फ़ॉर्म होना टीम इंडिया को भारी पड़ रहा है. टीम इंडिया के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज़ अजय रात्रा मानते हैं कि कोहली गेंद खेलने के बाद आने वाली गेंद के बारे में नहीं सोच कर पिछली गेंद के बारे में सोच रहे हैं. ऐसा करने की वजह से वह आने वाली गेंद को नहीं पढ़ पा रहे हैं. टीम इंडिया के थिंक ट्रेंक को जल्दी अपनी रणनीति पर काम करना होगा और रांची और धर्मशाला में बल्लेबाज़ों को इस आंकड़े को बदलना होगा.

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