- केरल के पूर्व IPS टॉमिन थाचनकारी को आय से अधिक संपत्ति बनाने के आरोप में चार साल कैद की सजा सुनाई गई है
- टॉमिन थाचनकारी पर 2003 से 2007 के दौरान वैध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप साबित हुआ है
- मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व IPS रघुवीर सिंह मीणा पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी पाने का आरोप लगा है.
भारतीय पुलिस सेवा के दो पूर्व अधिकारियों पर कानून का शिकंजा कसा है. एक पूर्व IPS अधिकारी पर अपनी जाति छुपाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है, वहीं दूसरे को अपनी आय से अधिक संपत्ति बनाने के जुर्म में चार साल की कैद की सजा सुनाई गई है. यह मामला केरल कैडर के पूर्व DGP टॉमिन थाचनकारी और मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व IPS रघुवीर सिंह मीणा से जुड़ा हुआ है.
केरल के पूर्व DGP टॉमिन थाचनकारी को सजा क्यों मिली?
केरल के कोट्टायम स्थित सतर्कता कोर्ट ने 17 सितंबर 2026 को पूर्व IPS अधिकारी टॉमिन जे. थाचनकारी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी ठहराते हुए चार साल के कारावास की सजा सुनाई. उन पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2003 से 2007 के दौरान अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की थी. सतर्कता जांच के अनुसार, वे 64.70 लाख रुपये की संपत्ति और खर्चों का हिसाब देने में नाकाम रहे. यह अघोषित संपत्ति उनकी वैधानिक आय से लगभग 135.80 प्रतिशत अधिक पाई गई.
वर्ष 2007 में जब थाचनकारी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, तब वे DIG पद पर पदोन्नत हुए थे. इसके बाद जांच आगे बढ़ी और वर्ष 2013 में आरोप पत्र दाखिल किया गया, तब तक वे ADGP के पद पर पहुंच चुके थे. केरल के पूर्व DGP रहे टॉमिन थाचनकारी इस चार साल की जेल की सजा के खिलाफ 30 दिनों के भीतर केरल उच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकते हैं. सजा के साथ-साथ अदालत ने उन पर 30.84 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. अदालती फैसले के बाद पूर्व IPS थाचनकारी को तिरुवनंतपुरम केंद्रीय जेल में स्थानांतरित किया जाएगा.
पूर्व IPS रघुवीर सिंह मीणा पर FIR क्यों दर्ज हुई?
मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व IPS अधिकारी रघुवीर सिंह मीणा पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए आरक्षित वर्ग का लाभ उठाने का आरोप लगा है. इस मामले में भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है. पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि रघुवीर सिंह मीणा मध्य प्रदेश पुलिस सेवा में आने से पहले एक शासकीय शिक्षक के रूप में कार्यरत थे. उस समय उन्होंने अपने आधिकारिक दस्तावेजों में खुद को अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित बताया था.
इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा दी, जिसके माध्यम से उनका चयन पुलिस उपाधीक्षक के पद पर हुआ. MPPSC की प्रक्रिया के दौरान मीणा ने खुद को अनुसूचित जनजाति वर्ग का बताया और ST का जाति प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत किया. यह प्रमाण पत्र वर्ष 1984 में विदिशा स्थित आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा जारी किया गया था. हालांकि, बाद में गुना के राघौगढ़ निवासी हरवीर सिंह रघुवंशी की शिकायत पर इस प्रकरण का पर्दाफाश हुआ. जांच के उपरांत संबंधित उच्च स्तरीय समिति ने उस जाति प्रमाण पत्र को अमान्य और रद्द घोषित कर दिया. इसके आधार पर अब मीणा के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है.
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