प्रवर्तन निदेशालय की माल्या पर बड़ी कार्रवाई, 6,630 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की

प्रवर्तन निदेशालय की माल्या पर बड़ी  कार्रवाई,  6,630 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की

उद्योगपति विजय माल्या (फाइल फोटो)

खास बातें

  • माल्या की संपत्ति कुर्क करने के संबंध में ईडी की दूसरी कार्रवाई
  • मामले की सीबीआई भी कर रही है जांच
  • माल्या ने 2005 से 2010 के बीच लिया था कर्ज
नई दिल्ली:

प्रवर्तन निदेशालय ने समस्याओं में फंसे व्यवसायी विजय माल्या की 6,630 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क करने का आदेश शनिवार को दिया. माल्या की संपत्ति कुर्क करने के संबंध में निदेशालय का यह दूसरा आदेश है.

मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी शराब कारोबारी और उसके सहयोगियों के फार्म हाउस, फ्लैट और एफडी जब्त कर चुका है. एजेंसी ने हाल ही में इस संदर्भ में जांच का दायरा बढ़ाते हुए स्टेट बैंक की अगुवाई वाले बैंकों के समूह से लिए गए 6,027 करोड़ रुपये का कर्ज नहीं चुकाने के मामले में भी जांच शुरू की है. इस मामले की सीबीआई भी जांच कर रही है और उसने पिछले महीने इसमें एक नया मामला दर्ज किया है. नया मामला दर्ज करने के बाद माल्या के खिलाफ यह ताजा कारवाई की गई है.

प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में अब तक 8,044 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति कुर्क कर चुका है. उसने कुछ महीने पहले ही 1,411 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की थी. मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून के प्रावधानों के तहत जारी अस्थायी कुर्की आदेश में उसने अलीबाग के मांडवा में 25 करोड़ रुपये मूल्य का फार्म हाउस, बेंगलुरु में किंगफिशर टॉवर में 565 करोड़ रुपये मूल्य के कई फ्लैट, निजी बैंक में 10 करोड़ रुपये मूल्य के माल्या के एफडी तथा यूएसएल, यूनाइटेड ब्रेवरीज लि., मैकडोवेल होल्डिंग कंपनी के 3,635 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर की कुर्की शामिल है. इन कंपनियों में शराब कारोबारी, यूबीएचएल तथा उसके नियंत्रण वाली इकाइयों की संयुक्त रूप से हिस्सेदारी है.

एजेंसी के आदेश के अनुसार, "आज के आदेश के तहत कुल 4,234.84 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को कुर्क करने का आदेश दिया गया है लेकिन इन संपत्ति का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 6,630 करोड़ रुपये है." ईडी का आरोप है कि ये संपत्तियां बैंक ऋण नहीं लौटाने की कथित आपराधिक गतिविधियों के जरिये हासिल की गईं. जांच एजेंसी का दावा है कि माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस तथा यूनाइटेड ब्रेवरज होल्डिंग लि. के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और बैंकों के समूह से कर्ज प्राप्त किया. इस समूची राशि में से अभी भी 4,930.34 करोड़ रुपये की मूल राशि नहीं लौटाई गई है.

इसके अलावा माल्या ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से नियंत्रित समूह की अन्य कंपनियों के नाम पर शेयर हासिल किए. इसीलिए यह लगता है कि किंगफिशर एयरलाइंस के प्रवर्तकों (माल्या और यूबीएचएल) के पास पर्याप्त कोष था लेकिन बैंकों समूह से लिए गए कर्ज को लौटाने का कोई इरादा नहीं था.

ईडी के आदेश में कहा गया है, "उन्होंने बिना किसी उल्लेखनीय जवाबदेही के जानबूझकर 3,600 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर यूटीआई इनवेस्टमेंट एडवाइजरी सर्विसेज लि. तथा अन्य संस्थान के पास गिरवी रखे थे और इस प्रकार उन्होंने बैंक समूह को अंधेरे में रखा." प्रवर्तन निदेशालय ने इसी प्रकार के आईडीबीआई से जुड़े 900 करोड़ रुपये के बैंक ऋण चूक के संदर्भ में मामला दर्ज करने के बाद हाल ही में माल्या और उनके सहयोगियों के खिलाफ पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया है. केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने भी इस महीने की शुरआत में यह ताजा मामला दर्ज किया है.

एजेंसी ने स्टेट बैंक द्वारा बैंक समूह की तरफ से प्राप्त शिकायत के आधार पर आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी का यह मामला दर्ज किया है. बैंक समूह ने 6,027 करोड़ रुपये के नुकसान की शिकायत एजेंसी के पास दर्ज कराई. यह कर्ज माल्या ने 2005 से 2010 के बीच लिया था.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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