भोजपुरी फिल्मों के गाने अपने धमाकेदार म्यूजिक और मजेदार बोल के लिए जाने जाते हैं. इन गानों में मस्ती भरा अंदाज होता है, जो दर्शकों को खूब पसंद आता है. बॉलीवुड के म्यूजिक डायरेक्टर्स भी भोजपुरी के गानों से प्रभावित होते रहे हैं. गोविंदा की कई फिल्मों में भोजपुरी गानों से इंस्पायर्ड म्यूजिक और बोल सुनाई दिए हैं. बादशाह का गाना सइया जी हो या दबंग का राजा जी, या गोविंदा का नथुनिया पर गोली मारे, ये गाने भोजपुरी से ही हिंदी फिल्मों में आए हैं. ऐसा ही एक और गाना भी है जो भोजपुरी के नौटंकी से हिंदी फिल्म में आया और खूब पॉपुलर हुआ.
कौन सा है वो गाना?
यूपी-बिहार में नौटंकी खूब हुआ करती थी. हालांकि अब धीरे-धीरे ये परंपरा भी गायब हो रही है. नौटंकी एक तरह का पारंपरिक लोक-नाट्य होता है. इसमें मंच पर ड्रामा किया जाता है, जिसमें किसी फिल्म की तरह की गाने भी शामिल होते हैं. इसी नौटंकी से निकला है 90 के दशक का गोविंदा का मशहूर गाना 'जेठ की दोपहरी में पांव जले है...'.
साल 1995 में आई कॉमेडी-ड्रामा फिल्म 'कुली नं 1' में गोविंदा और करिश्मा कपूर की जोड़ी ने खूब धमाल मचाया था. इस फिल्म के कई हिट गाने जबरदस्त हिट रहे. वहीं 'जेठ की दोपहरी में पांव जले है...' गाने ने यूपी-बिहार में खूब गर्दा उड़ाया और इस गाने का इंस्पिरेशन भोजपुरी के एक नौटंकी से ली गई थी.
गीतकार समीर ने खुद बताया सच
इस गाने को लिखने वाले लिरिसिस्ट समीर ने खुद इससे जुड़ा मजेदार किस्सा बताया. समीर ने बताया कि कैसे इस गाने को उन्होंने एक भोजपुरी नौटंकी में सुना था, जहां से उन्हें इस गाने का इंस्पिरेशन मिला. जिंगाबाद से बातचीत में समीर ने बताया कि एक बार वह नौटंकी में गए और वहां उन्होंने एक गाना सुना जिसके बोल कुछ इस तरह थे, 'जेठ की दोपहरी में पांव जलेला सैंया पांव जलेला...'. ये सुनने के बाद समीर ने ये सोच लिया किया ये गाना गाना चीची (गोविंदा) पर बिल्कुल फिट बैठेगा. समीर ने नौटंकी में सुने उस गाने में थोड़े हिंदी के बोल डाले और इसे बॉलीवुड के दर्शकों के लिए तैयार किया.
करोड़ों में व्यूज
गाने को कुमार सानू और पूर्णिमा ने गाया. इसका संगीत आनंद-मिलिंद दिया था. ये गाना जमकर चला और खूब पॉपुलर हुआ. यूट्यूब पर इसे 1 करोड़ 61 लाख से अधिक बार सुना जा चुका है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं