सोशल मीडिया का असर : पार्टियों को मिलने वाली कर राहत की सीमा तय कर सकती है सरकार

सोशल मीडिया का असर : पार्टियों को मिलने वाली कर राहत की सीमा तय कर सकती है सरकार

खास बातें

  • चुनाव नहीं लड़ने वाले संगठनों पर शिकंजा कसने की तैयारी
  • चुनाव आयोग की सिफारिशों के संदर्भ में इस मुद्दे पर गौर करेगी सरकार
  • चुनाव आयोग ने 2000 रुपये से अधिक के गुप्त चंदे पर रोक लगाने की मांग की है
नई दिल्ली:

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा कि सरकार कर राहत का लाभ ले रहे राजनीतिक दलों के लिए एक सीमा तय करने की योजना पर विचाार कर रही है ताकि चुनाव नहीं लड़ने वाले ऐसे संगठनों द्वारा धनशोधन पर रोक लगाई जा सके. उन्होंने कहा कि राजस्व सचिव से कहा गया है कि इस संबंध में आई चुनाव आयोग की सिफारिशों के संदर्भ में इस मुद्दे पर गौर किया जाए.

गौरतलब है कि नोटबंदी के इस दौर में राजनीतिक दलों को मिलने वाली छूट और पैसे जमा करने को लेकर बहस जारी है.ऐसे में सरकार के इस कदम को सोशल मीडिया के असर के रूप में देखा जा सकता है.

जेटली की यह टिप्पणी काफी महत्व रखती है क्योंकि चुनाव आयोग सरकार को कानूनों में संशोधन कर चुनाव नहीं लड़ने तथा लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में जीत नहीं दर्ज करने वाली पार्टियों को मिलने वाली कर राहत पर रोक लगाने की सिफारिश की है. आयोग ने सरकार से इस बात पर भी विचार करने को कहा है कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले 2000 रूपये से अधिक के गुप्त चंदे पर भी रोक लगाई जाए.

वित्त मंत्री ने कहा, "मैं बता सकता हूं कि पहली बात यह है कि परोक्ष तौर पर दिए चंदे को चुनाव आयोग ने गुप्त कहा है तथा दूसरी बात राजनीतिक दलों को मिलने वाली छूट है. कुछ राजनीतिक दल ऐसे हैं जो केंद्र एवं राज्यों में प्रभावी रूप से चुनाव लड़ते हैं. आपके पास बड़ी संख्या में ऐसे राजनीतिक दल हैं जो चुनाव लड़ने नहीं बल्कि कर छूट हासिल करने के लिए पंजीकृत हुए हैं."

उन्होंने कहा, "इस पहलू से आसानी से निबटा जा सकता है. मैंने पहले ही राजस्व सचिव से इस बारे में गौर करने के लिए कह दिया था. लिहाजा हमें एक सीमा अर्हता तय करना होगा ताकि हम ऐसे राजनीतिक दलों को खत्म कर सकें जो वास्तविक राजनीतिक दल न होकर केवल धन पर्वितन के लिए बनाए गए हैं."

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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