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खास बातें
- केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने कहा, ‘‘रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर नीलामी की गई होती तो इससे एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति होती। हकीकत यह है कि नीलामी हुई। लेकिन, वे एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये कहां हैं।’’
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने मंगलवार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) विनोद राय पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि 2-जी स्पेक्ट्रम की नीलामी में क्यों नहीं 1.76 लाख करोड़ रुपये जुटाए जा सके। इसके साथ ही उन्होंने लेखाकार द्वारा आंके गए नुकसान पर सार्वजनिक चर्चा करने के लिए उन्हें आमंत्रित किया।
तिवारी ने कहा, ‘‘रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर नीलामी की गई होती तो इससे एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति होती। हकीकत यह है कि नीलामी हुई। लेकिन, वे एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये कहां हैं।’’
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउन्डेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम से इतर उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘कैग अब सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वह अब लंबा साक्षात्कार दे रहे हैं। उनके पास समय है। इसलिए, मैं उनसे अनुरोध कर रहा हूं कि वह अपनी पसंद के स्थान और समय पर अपनी 2-जी रिपोर्ट पर सार्वजनिक चर्चा करें और लोगों को खुद फैसला करने दें। सेवानिवृत्ति के बाद व्यवस्थित हो जाने के एक महीने या दो महीने बाद वह ऐसा कर सकते हैं।’’
मंत्री ने कहा कि 2-जी स्पेक्ट्रम पर संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में एक चर्चा हुई लेकिन विशेषाधिकार से बंधे होने के कारण वह उस चर्चा की सामग्री का खुलासा नहीं कर सकते।
तिवारी ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि वह (राय) भी संसदीय परिपाटियों का सम्मान करते हैं लेकिन हम दोनों या सरकार या कैग के अपनी राय अलग से सार्वजनिक करने का कोई मतलब नहीं है। सार्वजनिक चर्चा होने दें और लोगों को अंतिम निर्णय करने दें कि जो तथ्य रखे गए थे वे सही थे या गलत।’’
राय 22 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट में कहा कि उन्हें कपिल सिब्बल और अन्य मंत्रियों पर तरस आ रहा है जिन्होंने ‘जीरो लॉस’ थ्योरी देकर 2-जी मामले पर कैग की रिपोर्ट को खारिज करने की कोशिश की थी।
इससे पहले ओआरएफ के एक कार्यक्रम में तिवारी ने कहा कि भ्रष्टाचार कम करने की मांग एक सही मांग है, लेकिन कैग विनोद राय ने सार्वजनिक चर्चा में एक काल्पनिक और अतिशयोक्तिपूर्ण संख्या को पेश किया।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने कुछ अतिशयोक्तिपूर्ण और काल्पनिक संख्याओं को लेकर बड़ी बहस देखी है जिसे सार्वजनिक चर्चा के लिए कुछ बेहद जिम्मेदार संस्थाओं और पदाधिकारियों ने रखा। जब संस्थान काल्पनिक लेखन में शामिल होंगे तो यह किसी मुद्दे के साथ संभवत: सबसे बड़ा अपकार हो सकता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कैग ने विगत छह वर्षों में काल्पनिक संख्या को सार्वजनिक पटल पर रखकर भारत के साथ सबसे बड़ा अपकार किया है। इसका हकीकत के साथ कोई लेना-देना नहीं है।’’ तिवारी ने कहा कि आतंकवाद के संबंध में जायज चिंताएं हैं लेकिन मैं नहीं सोचता कि पाकिस्तान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने की देश के भीतर कोई इच्छा है। भारतीय ऐसी पहल चाहेंगे जिससे सुलह समझौते और शांतिपूर्ण एवं स्थिर दक्षिण एशिया का रास्ता निकल सके।