भोजपुरी गाने अब ग्लोबल हो चुके हैं. ये बिहार और उत्तर प्रदेश राज्यों तक सिर्फ सीमित नहीं हैं. यहां के लोकगीतों में आम जीवन की खूबसूरती और मस्ती दिखती हैं. आज हम भोजपुरी के एक ऐसे ही गाने के बारे में बताने जा रहे हैं, जो काफी लोकप्रिय है. वो गीत है बाबा दिहले टिकवा. ये गीत एक नवविवाहित महिला के दिल की भावना को जाहिर करती है. महिलाओं के बारे में कहा जाता है कि वो सबसे ज्यादा गहनों से प्यार करती हैं, लेकिन एक चीज ऐसी है जिसे वो गहनों से भी ज्यादा प्यार करती हैं.
गीत के बारे में
गीत में नवविवाहित महिला और छोटी ननद को दिखाया गया है. भाभी अपनी छोटी ननद से कहती है, शादी में उसके बाबा यानी पिता ने कई तरह के गहने दिए है. वह गहनों से प्यार करती है, लेकिन उनका मोल उसके पति के सामने कुछ भी नहीं है. वो कहती है कि उसके बाबा ने उसे गहने दिए हैं. उसमें मांग टीका दिया है. हालांकि वो उसे त्याग सकती है, लेकिन वो अपने बलमुआ यानी पति को कैसे छोड़ कर रह सकती है. वह कहती है कि उसके बाबा ने उसे नथिया भी दिया है, वो भी वह खुशी-खुशी छोड़ने को तैयार है. लेकिन अपने पति के बिना वह कैसे रहेगी. उसके पिता ने उसे झुमका और हंसुली भी दिया है. वह उसे भी छोड़ सकती है, लेकिन अपने पति को नहीं. पति के बिना रहने के ख्याल से भी कलेजा कांप जाता है.
इस बेहद खूबसूरत गीत में महिला अपने सभी गहनों और सुख-सुविधाओं का त्याग करने को तैयार है. अपने पिता के दिए गहने वो खुशी-खुशी त्याग देगी, लेकिन अपने पति के बिना नहीं रह सकती. यह एक पत्नी के दिल की भावना और प्रेम को बयां करता है.
ननद-भाभी के रिश्ते की खूबसूरती दिखाता है गाना
इस गीत में ननद-भाभी के रिश्ते को दिखाया गया है. ननद-भाभी झगड़ों के लिए जानी जाती हैं, लेकिन यह गीत एक अलग तस्वीर पेश करता है. इस गीत में महिला अपनी ननद को अपनी सहेली समझकर अपने दिल की बात कह रही है, जो उनके बीच के प्यार भरे रिश्ते को दिखाता है. जितने प्यारे इस गाने के बोल हैं, उतनी ही मीठी इसकी धुन भी है. इस गीत को स्वर कोकिला शारदा सिन्हा और कल्पना पटवारी ने आवाज दी है.
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