90 के दशक में कुमार सानू और अल्का याग्निक की जोड़ी बॉलीवुड के सबसे पसंदीदा सिंगिंग डुओ में गिनी जाती थी. उस दौर में दोनों की आवाज में रिकॉर्ड हुआ गाना हिट होने की पूरी गारंटी माना जाता था. लेकिन एक ऐसा मौका भी आया, जब इस मशहूर जोड़ी के सामने एक रोमांटिक गाना आया और उन्होंने उसे गाने से इनकार कर दिया. बाद में यही गाना दूसरी आवाजों में रिकॉर्ड हुआ और इतना लोकप्रिय हुआ कि आज भी इसकी गिनती सदाबहार रोमांटिक गीतों में होती है. दिलचस्प बात यह है कि गाना देने वाले लीजेंडरी म्यूजिक डायरेक्टर भी उस समय इंडस्ट्री में नए नाम थे. यह गाना था 'ये हसीं वादियां, ये खुला आसमां.'
नए म्यूजिक डायरेक्टर को लेकर था संकोच
यह किस्सा 1992 में रिलीज हुई मणिरत्नम की फिल्म रोजा से जुड़ा है. फिल्म का संगीत तैयार किया था ए.आर. रहमान ने, जो उस समय हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में नए थे. रोजा के तमिल वर्जन की सफलता के बाद इसके गानों को हिंदी में भी पेश करने की तैयारी हुई. इसी दौरान फिल्म के खूबसूरत रोमांटिक गीत के लिए अल्का याग्निक और कुमार सानू से संपर्क किया गया. दोनों उस समय बॉलीवुड के बड़े नाम थे और रोमांटिक डुएट्स के लिए उनकी खूब मांग थी. लेकिन अल्का याग्निक ने गाना रिकॉर्ड करने से मना कर दिया. बताया जाता है कि उस समय उन्हें रहमान नए म्यूजिक डायरेक्टर लगे और यह भी एक वजह थी कि प्रोजेक्ट मूल रूप से साउथ की फिल्म का था. कुमार सानू ने भी इस गाने को स्वीकार नहीं किया. बाद में अल्का याग्निक ने एक इंटरव्यू में इस फैसले का जिक्र करते हुए माना था कि गाना ठुकराने के बाद उन्हें इसका पछतावा हुआ.
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गाने के बोल इस प्रकार हैं-
ये हसीन वादियाँ, ये खुला आसमाँ
आ गए हम कहाँ, ऐ मेरे साजना?
इन बहारों में दिल की कली खिल गई
मुझको तुम जो मिले, हर ख़ुशी मिल गई
तेरे होंठों पे हैं हुस्न की बिजलियाँ
तेरे गालों पे हैं ज़ुल्फ़ की बदलियाँ
तेरे दामन की ख़ुशबू से महके चमन
संगमरमर के जैसा ये तेरा बदन
के.एस. चित्रा और एस.पी. बालासुब्रमण्य ने बना दिया यादगार
जब अल्का याग्निक और कुमार सानू ने यह गाना नहीं गाया, तो इसकी जिम्मेदारी के.एस. चित्रा और एस.पी. बालासुब्रह्मण्यम को मिली. दोनों ने अपनी शानदार आवाज से गाने में रोमांस और प्रकृति की खूबसूरती को बेहद खूबसूरती से उकेरा. गाने को कश्मीर की खूबसूरत वादियों में अरविंद स्वामी और मधु पर फिल्माया गया था. बर्फीले पहाड़, खुला आसमान और प्रकृति के बीच प्रेम का एहसास इस गीत की खासियत बन गया. गाने के बोल पी.के. मिश्रा ने लिखे थे और संगीत ए.आर. रहमान का था. हिंदी रिलीज के बाद यह गीत तेजी से लोकप्रिय हुआ और रहमान के संगीत ने देशभर में अपनी अलग पहचान बना बनाई.
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