8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ आयोग अलग-अलग शहरों में सरकारी कर्मचारियों संगठनों, पेंशन होल्डर्स और एक्सपर्ट्स के साथ बैठक कर रहा है, जिससे वो जान सके कि कर्मचारियों की मांगें असल में हैं क्या. अभी तक वेतन आयोग की कई मीटिंग्स हो चुकी हैं और इनके जरिए एक पिक्चर क्लियर हो गई है कि आखिर कर्मचारी इस 8वें वेतन आयोग से क्या डिमांड कर रहे हैं.
बता दें कि कर्मचारी की मांगें अब फिटमेंट फैक्टर से काफी आगे जा चुकी हैं. पिछले कुछ समय में हम देखते थे कि सैलरी हाइक का मुद्दा सबसे जरूरी रहता था, या फिर रिटायरमेंट की बाद की लाइफ के लिए पेंशन पर जोर रहता था, पर इस बार स्थिति अलग दिख रही है. वेतन आयोग के सामने वो 6 बड़ी मांगें रख दी हैं, जिससे सरकारी कर्मचारी की जिंदगी पूरी तरह से बदल सकती है.
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1. बेसिक पे के साथ भत्तों में भी हो सुधार
कर्मचारी अभी बेसिक पे के साथ महंगाई के अनुसार भत्तों में बढ़ोतरी की डिमांड कर रहे हैं. उनका मानना है कि अगर महंगाई के अनुसार अलाउंसेज नहीं बढ़ेंगे तो बेसिक पे का कोई मतलब नहीं रह जाता. बड़े शहरों के कर्मचारी अपने एचआरए के साथ ट्रांसपोर्ट अलाउंस को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. साथ ही बच्चों की शिक्षा महंगी हो रही है, इसे लेकर चिल्ड्रन एजुकेशन अलाउंस को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
2. करियर ग्रोथ के लिए प्रमोशन सही समय पर हो
ये एक सच्चाई है कि सरकारी कर्मचारी एक ही पोस्ट पर पूरी जिंदगी निकाल देता है. कई साल उनका प्रमोशन अटका रहता है. संगठनों ने डिमांड की है कि 8वां वेतन आयोग कैडर रीस्ट्रक्चरिंग के जरिए प्रमोशन ठीक समय पर हो, इसके लिए रूल्स बनाए. अगर किसी वजह से प्रमोशन नहीं हो पा रहा है तो इंक्रीमेंट के जरिए इस समस्या को कुछ हद तक कम किया जाए.
3. पेंशन के नियमों को करें सरल
सैलरी बढ़ाने के बाद जो दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा देखने को मिला वो पेंशन को लेकर है. पेंशनर्स संगठनों ने मांग उठाई है कि पेंशन के नियमों को आसान बनाया जाए. इसके अलावा जो पुराने पेंशन भोगी हैं, उनका कहना है कि कई वेतन आयोग की वजह से उनकी पेंशन में बड़ा अंतर आ गया है, जिसे 8वें वेतन आयोग में एक समान करना चाहिए.
4. एनपीएस को लेकर दुविधा को दूर करें
कर्मचारियों का कहना है कि नई पेंशन स्कीम मार्केट के उतार-चढ़ाव पर निर्भर है, इसकी रिटर्न निश्चिंत नहीं ही सकती. इसलिए वेतन आयोग इस उतार-चढ़ाव को दूर करे. रिटायरमेंट के बाद एक सेफ और फिक्स इनकम की गारंटी देने के लिए नियमों में बड़े बदलाव करें.
5. मेडिकल बिल का रीइंबर्समेंट जल्दी हो
बढ़ती उम्र के साथ बीमारियां भी बढ़ती हैं. ऐसे में खर्चों में भी इजाफा हो जाता है. सरकारी कर्मचारियों के साथ पेंशनर्स ने मुद्दा उठाया है कि अभी मेडिकल बिलों के रीइंबर्समेंट में महीनों का समय लग जाता है. साथ ही पैनस में शामिल हॉस्पिटल भी कम हैं. इसलिए मेडिकल सुविधाओं के कैशलेस किया जाए और क्लेम की बड़ी कागजी प्रक्रिया को कम करके इसे सरल बनाया जाए.
6. सोशल सिक्योरिटी पर सरकार का मिले पूरा साथ
अभी तक की हुई बैठकों में सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा भी अहम दिखा. कर्मचारी संगठन ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम (GIS), ऑन-ड्यूटी दुर्घटना मदद, दिव्यांग सुरक्षा को मिलने वाली एकमुश्त सहायता राशि को कई गुना बढ़ाने की वकालत कर रहे हैं. कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई के समय में पुरानी योजनाएं आउटडेटेड हो चुकी हैं, इन्हें अपग्रेड करना चाहिए.
तो ये वो सभी 6 मांगें हैं जो लगभग सभी बैठकों में वेतन आयोग के सामने रखी गईं हैं. अगर ये सभी डिमांड मान ली जाती हैं तो 8वें वेतन आयोग कर्मचारियों के लिए केवल एक पे-रिवीजन ही नहीं बल्कि उनके करियर के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है.
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