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'मैं सबको मारूंगा तो तारा सिंह क्या करेगा', गदर 2 के सेट पर बेटे उत्कर्ष ने हटवा दिए थे अपने एक्शन सीन, डायरेक्टर अनिल शर्मा का खुलासा

उत्कर्ष शर्मा में धर्मेंद्र की विनम्रता और अमिताभ-शाहरुख जैसी समझ देखना चाहते हैं अनिल शर्मा. निर्देशक ने बताया कि 'गदर 2' में बेटे ने खुद अपने दमदार एक्शन सीन हटवाने की बात कही थी, क्योंकि उसके लिए फिल्म की कहानी अपने किरदार से ज्यादा महत्वपूर्ण थी.

'मैं सबको मारूंगा तो तारा सिंह क्या करेगा', गदर 2 के सेट पर बेटे उत्कर्ष ने हटवा दिए थे अपने एक्शन सीन, डायरेक्टर अनिल शर्मा का खुलासा
गदर के डायरेक्टर अनिल शर्मा की फोटो

जाने-माने निर्देशक अनिल शर्मा इन दिनों अपनी फिल्म ‘अर्जुन नागा' की शूटिंग में व्यस्त हैं. इस फिल्म में उनके बेटे उत्कर्ष शर्मा के साथ अर्जुन रामपाल, निधि अग्रवाल, रणदीप हुड्डा, जरीना वहाब, नमोशी चक्रवर्ती, सेलिना जेटली और राहुल मित्रा जैसे कलाकार नजर आएंगे. यह एक पीरियड ड्रामा है, जिसमें 1960 और 1970 के दशक की दुनिया दिखाई जाएगी. फिल्म की शूटिंग भारत के अलावा कई अन्य देशों में भी होगी.

‘गदर' और ‘गदर 2' में उत्कर्ष शर्मा को तारा सिंह के बेटे जीते के किरदार में देख चुके दर्शकों के लिए अब उन्हें ‘अर्जुन नागा' में देखना दिलचस्प होगा. उत्कर्ष ‘जीनियस' और ‘वनवास' जैसी फिल्मों में भी काम कर चुके हैं. बेटे के अभिनय और उसके भविष्य को लेकर अनिल शर्मा काफी आश्वस्त नजर आते हैं. एनडीटीवी के साथ खास बातचीत में जब उनसे पूछा गया कि उत्कर्ष एक अभिनेता तो हैं ही, लेकिन वह उन्हें हिंदी सिनेमा के किस अभिनेता जैसा इंसान बनते देखना चाहते हैं, तो अनिल शर्मा ने कई दिग्गजों का नाम लिया.

उन्होंने कहा, “देखिए भाई, बहुत सारे अभिनेता हैं. आपने बड़ा अजीब-सा सवाल कर दिया. मैं तो चाहता हूं कि उसमें धर्मेंद्र जी जैसी विनम्रता हो. वह इतने बड़े हीरो थे, लेकिन उन्हें खुद पता ही नहीं चला कि वह कब इतने बड़े धर्मेंद्र बन गए. समझ रहे हैं न? उसमें अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान जैसी समझ होनी चाहिए और दिलीप कुमार जैसा संपूर्ण अभिनेता बनने की क्षमता होनी चाहिए. मैं तो चाहता हूं कि उसमें ये सारी खूबियां हों. मैं उसमें मार्लन ब्रैंडो और रॉबर्ट डी नीरो जैसी विशेषताएं भी देखना चाहता हूं. लेकिन वह कुछ बने या न बने, एक अच्छा इंसान जरूर बने. उत्कर्ष अपनी अलग पहचान बनाए और अपनी व्यक्तिगत विशेषताओं वाला अभिनेता बने. मैं नहीं चाहता कि वह किसी दूसरे की तरह बने.”

‘उत्कर्ष को अपनी नहीं, फिल्म की चिंता रहती है'

अनिल शर्मा से जब उत्कर्ष के अभिनय में आए बदलाव और उनकी तरक्की के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बेटे की तारीफ करते हुए ‘गदर 2' की शूटिंग से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया. उन्होंने बताया कि उत्कर्ष की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह अपने किरदार से ज्यादा फिल्म की जरूरत को समझते हैं. अनिल शर्मा ने कहा, “बहुत सारे कलाकार हैं और सब अच्छा काम कर रहे हैं. उत्कर्ष में भी समय के साथ ग्रोथ हुई है. उसके अंदर सबसे बड़ी खूबी क्या है, यह मैं आपको ‘गदर 2' का एक किस्सा सुनाकर बताता हूं. उत्कर्ष में एक ऐसी खूबी है, जो बहुत कम अभिनेताओं में होती है.”

उन्होंने बताया कि ‘गदर 2' में एक ऐसा एक्शन सीक्वेंस था, जिसमें उत्कर्ष का किरदार सेना से बचकर निकलता है. फिल्म के एक्शन निर्देशक रवि मास्टर ने उत्कर्ष से कहा कि इस दृश्य में उसे बहुत सारे लोगों को पीटना और मारना होगा. लेकिन उत्कर्ष इसके लिए तैयार नहीं थे. निर्देशक के समझाने के बावजूद जब कुछ दृश्य शूट कर लिए गए, तब भी उत्कर्ष ने अपने पिता से इस बारे में बात की.

अनिल शर्मा के मुताबिक, उत्कर्ष ने उनसे कहा, “पापा, अगर मैं ही सबको मार सकता हूं, तो फिर तारा सिंह की क्या जरूरत है? मैं तो बेटा हूं. मेरी वजह से आपकी फिल्म तभी काम करेगी, जब मैं बेटे की तरह रहूं. अगर मैं हीरो बनकर सबको मारने लगूंगा, तो तारा सिंह की क्या जरूरत रह जाएगी? मैं ही सब कर लूंगा तो फिर उसकी जरूरत ही क्या है?”

अनिल शर्मा ने बताया कि उत्कर्ष ने उन दृश्यों को भी फिल्म से हटवा दिया, जिनमें वह पुलिस और सेना के जवानों को मारते नजर आ रहे थे. उत्कर्ष चाहते थे कि उनके किरदार को मुश्किलों में दिखाया जाए, ताकि तारा सिंह उसे बचाने आएं और कहानी का असर बना रहे.

‘दूसरे हीरो को अपने एक्शन और सीन की चिंता होती है'

इस किस्से के जरिए अनिल शर्मा ने बताया कि उत्कर्ष की प्राथमिकता अपने किरदार को बड़ा दिखाना नहीं, बल्कि फिल्म की कहानी को सही तरीके से पेश करना है. उन्होंने कहा, “किस हीरो को आप ऐसा कहते हुए सुनेंगे? आम तौर पर हर हीरो को अपने एक्शन और अपने सीन चाहिए होते हैं. फिल्म की चिंता किसी को नहीं होती. लेकिन उत्कर्ष की सबसे बड़ी खूबी यही है कि उसे फिल्म की चिंता है. यही आगे चलकर उसकी कामयाबी की वजह बनेगी.”

उन्होंने आगे कहा, “वह मेरा बेटा हो या न हो, उसमें यह खूबी है. अगर वह मेरा बेटा नहीं भी होता, तब भी मैं यही कहता कि यह लड़का फिल्म के बारे में सोचता है. वह अपने रोल के बारे में सोचता है. अगर वह बेटे का किरदार निभा रहा है, तो बेटे की तरह निभाएगा. अब ‘अर्जुन नागा' में उसका किरदार जैसा है, वह उसी के मुताबिक अभिनय कर रहा है. लोग इसे ग्रोथ कहते हैं, लेकिन भाई, किरदार जैसा होगा, वह वैसा ही तो निभाएगा. यही उसकी खूबी है.”

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अनिल शर्मा की बातों से साफ है कि वह उत्कर्ष को सिर्फ एक सफल अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि ऐसा कलाकार बनते देखना चाहते हैं जो अपनी अलग पहचान बनाए और कहानी की जरूरत को सबसे ऊपर रखे. उनके लिए उत्कर्ष की सबसे बड़ी उपलब्धि यही होगी कि वह किसी बड़े सितारे की नकल करने के बजाय अपनी खूबियों के दम पर दर्शकों के बीच जगह बनाए.

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