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दुख में गाया गया 63 साल पुराना ये गीत आज भी देता है सुकून, आशा पारेख का दर्द और लता मंगेशकर की आवाज का जादू है बरकरार

रात की अंधेरे कमरे मे बैठकर सुकून की चाह रख रहे हैं तो अपनी टीवी पर लगा लीजिए साल 1963 में आया ये गाना, लता मंगेशकर की आवाज और आशा पारिख की अदायगी ने बनाया दर्द भरे गाने को सुकून भरा.

दुख में गाया गया 63 साल पुराना ये गीत आज भी देता है सुकून, आशा पारेख का दर्द और लता मंगेशकर की आवाज का जादू है बरकरार
रात में अकेले बैठे हों तो सुनिए ये सुकून भरा गीत
नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा में बात जब भी पुराने गानों की आती है तो इस लिस्ट में कई ऐसे गाने शामिल होते हैं जिनको रात के सन्नाटे में, कमरे में डिम लाइट और मन के उदास होने पर सुनने में अलग ही असर करते हैं. ऐसा लगता है कि गीत का हर बोल आपकी भावनाओं को ही व्यक्त कर रहा है. आज हम एक ऐसे ही गीत की बात करेंगे जो 63 साल पहले आया था. इस गीत में प्रेमी से दूरी का दर्द साफ झलक रहा है. 1963 में आई फिल्म बिन बादल बरसात का, जिसमें दर्द ऐसा है कि सुनते ही दिल उस दौर मे चला जाता है. 

प्यार, श्रॉप और पुर्नजन्म पर बनी फिल्म

साल 1963 मे आई फिल्म बिन बादल बरसात 17 नवंबर को रिलीज हुई थी. फिल्म का निर्देशन ज्योति स्वरुप ने किया था. इस फिल्म की कहानी कोई नॉर्मल नही थी, बल्कि कहानी थी प्यार, धोखा और पुर्नजन्म पर आधारित थी. फिल्म में एक परिवार पर लगे श्राप का रहस्य कहानी को एक अलग ही मोड़ पर ले जाता है. ठाकुर परिवार के लड़ने ने बंजारी लड़की को धोखा दिया, जिसके बाद उसके परिवार को श्रॉप मिलता है कि कोई भी पुरुष जब शादी करेगा, तो उसकी पत्नी एक साल के भीतर रहस्यमय परिस्थितियों में मर जाएगी. ये श्रॉप सच साबित होता है. 

फिल्म में बिस्वजीत ने ठाकुर प्रभात और आशा पारेख ने संध्या गुप्ता का किरदार निभाया है. इनके अलावा फिल्म में मेहमूद, निआशी, पद्मा चव्हाण और देव किशन भी अहम भूमिका में नजर आए. 

लता की आवाज में बना सदाबहार

फिल्म के गाना "खुशी भी मिली हमको" गाने को लोगों ने काफी पसंद किया था. रात को आंखे बंद कर के इस गाने को सुनना एक अलग ही सुकून देता है. गाने के बोल शकीला बदायूंनी ने लिखे थे और इसका संगीत तैयार किया था हेमंत कुमार ने. इस दर्द भरे गाने को लता मंगेशकर ने अपनी आवाज से ऐसा पिरोया, कि आज भी इस गाने को सुनकर इसके अंदर मौजूद दर्द और तड़प का अंदाजा लग जाता है. गाने के बोल इस तरह थे- 

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रात खामोशी से आती है चली जाती है
जिंदगी दर्द के सांचे में ढल जाती है
खुशी भी मिलती है हमको तो गम से भरी
अजब है ये किस्मत की जादूगरी
खुशी भी मिली हमको तो गम से भरी
अजब है ये किस्मत की जादूगरी
कली कली काम कली जय काली

इसके अलावा फिल्म के गानों को हेमंत कुमार, आशा भोसले और मोहम्मद रफी ने भी गाया था. फिल्म बिन बादल बरसात सिर्फ अपनी कहानी के लिए ही नहीं बल्कि अपने संगीत के लिए भी उस दौर में याद रखी गई.

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