राजकपूर, जिन्हें बॉलीवुड का शोमैन भी कहते हैं, अपनी उम्दा अदाकारी और कमाल के निर्देशन के लिए जाने जाते थे. उन्होंने बॉलीवुड को एक से बढ़कर एक सफल फिल्में दीं. उनके फिल्मों के कई गाने भी सदाबहार रहे. 1963 में आई उनकी एक फिल्म का गाना इतना पसंद किया गया कि इस गाना के बोल पर एक फिल्म भी बन गई और वो भी बेहद सफल रही. इस गाने में मन्ना डे की जादुई आवाज ने इसे सीधे लोगों के दिलों में उतार दिया. यह गाना न सिर्फ एक आइकॉनिक सॉन्ग है, बल्कि भारतीय फिल्म संगीत का एक बेंचमार्क माना जाता है.
कौन सा है वो सॉन्ग?
यह गाना राग ‘भैरवी' पर आधारित है. मन्ना डे इस गाने को गाते हुए जिस तरह से कठिन हरकतों, तानों और शास्त्रीय बारिकियों का इस्तेमाल किया है, उसने इसे भारतीय फिल्म संगीत का एक बेंचमार्क बना दिया. इस गाने को गाना बेहद मुश्किल माना जाता है. मन्ना डे ने जिस तरह इसे हाई नोट पर गाया और गाने के दौरान जिस तरह की हरकतें की, वो इतनी सटीक थीं कि खुद उस्ताद बड़े गुलाम अली खान साहब ने इसकी तारीफ की. हम बात कर रहे हैं 1963 में आई फिल्म दिल ही तो है, के गाने ‘लागा चुनरी में दाग' की.
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इस गाने को साहिर लुधियानवी ने लिखा है. इसके गहरे और आध्यात्मिक बोल कबीरदास के अध्यात्म और दर्शन से प्रेरित माने जाते हैं. ‘चुंदरी' का अर्थ यहां मनुष्य की शरीर से है. ‘दाग' का अर्थ सांसारिक पाप, गलतियों या बुराइयों से है. इसका संगीत रोशन ने दिया था.
रानी मुखर्जी और अभिषेक बच्चन की फिल्म
इसी नाम पर आदित्य चोपड़ा ने 2007 में फिल्म रिलीज की. लागा चुनरी में दाग फिल्म में रानी मुखर्जी और अभिषेक बच्चन लीड रोल में थे. ये फिल्म भी काफी सफल रही, फिल्म में 1963 के मूल गाने को मॉर्डन टच देकर गाना गया था.
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