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साइकिल से 191 देशों का सफर, चीन में हुआ मौत से सामना, फिर कैसे बची सोमन देबनाथ की जान?

सोमन देबनाथ पिछले 19 वर्षों में साइकिल से 191 देशों की यात्रा कर चुके हैं और दो लाख किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर चुके हैं. HIV/AIDS जागरूकता और भारतीय संस्कृति के प्रचार के बाद अब वह ‘पुनर्मिलन भारत’ अभियान के तहत देशभर की यात्रा कर रहे हैं. 

साइकिल से घूम डाले 191 देश; जानिए कौन हैं सोमन देबनाथ
NDTV
  • सोमन देबनाथ ने 27 मई 2004 को साइकिल से यात्रा शुरू कर 191 देशों का दौरा कर दो लाख किलोमीटर से अधिक सफर तय किया
  • उनका मुख्य उद्देश्य HIV/AIDS के प्रति जागरूकता फैलाना और भारतीय संस्कृति को विदेशों में पहुंचाना रहा है
  • कोविड महामारी के दौरान चीन में फंसे सोमन को बीमारी का सामना करना पड़ा लेकिन वे अपनी यात्रा जारी रखे

साइकिल पर सवार होकर दुनिया देखने का सपना, HIV/AIDS के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प और भारतीय संस्कृति को विदेशों तक पहुंचाने की कोशिश. इन तीन उद्देश्यों को लेकर निकले सोमन देबनाथ अब तक 191 देशों की यात्रा कर चुके हैं. उनके मुताबिक, इस दौरान वह साइकिल से दो लाख किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर चुके हैं. करीब 19 वर्षों तक दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में यात्रा करने वाले सोमन अब भारत को जोड़ने के संदेश के साथ देशव्यापी साइकिल यात्रा पर निकले हैं. NDTV से खास बातचीत में उन्होंने अपनी यात्रा, संघर्ष और इसके पीछे की प्रेरणा के बारे में विस्तार से बताया.

27 मई 2004 को शुरू हुआ था सफर

सोमन देबनाथ मूलरूप से कोलकाता सुंदरवन के रहने वाले हैं. अक्‍टूबर 2026 में जम्‍मू-कश्‍मीर से कन्‍याकुमारी की यात्रा पर हैं. उत्‍तर प्रदेश के लखनऊ होते हुए अपने गंतव्‍य की ओर बढ़ रहे हैं. इस बीच एनडीटीवी से बातचीत में सोमन देबनाथ ने बताया कि उनकी यात्रा की शुरुआत 27 मई 2004 को हुई थी. उस समय उनका मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को एड्स के प्रति जागरूक करना और दुनिया के लोगों को भारतीय संस्कृति से परिचित कराना था. अंतरराष्ट्रीय यात्रा शुरू करने से पहले उन्होंने भारत के 28 राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों का भ्रमण किया. 

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अक्‍टूबर 2026 में जम्‍मू-कश्‍मीर से कन्‍याकुमारी की यात्रा पर हैं. Photo Credit: NDTV

सोमन के मुताबिक, इसके बाद वह दिल्ली पहुंचे, जहां उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से मिलने का अवसर मिला. उन्होंने बताया कि तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी से मुलाकात के बाद उन्हें शुरुआती अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए पांच देशों के वीजा, 50 हजार रुपये और पांच परिचय-पत्र मिले. इसके बाद साइकिल से दुनिया घूमने का उनका अभियान आगे बढ़ा.

एशिया से यूरोप तक, साइकिल से नापी दुनिया

सोमन देबनाथ के मुताबिक, 2004 से 2009 के बीच उन्होंने एशिया के कई देशों की यात्रा की. नेपाल, तिब्बत, चीन, भूटान, बांग्लादेश, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया और श्रीलंका के बाद वह पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, ईरान, तुर्की, जॉर्जिया और बुल्गारिया तक पहुंचे. वर्ष 2009 से 2012 के बीच उन्होंने यूरोप के 48 देशों की यात्रा की. इसके बाद वह अफ्रीका के 54 देशों और मध्य पूर्व के 10 देशों तक पहुंचे. 2015 से 2017 के बीच उन्होंने दक्षिण अमेरिका के 13 देशों की यात्रा की. वर्ष 2018 में कैरेबियाई द्वीपों और मध्य अमेरिका के विभिन्न हिस्सों का सफर किया. 2019-20 में अमेरिका के 48 राज्यों की यात्रा करने के बाद वह कनाडा पहुंचे. उन्होंने रूस और चीन की यात्रा भी की. इस तरह अलग-अलग महाद्वीपों और देशों में साइकिल चलाते हुए सोमन ने अपने अभियान को आगे बढ़ाया. उनके मुताबिक, इस यात्रा में कई चुनौतियां आईं, लेकिन उन्होंने अपने उद्देश्य को नहीं छोड़ा. 

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एनडीटीवी से बातचीत में सोमन देबनाथ ने बताया कि उनकी यात्रा की शुरुआत 27 मई 2004 को हुई थी.                               Photo Credit: NDTV

कोविड के दौरान चीन में फंसे, बीमारी से भी जूझे

सोमन देबनाथ ने कोरोना महामारी के दौरान चीन में फंसने का अनुभव भी साझा किया. उन्होंने बताया कि उस समय वह चीन में थे और कोविड-19 से संक्रमित हो गए थे. उनकी हालत काफी खराब हो गई थी. सोमन के मुताबिक, बीमारी के दौरान उन्होंने गर्म पानी पीने की कोशिश की, लेकिन इससे उनका मुंह बुरी तरह जल गया. उन्होंने बताया कि इसके बाद करीब सात से आठ दिनों तक वह कुछ खा नहीं पाए. बाद में उनकी तबीयत में सुधार हुआ और उन्होंने आगे की यात्रा शुरू की. उन्होंने बताया कि चीन से निकलने के बाद वह दक्षिण कोरिया और फिर न्यूजीलैंड पहुंचे. न्यूजीलैंड में करीब एक वर्ष रुकने के बाद वह ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के रास्ते भारत की ओर लौटे.

14 साल की उम्र में HIV/AIDS को लेकर शुरू हुई जागरूकता

सोमन देबनाथ ने बताया कि जब वह 14 वर्ष के थे, तब HIV से जुड़ी एक घटना ने उन्हें इस विषय के प्रति गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित किया. इसके बाद उन्होंने इस विषय पर पढ़ना शुरू किया. उनके मुताबिक, 16 से 20 वर्ष की उम्र के बीच उन्होंने पश्चिम बंगाल में और 20 से 22 वर्ष की उम्र के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में जागरूकता से जुड़े कार्य किए. उन्होंने 28 राज्यों की स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के साथ काम करने का भी उल्लेख किया. उनका कहना है कि विश्व यात्रा के दौरान भी HIV/AIDS के प्रति जागरूकता फैलाना उनके अभियान का अहम हिस्सा रहा. वह चाहते थे कि नई पीढ़ी इस विषय को समझे और इससे जुड़े सामाजिक संकोच को दूर करने की दिशा में आगे बढ़े. 

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सोमन अब भारत को जोड़ने के संदेश के साथ देशव्यापी साइकिल यात्रा पर निकले हैं.                         Photo Credit: NDTV

स्वामी विवेकानंद और विमल मुखर्जी से मिली प्रेरणा

सोमन देबनाथ ने बताया कि साइकिल से दुनिया घूमने के उनके फैसले के पीछे स्वामी विवेकानंद के विचारों और यात्री विमल मुखर्जी की किताब का महत्वपूर्ण योगदान रहा. उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचारों ने उन्हें दुनिया को देखने और विदेशों में भारतीय संस्कृति का संदेश पहुंचाने की प्रेरणा दी. इसके अलावा उन्होंने विमल मुखर्जी की किताब ‘दो चक्का दुनिया' पढ़ी. सोमन के मुताबिक, विमल मुखर्जी ने 1926 से 1937 के बीच यात्राएं की थीं. इस किताब ने उन्हें भी साइकिल से विश्व यात्रा करने के लिए प्रेरित किया.

अब ‘पुनर्मिलन भारत' अभियान पर निकले सोमन

दुनिया के अलग-अलग देशों की यात्रा के बाद अब सोमन देबनाथ का अगला लक्ष्य भारत के लोगों को जोड़ने का संदेश देना है. उन्होंने बताया कि फिलहाल वह ‘पुनर्मिलन भारत' अभियान के तहत देश की यात्रा कर रहे हैं. इस अभियान के तहत कश्मीर से कन्याकुमारी, द्वारका से कामाख्या और अरुणाचल प्रदेश से मिजोरम तक साइकिल से सफर करने की योजना है.सोमन के मुताबिक, इस यात्रा के प्रमुख उद्देश्यों में भारत के लोगों को जोड़ना, ‘एक पेड़, एक जीवन' के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना और युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना शामिल है. उन्होंने इस अभियान को एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा है. 

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सोमन देबनाथ मूलरूप से कोलकाता सुंदरवन के रहने वाले हैं.
Photo Credit: NDTV

रोज 70 से 80 किलोमीटर चलाते हैं साइकिल

सोमन देबनाथ ने बताया कि वह आमतौर पर प्रतिदिन 70 से 80 किलोमीटर तक साइकिल चलाते हैं. कभी-कभी एक दिन में 150 किलोमीटर तक का सफर भी तय कर लेते हैं. हालांकि, अब वह अपनी रफ्तार कुछ कम रख रहे हैं, क्योंकि लंबे समय तक साइकिल चलाने से उनके पैरों में दर्द होने लगा है. उनकी जिंदगी का एक खास पहलू यह भी है कि यात्रा के दौरान साइकिल और उसके साथ मौजूद जरूरी सामान ही उनका घर है. NDTV से बातचीत में उन्होंने कहा, “मेरे पास सब कुछ है. मैं अपना छोटा-सा मोबाइल होम लेकर चल रहा हूं, यही मेरा घर है.”

191 देशों की यात्रा और दो लाख किलोमीटर से अधिक के सफर के बाद भी सोमन देबनाथ का अभियान जारी है. एक ओर वह HIV/AIDS के प्रति जागरूकता फैलाने और भारतीय संस्कृति का संदेश देने के अपने पुराने उद्देश्य को आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ‘पुनर्मिलन भारत' के जरिए देश के लोगों को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. उनके लिए साइकिल सिर्फ यात्रा का साधन नहीं, बल्कि दुनिया से संवाद करने और अपने विचार लोगों तक पहुंचाने का माध्यम भी है. 

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