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यश की टॉक्सिक को मिला बेंगलुरु कोर्ट का 'रक्षा कवच', फिल्म के खिलाफ नेगेटिव कमेंट करना पड़ सकता है भारी

कन्नड़ सुपरस्टार यश की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' की रिलीज से पहले बेंगलुरु कोर्ट ने मेकर्स को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने फिल्म के खिलाफ झूठे, बदनाम करने वाले और पायरेटेड कंटेंट के सर्कुलेशन पर अंतरिम रोक लगा दी है.

यश की टॉक्सिक को मिला बेंगलुरु कोर्ट का 'रक्षा कवच',  फिल्म के खिलाफ नेगेटिव कमेंट करना पड़ सकता है भारी
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yash toxic movie Bengaluru court order: कन्नड़ सिनेमा के 'रॉकिंग स्टार' यश एक बार फिर बड़े पर्दे पर तहलका मचाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. उनकी मोस्ट अवेटेड फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' आज यानी 26 अगस्त को रीलीज हो चुकी है. लेकिन रिलीज से पहले ही यह एक्शन थ्रिलर मूवी सुर्खियों में बनी हुई है. इसी बीच मूवी के ग्रैंड टीजर और गजब की हाइप के बीच फिल्म के कुछ सीन्स पर छिड़े विवाद ने मेकर्स की धड़कनें बढ़ा दी थीं.  उन्हें लग रहा था कि कही रिलीज के बाद किसी तरह का अनचाहा नुकसान मूवी को उठाना ना पड़ जए. ऐसे में इससे बचने के लिए प्रोड्यूसर केवीएन प्रोडक्शंस (KVN Productions) ने तुरंत बेंगलुरु कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अब अदालत से फिल्म की टीम को एक बड़ी राहत मिल चुकी है.

भ्रामक और बदनाम करने वाले कंटेंट पर लगी रोक

मामले की सुनवाई करते हुए बेंगलुरु कोर्ट ने फिल्म के खिलाफ झूठे, गलत इरादे वाले, बदनाम करने वाले और अपमानजनक कंटेंट के पब्लिकेशन या सर्कुलेशन पर एकतरफा अस्थायी रोक लगा दी है. यह अंतरिम इंजंक्शन 28 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक लागू रहेगा. हालांकि, कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि निष्पक्ष रिव्यू और सिनेमाई आलोचना (Reviews & Criticism) पर सीधे तौर पर कोई बैन नहीं लगाया गया है.

किन लोगों के खिलाफ मांगी गई थी रोक?

केवीएन प्रोडक्शंस ने 'एक्स कॉर्प' (ट्विटर) और अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ (जिन्हें कानूनी भाषा में 'जॉन डो' या 'अशोक कुमार' कहा जाता है) याचिका दायर की थी. मेकर्स का कहना था कि रिलीज के समय अज्ञात लोग फर्जी दावों, पायरेसी और आपत्तिजनक मीम्स के जरिए फिल्म की इमेज को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं.मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने 'बैलेंस ऑफ कन्वीनियंस' का फार्मूला  अपनाते  और फिल्म और प्रोड्यूसर्स को अंतरिम राहत दी. लेकिन इसे लेकर कोर्ट ने कुछ शर्ते प्रोड्यूसर पर भी लगाई है.

क्या हैं कोर्ट की शर्तें?

प्रोड्यूसर्स को सिविल प्रोसीजर कोड के ऑर्डर 39 रूल 3A का पालन करते हुए सभी संबंधित दस्तावेज और एप्लीकेशन की कॉपी बचाव पक्ष को उपलब्ध करानी होगी. कोर्ट ने साफ केवीएम प्रोडक्शन को भी चेतावनी दी है कि इस आदेश का इस्तेमाल सिर्फ फर्जी और नुकसानदेह कंटेंट को रोकने के लिए होगा. अगर इसका उल्लंघन पाया गया, तो यह रोक रद्द भी की जा सकती है.

क्या है जॉन डो ऑर्डर'

जॉन डो ऑर्डर (John Doe Order) एक ऐसा कानूनी आदेश (Injunction) है, जिसे अदालतें उन अज्ञात या गुमनाम लोगों के खिलाफ जारी करती हैं जिनकी पहचान मुकदमा दायर करते समय पता नहीं होती है. यह पहला मौका नहीं है जब साउथ इंडस्ट्री में 'जॉन डो' (John Doe) ऑर्डर का सहारा लिया गया हो.  हाल के दिनों में पायरेसी, सोशल मीडिया ट्रोलिंग और पेड नेगेटिविटी से बचने के लिए मेकर्स रिलीज से पहले ही कोर्ट से इंजंक्शन ऑर्डर हासिल कर रहे हैं.

कोर्ट के फैसले से बेहद खुश है मेकर्स

गीतू मोहनदास के डायरेक्शन में बनी 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' 1940 से 1970 के दशक के गोवा की क्राइम और एक्शन से भरपूर पृष्ठभूमि पर आधारित है. फिल्म में यश के साथ नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसे बड़े सितारों की फौज नजर आने वाली है. कोर्ट से मिली इस बड़ी जीत के बाद अब मेकर्स बेहद खुश है.

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