मुंबई: पूंजी बाजार नियामक सेबी ने शेयर बाजारों एवं अन्य बाजार ढांचागत संस्थानों के कामकाज को सुधारने के लिए इनके मानकों में संशोधन का फैसला किया. इनमें एक्सचेंज के काम को तीन हिस्सों में बांटना और सार्वजनिक हित निदेशकों की नियुक्ति प्रक्रिया को युक्तिसंगत बनाना भी शामिल है. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के निदेशक मंडल की यहां हुई बैठक में शेयर बाजारों के कामकाज से जुड़े मानकों में बदलाव करने का फैसला किया गया. नियामक ने बैठक के बाद कहा कि नियामकीय बदलावों से बाजार ढांचागत संस्थानों (एमआईआई) के कामकाज में ‘अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही' आने की उम्मीद है.
इन बदलावों को स्टॉक एक्सचेंज, समाशोधन निगमों एवं डिपॉजिटरी जैसे एमआईआई के कामकाज की व्यापक समीक्षा के बाद अंतिम रूप दिया गया है. ये बदलाव आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित होने की तारीख से 180 दिनों के बाद प्रभावी होंगे.
अब एमआईआई के कार्यों को तीन कार्यक्षेत्रों में वर्गीकृत किया जाएगा. इनमें अहम संचालन, विनियमन, अनुपालन एवं जोखिम प्रबंधन, और व्यवसाय विकास एवं अन्य कार्य शामिल हैं.
पहले दो कार्यक्षेत्रों के तहत कार्यों की अगुवाई करने वाले प्रमुख प्रबंधन कार्मिक (केएमपी) पदानुक्रम में तीसरे कार्यक्षेत्र के प्रमुख अधिकारी के समकक्ष होंगे. इसके साथ ही एमआईआई को पहले दो कार्यक्षेत्रों में आने वाले कार्यों के लिए संसाधन आवंटित करने को उच्च प्राथमिकता देनी होगी.
सेबी ने एक बयान में कहा कि एमआईआई को अनिवार्य रूप से सार्वजनिक हित निदेशक (पीआईडी) नियुक्त करना होगा. पीआईडी के पास प्रौद्योगिकी, कानून और विनियमन, वित्त और खातों एवं पूंजी बाजार के क्षेत्रों में विशेषज्ञता होनी चाहिए.
पीआईडी हर छह महीने में मिलते रहेंगे और बाजार संस्थानों के निदेशक मंडल को रिपोर्ट देने के साथ ही उन्हें सेबी को भी एक रिपोर्ट भेजनी होगी.
इसके साथ ही एमआईआई और उनकी वैधानिक समितियों के कामकाज का हर साल आंतरिक मूल्यांकन किया जाएगा, जबकि बाहरी मूल्यांकन तीन साल में एक बार किसी स्वतंत्र संस्था द्वारा किया जाएगा.
सेबी ने कहा कि एमआईआई को डेटा साझा करने और निगरानी के लिए एक आंतरिक नीति बनाने की आवश्यकता होगी.