साउथ इंडियन सिनेमा ने हमेशा अपनी ओरिजिनालिटी, शानदार स्टोरीटेलिंग और बेमिसाल लगन से ऊंचे स्टैंडर्ड सेट किए हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी फिल्म भी है जिसने सब कुछ एक नए लेवल पर पहुंचा दिया. सिर्फ 24 घंटे में इस फिल्म को बना लिया गया और ये एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई. इस फिल्म में एक से बढ़कर एक स्टार्स दिखे थे, वहीं इसे एक-दो नहीं बल्कि कुछ 14 डायरेक्टर्स ने मिलकर बनाया था. आइए जानते हैं कि वो फिल्म कौन सी थी और कब रिलीज हुई.
कौन सी है वो फिल्म
1999 में, 'सुयमवरम' नाम की एक साउथ इंडियन फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी और जबरदस्त हिट रही. दर्शकों को इसकी दिलचस्प कहानी और शानदार स्टार कास्ट बहुत पसंद आई. लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि ये फिल्म सिर्फ 24 घंटे में शूट की गई थी. सुयमवरम के नाम अब तक की सबसे तेज शूट होने वाली फीचर-लेंथ फिल्म होने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड है.
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दोगुना कमाई
विकिपीडिया के अनुसार, 'सुयमवरम' एक तमिल-भाषा की कॉमेडी-ड्रामा फिल्म है, जिसे गिरधारीलाल नागपाल ने प्रोड्यूस किया और इसके को-राइटर भी वही थे. रिलीज होने पर यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त हिट रही. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसे 25 करोड़ रुपये के बजट में बनाया गया था और इसने 50 करोड़ रुपये की कमाई की.
30 स्टार्स और 14 डायरेक्टर्स ने किया काम
जो बात इस फ़िल्म को सच में खास बनाती है, वह है इसका अनोखा प्रोडक्शन प्रोसेस. इसे 14 डायरेक्टर, 19 सिनेमैटोग्राफर और 30 से ज्यादा बड़े एक्टर्स की मिली-जुली कोशिशों से बनाया गया था. दूसरे शब्दों में कहें तो, 14 डायरेक्टर एक साथ काम कर रहे थे और 30 स्टार्स एक ही फिल्म में नजर आए, और यह सब एक ही दिन में पूरा हुआ. नागपाल के आइडिया और लेखन से बने इस प्रोजेक्ट ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री के कुछ सबसे बड़े नाम शामिल थे.
क्या है फिल्म की कहानी
कहानी कुसेलन (विजयकुमार) और उनकी पत्नी सुशीला (मंजुला विजयकुमार) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक बड़े परिवार के मुखिया हैं. उनके तीन बेटे हैं - अरुणाचलम (सत्यराज), अवुदैयाप्पन (प्रभु) और इंदिरा (अब्बास), और छह बेटियां हैं - उर्वशी (रंभा), ईश्वरी (रोजा), उमा (कस्तूरी), ऐश्वर्या (महेश्वरी), हेमा (प्रीथा विजयकुमार) और एजिलारासी (सुवलक्ष्मी).घर में उनका वफादार नौकर अझागप्पन (पार्थिबन) और फैमिली डॉक्टर कृष्णा (नेपोलियन) भी शामिल हैं.
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फिल्म की शुरुआत कुसेलन के 60वें जन्मदिन के जश्न से होती है, जिसके दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ता है. अस्पताल में परिवार को पता चलता है कि उनकी हालत गंभीर है और उनके पास शायद ज्यादा समय नहीं बचा है. अपनी जिंदगी के आखिरी दिनों में, कुसेलन एक आखिरी इच्छा जाहिर करते हैं. मरने से पहले अपने सभी बच्चों की शादी होते देखना. परिवार इसके लिए राजी हो जाता है, और जल्द ही एक विज्ञापन छपता है जिसमें कुसेलन के किसी भी बच्चे से शादी करने के इच्छुक व्यक्ति को परिवार की संपत्ति और 1 करोड़ रुपये नकद देने की पेशकश की जाती है. इससे कॉमेडी, इमोशन और ड्रामा से भरे कई घटनाक्रम शुरू होते हैं, जो फिल्म को बेहद एंटरटेनिंग बनाते हैं.
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