'पुष्पक विमानम' और 'आदित्य 369' जैसी फिल्मों से भारतीय सिनेमा की सीमाओं को आगे बढ़ाने वाले अनुभवी फिल्म निर्माता सिंगीथम श्रीनिवास राव का 94 साल की उम्र में निधन हो गया है. शनिवार रात चेन्नई के कावेरी अस्पताल में उनका निधन हुआ. हाल के दिनों में तबीयत बिगड़ने के बाद सिंगीथम अस्पताल में इलाज करवा रहे थे. यहां उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए उनका इलाज चल रहा था.
सेलेब्स ने दी श्रद्धांजलि
उनके निधन की खबर के बाद, साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के एक्टर्स, फिल्म निर्माताओं और अन्य लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. एक्टर जूनियर एनटीआर ने सिंगीथम को एक ऐसे फिल्म निर्माता के तौर पर याद किया जिनके विचार अपने समय से आगे थे. उन्होंने उन्हें एक दूरदर्शी व्यक्ति बताया जो अपने समय से आगे की सोचते थे और ऐसी फ़िल्में बनाते थे जो पीढ़ियों बाद भी ताजा लगती हैं. म्यूजिक कंपोजर देवी श्री प्रसाद ने भी X पर दिग्गज फिल्ममेकर को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने लिखा, "प्यारे सिंगीतम सर... हम आपको बहुत याद करेंगे सर... आप हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे. आप एक बेमिसाल लेजेंड हैं... हमेशा युवा रहने वाले जोश और पॉजिटिविटी का पहाड़... आपने जो फ़िल्में भविष्य की सोच और नई तकनीकों के साथ बनाईं, वे हम सभी और फ़िल्ममेकर्स की आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सबक हैं. हर चीज़ के लिए धन्यवाद और आपको बहुत प्यार सर... मैं खुशकिस्मत हूं कि मैं आपको जानता हूं और आपके साथ काम किया है सर..."
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21 सितंबर 1931 को आंध्र प्रदेश के गुडूर में जन्मे सिंगीतम ने अपने करियर की शुरुआत मशहूर फ़िल्ममेकर एल.वी. प्रसाद के असिस्टेंट के तौर पर की थी. उन्होंने 1972 में 'नीति निजयिती' से डायरेक्टर के तौर पर डेब्यू किया और छह दशकों तक चले करियर में पांच भाषाओं में काम किया. उनकी फ़िल्मों में अलग-अलग विषयों और कहानी कहने के तरीकों के साथ एक्सपेरिमेंट करने की इच्छा साफ़ दिखती थी. कमल हासन की बिना डायलॉग वाली ब्लैक कॉमेडी फ़िल्म 'पुष्पक विमानम' उनके सबसे मशहूर कामों में से एक है. इस फिल्म ने 'बेस्ट पॉपुलर फ़िल्म प्रोवाइडिंग होलसम एंटरटेनमेंट' (बेहतरीन मनोरंजन देने वाली सबसे लोकप्रिय फ़िल्म) का नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड जीता था. सिंगीथम ने 'आदित्य 369' के साथ साइंस-फिक्शन फ़िल्मों की दुनिया में भी कदम रखा. नंदमुरी बालकृष्ण की मुख्य भूमिका और इलैयाराजा के संगीत वाली यह फ़िल्म, टाइम ट्रैवल (समय यात्रा) पर आधारित पहली तेलुगु साइंस-फिक्शन फ़िल्म मानी जाती है. उनके करियर की एक और अहम फ़िल्म थी 'मयूर', जो एक पैर गंवा चुकीं क्लासिकल डांसर सुधा चंद्रन की ज़िंदगी पर आधारित बायोपिक ड्रामा थी. इस फ़िल्म को कई अवॉर्ड मिले. बाद में उन्होंने बालकृष्ण की मुख्य भूमिका वाली फैंटेसी-एडवेंचर फ़िल्म 'भैरव द्वीपम' का निर्देशन किया, जो 28 सेंटर्स पर 100 दिनों तक सिनेमाघरों में चली.
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तेलुगु सिनेमा के अलावा, सिंगीथम ने कन्नड़ और हिंदी फ़िल्मों में भी काफ़ी काम किया और खुद को एक ऐसे फ़िल्ममेकर के तौर पर स्थापित किया जो अलग-अलग जॉनर और सिनेमाई भाषाओं में काम करने में समान रूप से सहज थे. उम्र के बावजूद सिंगीथम रचनात्मक रूप से सक्रिय रहे. उनकी आखिरी फ़िल्म 'सिंग गीथम' - जो नाग अश्विन द्वारा प्रोड्यूस की गई एक म्यूज़िकल फैंटेसी फ़िल्म थी. वह इसी साल पूरी हुई. 94 साल की उम्र में भी फ़िल्ममेकिंग में सक्रिय रहने के कारण वे दुनिया के सबसे उम्रदराज़ सक्रिय फ़िल्ममेकर्स में से एक बन गए.
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