अमिताभ बच्चन को बॉलीवुड के एंग्री यंग मैन के तौर पर जाना जाता है. फिल्मों में अपनी दमदार इमेज के चलते उन्हें ये टैग मिला लेकिन बॉलीवुड की मुलाकात इस एंग्री मैन से होने से पहले ही एक ऐसे एक्टर से हो चुकी थी जो पर्दे पर सबसे भरोसेमंद पुलिसवाला माना जाता था. इस एक्टर का नाम था इफ्तिखार. इन्होंने करीब 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और ज्यादातर फिल्मों में पुलिस, जज, वकील, डॉक्टर या इसी तरह के किरदारों में नजर आए. बतौर पुलिसवाला इन्होंने काफी पॉपुलैरिटी हासिल की थी.
सिंगर बनने का सपना देखा बन गए एक्टर
1924 में पंजाब के जलंधर में जन्मे इफ्तिखार एक ट्रेन्ड पेंटर थे लेकिन आंखों में सजा था सिंगर बनने का सपने. इसी सपने को पूरा करने की चाह लिए उन्होंने कलकत्ता में फिल्मी दुनिया में एंट्री ली. इसके बाद बंटवारा हो गया. इनके परिवार के कई लोग पाकिस्तान चले गए. दंगों ने इनकी जिंदगी को भी बदल कर रख दिया और जिंदगी को नई राह देने के लिए ये मुंबई पहुंचे ताकि एक नई शुरुआत कर सकें. कम ही लोग जानते हैं कि इफ्तिखार कभी लीड हीरो हुआ करते थे लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.
उनकी शांत आवाज, शानदार स्क्रीन प्रेजेंस और दमदार पर्सनैलिटी ने उन्हें बॉलीवुड का पसंदीदा पुलिस कमिश्नर, जज, डॉक्टर और पिता जैसा किरदार बना दिया था. तीन दशकों तक, दर्शक उन्हें स्क्रीन पर देखते ही उन पर भरोसा करने लगते थे. बंदिनी, संगम और तीसरी मंजिल से लेकर जंजीर, दीवार, शोले और डॉन तक, वे धीरे-धीरे भारतीय सिनेमा के सबसे पहचाने जाने वाले चेहरों में से एक बन गए.

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उनके करियर का एक बड़ा सरप्राइज 'खेल-खेल में' (1975) फिल्म में देखने को मिला. सालों तक ईमानदार और अधिकार वाले किरदार निभाने के बाद, उन्होंने दर्शकों को चौंका दिया जब वे विलेन "ब्लैक कोबरा" के रूप में सामने आए. दर्शक यकीन ही नहीं कर पा रहे थे कि बॉलीवुड का सबसे भरोसेमंद पुलिस वाला ही असल में मास्टरमाइंड क्रिमिनल था.
जंजीर और 'दीवार' में अमिताभ बच्चन के साथ उनके सीन, ईजी और कंट्रोल्ड एक्टिंग की बेहतरीन मिसाल हैं. असरदार एक्टिंग के लिए उन्हें कभी जोरदार डायलॉग या नाटकीय हाव-भाव की जरूरत नहीं पड़ी. दुख की बात है कि फरवरी 1995 में कैंसर की वजह से उनकी बेटी का निधन हो गया. उसके कुछ ही हफ्तों बाद, 4 मार्च 1995 को खुद इफ्तेखार का भी निधन हो गया, और इस तरह पांच दशकों तक चले उनके शानदार सफर का अंत हो गया.
वे कभी भी पोस्टर पर हीरो नहीं रहे. फिर भी कई पीढ़ियों के दर्शक उन्हें आज भी तुरंत याद करते हैं. क्योंकि जब भी इफ्तेखार किसी सीन में आते थे, तो ऐसा लगता था जैसे ईमानदारी, समझदारी और अधिकार एक साथ आ गए हों.
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