ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री पर 28 फीसदी जीएसटी : पढ़ें इंडस्ट्री फेडरेशन और गेम्स 24 के भाविन से बातचीत

जीएसटी काउंसिल के फैसले के बाद ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन (एआईजीएफ AIGF) के प्रमुख रोलैंड लैंडर्स और गेम्स 24 के प्रमुख भाविन पांड्या से हमारे सहयोगी चैनल बीक्यू प्राइम ने बातचीत की.

ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री पर 28 फीसदी जीएसटी : पढ़ें इंडस्ट्री फेडरेशन और गेम्स 24 के भाविन से बातचीत

भाविन पांड्या (बांये) और रोलैंड लैंडर्स (दाहिने)

नई दिल्ली:

जीएसटी काउंसिल की बैठक में ऑनलाइन गेमिंग पर 20 फीसदी का जीएसटी लगाया गया है. इस टैक्स के लगने के फैसले के बाद इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की काफी कड़ी प्रतिक्रिया आ रही है. इंडस्ट्री के फेडरेशन ने भी काउंसिल के फैसले पर अपनी नाराजगी जताई है. साथ ही अलग अलग गेमिंग प्लेटफॉर्म को चला रहे लोगों का भी सरकार के फैसले को समर्थन नहीं है. कई लोगों का मानना है कि इससे पूरी इंडस्ट्री को काफी नुकसान होगा.

जीएसटी काउंसिल के फैसले के बाद ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन (एआईजीएफ AIGF) के प्रमुख रोलैंड लैंडर्स और गेम्स 24 के प्रमुख भाविन पांड्या से हमारे सहयोगी चैनल बीक्यू प्राइम ने बातचीत की.

प्रश्न : जीएसटी काउंसिल के फैसले पर प्रतिक्रिया

भाविन पांड्या का कहना है कि यह फैसला हतोत्साहित करने वाला है. यह सुनकर काफी आश्चर्य हुआ. हम लोग काफी परेशान हैं. यह सब तब हुआ है जब हम लगातार सरकार, नौकरशाह और हर उस विभाग के साथ लगातार भागदौड़ करके इंडस्ट्री के अंतररष्ट्रीय मानकों और प्रचलन के बारे में समझा रहे थे.

भाविन ने कहा कि हमने यह भी बताने की कोशिश की कि क्या किया जाना चाहिए जिससे यह इंडस्ट्री आगे बढे़. साथ ही यह भी बताया कि किस प्रकार सरकार इस उद्योग से ज्यादा से ज्यादा टैक्स भी प्राप्त कर सकती है. यह दुर्भाग्य की बात है कि इतना सबकुछ करने के बाद भी जीएसटी काउंसिल की ओर से यह फैसला लिया गया है.

इस बारे में रोलैंड लैंडर्स ने कहा कि यह गेम्स ऑफ स्किल के इंडस्ट्री के 60 साल के ज्यूरिसप्रूडेंस के खिलाफ है. यह चिंता का कारण है. उन्होंने बताया कि जब प्रत्यक्ष कर और अप्रत्यक्ष कर के बारे में बात हो रही थी तब इंडस्ट्री के सुझावों का स्वागत किया गया था और तब गेम ऑफ स्किल और गेम ऑफ चांस पर साफ तौर पर अंतर रखा गया था. सरकार और इंडस्ट्री ने साथ काम किया था .

लैंडर्स ने बताया कि इंडस्ट्री के लोगों को पिछले जीओएम और वर्तमान जीओएम के सदस्यों से मिलने का मौका भी मिला था. तब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या चल रहा है और यहां पर क्या किया जा सकता है इस बारे में विस्तार से चर्चा हुई थी. क्या रेट है क्या रेट लगाए जा सकते हैं. इस बारे में जीओएम ने इसकी अनुशंसा भी की थी.

लैंडर्स ने बताया कि हमने यह तय किया था कि 28 प्रतिशत जीएसटी ग्रोस गेमिंग रेवेन्यू ऑफ प्लेटफॉर्म फी होगा. लेकिन अब यह जीएसटी पूरे फेसवैल्यू पर लगाया गया है.  यह हमारे लिए आश्चर्य है.

प्रश्न - अब क्या बिजनेस होगा, बिजनेस पर क्या असर होगा...  

भाविन ने कहा कि अब कोई बिजनेस नहीं होगा. कोई बिजनेस ऑपरेशन नहीं होगा. हो सकता है कि अब कुछ समय लगे. वर्तमान बिजनेस मॉडल को बदलने में भी वक्त लगेगा. उन्होंने कहा कि हम रेवेन्यू पर 18 प्रतिशत से 28 प्रतिशत जीएसटी पर जाने को तैयार थे. वहां पर कुछ संभावना थी. जहां तक लोगों की बात है वे खेलते रहेंगे, हो सकता है कि वे कोई नया प्लेटफॉर्म तलाश लें. इसका परिणाम यह होगा कि सरकार को अब वो टैक्स नहीं मिलेगा जिसकी उसे अपेक्षा है. इस एक नुकसान यह होगा कि ग्राहक अब इल्लीगल ऑपरेटर के हाथों में फंस सकता है.

इस बारे में लैंडर्स ने कहा कि हर खेल के प्लेटफॉर्म पर इसका असर होगा. उन्होंने कहा कि भारत में इंडस्ट्री को करीब 12 साल हो गए हैं लेकिन डिजिटल इंडिया के बाद इंडस्ट्री को बूस्ट मिला. यहां पर करीब 950 कंपनियां हैं और इनमें से 80 प्रतिशत स्टार्ट अप हैं. ये सब यंग ब्राइट लोग हैं जो आईआईटी आदि संस्थान से निकले हैं.

उन्होंने कहा कि यहां हम आशा करते हैं कि यह उद्योग एक ट्रिलियन डॉलर का बने लेकिन अब जीएसटी परिषद के फैसले से सब पर असर पड़ेगा. पहले हमारे पास गेम डेवलेपर्स थे, फिर प्लेटफॉर्म आए और फिर पूरी इंडस्ट्री बनी. अब सब पर इस नए टैक्स सिस्टम का असर पड़ेगा. अब कई कंपनियां जो निवेश कर रहीं थी अब वे भी कतराएंगी. ग्राहक की तरफ से भी अब जो उसे जीतने की उम्मीद थी अब वह कम होगी और वह विदेशी गेमिंग प्लेटफॉर्म की ओर जाएगा.

उन्होंने कहा कि वे मानते हैं कि भारत में कई कंपनियों को नुकसान होगा और हो सकता है कि कुछ कंपनियां बंद भी हो जाएं और इसका सीधा फायदा विदेश की गेमिंग कंपनियों को होगा. सरकार को इन सब पहलुओं पर विचार करना होगा.

प्रश्न - लीगली क्या रुख रहेगा
जीएसटी परिषद के फैसले पर भाविन ने कहा कि जब यह कानून बनेगा तो यह सभी को मानना होगा. उन्होंने कहा कि जैसा कि वित्तमंत्री ने कहा है कि ऑनलाइन गेमिंग को लॉटरी आदि वाले कानून में जोड़ा जाएगा तो वह नियम मानना ही होगा. उन्होंने कहा कि हम लोग मिलकर एक बार फिर से जरूरी लोगों के पास जाएंगे और उनके सामने अपनी बात रखेंगे. हम कोशिश करेंगे कि इंडस्ट्री को बचाया जाएगा और सरकार यदि ऐसा कोई कदम उठाती है तो हम उसका स्वागत करेंगे.

इस मुद्दे पर लैंडर्स ने कहा कि इंडस्ट्री यूनाइटेड है. उन्होंने कहा कि जब पिछले कुछ समय में इंडस्ट्री ने जो ग्रोथ की है. और पिछले कुछ समय में सरकार ने जो कदम उठाए हैं, उससे काफी उम्मीद थी. इंडस्ट्री में बदलाव होंगे. काउंसिल की ओर से जो बातें कहीं गई हैं पहले देखते हैं कि क्या बदलाव किया जाता है. उसके बाद हम तय कर पाएंगे कि क्या करना है.

प्रश्न - सरकार से क्या उम्मीद
भाविन ने कहा कि इस पूरी इंडस्ट्री पर सरकार के फैसले का असर पड़ेगा. हम सरकार से उम्मीद करते हैं कि वे अपने फैसले पर पुन: विचार करें.

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