आज के समय में मनोरंजन के कई साधन मौजूद हैं. बड़ी स्क्रीन से लेकर टेलीविजन, OTT प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया तक, कई विकल्प हैं. लेकिन 90 का दशक बिल्कुल अलग था. उन दिनों, शो की लोकप्रियता TRP रेटिंग से नहीं, बल्कि लोगों से मिलने वाले सच्चे प्यार से मापी जाती थी. 90 के दशक में 'महाभारत' और 'रामायण' जैसे सीरियल बहुत पसंद किए जाते थे. लेकिन, एक और खास शो था जिसने लोगों का दिल जीत लिया. इस शो का नाम था 'सुरभि'. रेणुका शहाणे और सिद्धार्थ काक इसके होस्ट थे.
90 के दशक के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले शो में से एक
1990 से 2001 तक चलने वाला यह शो अपने समय के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले शो में से एक बन गया. 'सुरभि' भारतीय संस्कृति, विरासत और क्षेत्रीय कला पर केंद्रित था, जो दर्शकों को देश की विविधता की एक समृद्ध झलक दिखाता था. दर्शक इस शो से इतने गहराई से जुड़े हुए थे कि वे अपने विचार बताने के लिए चिट्ठियां भेजते थे.
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लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम
'सुरभि' के नाम भारत में सबसे लंबे समय तक चलने वाले कल्चरल टीवी शो का रिकॉर्ड है. इसकी जबरदस्त लोकप्रियता का एक मुख्य कारण दर्शकों की सक्रिय भागीदारी थी. शो में नियमित रूप से दर्शक चिट्ठियां भेजा करते थे. भेजे गए सवालों को शामिल किया जाता था और उनके जवाब दिए जाते थे.
उस समय मोबाइल फोन और इंटरनेट आम नहीं थे, इसलिए दर्शक इंडिया पोस्ट के जरिए 15 पैसे के पोस्टकार्ड पर अपने सवाल भेजते थे. लोगों का रिस्पॉन्स इतना जबरदस्त था कि एक बार शो को एक ही हफ्ते में 14 लाख से ज्यादा पोस्टकार्ड मिले, जिससे इसका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया. 'सुरभि' इतना लोकप्रिय हो गया कि लोग इतनी बड़ी संख्या में चिट्ठियां भेजने लगे कि पोस्ट ऑफिस के कर्मचारी भी परेशान हो गए.
पोस्ट ऑफिस में नहीं थी चिट्ठी रखने की जगह
हालात ऐसे हो गए कि शो के होस्ट सिद्धार्थ काक को अंधेरी पोस्ट ऑफिस से फोन आया. उन्होंने बताया कि पोस्टकार्ड रखने के लिए जगह कम पड़ गई थी और इतनी बड़ी संख्या में उन्हें डिलीवर करने का कोई साधन नहीं था. उन्होंने टीम से खुद आकर उन्हें ले जाने का अनुरोध किया.
हालत ऐसी हुई कि सभी चिट्ठियों को ले जाने के लिए उन्हें एक टेम्पो किराए पर लेना पड़ा. पोस्टकार्ड से सैकड़ों बैग भर गए थे, जिन्हें बाद में एक बंद कमरे में ले जाया गया, जहां उनकी छंटाई और गिनती की गई.
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