शाहरुख खान और गौरी खान की लव स्टोरी को बॉलीवुड की सबसे मशहूर लवस्टोरीज में से एक है. हालांकि शादी तक का उनका सफर आसान नहीं था. अलग-अलग धर्मों से होने के कारण कपल को गौरी के परिवार से शुरुआती विरोध का सामना करना पड़ा. एक्टर ने गौरी के परिवार की मंजूरी पाने के लिए अलग-अलग नामों का भी इस्तेमाल किया. किताब 'शाहरुख कैन' (Shah Rukh Can) में मुश्ताक शेख लिखते हैं कि शाहरुख ने "जीतेंद्र कुमार तुली" नाम का इस्तेमाल किया था. यह नाम उन्होंने दिग्गज एक्टर जीतेंद्र और राजेंद्र कुमार (जिनका पूरा नाम राजेंद्र कुमार तुली था) को सम्मान देने के लिए चुना था.
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अपनी शादी के लिए भी कपल ने दोनों परंपराओं का सम्मान किया और हिंदू और मुस्लिम रीति-रिवाजों से शादी की. शाहरुख ने एक हिंदू नाम अपनाया, जबकि गौरी ने निकाह के लिए 'आयशा' नाम चुना. शाहरुख ने किताब में कहा, "हमने यह बात बहुत से लोगों को नहीं बताई है." शादी के समय गौरी सिर्फ 21 साल की थीं और शाहरुख 26 साल के थे. उनके फिल्म इंडस्ट्री में आने और अलग धर्म से होने की वजह से गौरी के माता-पिता की चिंता और बढ़ गई थीं. उन्हें भरोसा दिलाने के लिए सुपरस्टार ने अपना नाम बदलकर 'अभिनव' भी रख लिया था, ताकि गौरी के माता-पिता को लगे कि वह हिंदू हैं. सालों बाद, गौरी ने इस फैसले को "बेवकूफी भरा और बहुत बचकाना" बताया.
गौरी ने 'फर्स्ट लेडीज' शो में अबू जानी और संदीप खोसला से कहा, "हम बहुत छोटे थे और शादी का फैसला किया - वो भी ऐसे व्यक्ति से जो फिल्मों में आने वाला था और अलग धर्म का था. उसका नाम बदलकर 'अभिनव' रख दिया ताकि लोगों को लगे कि वह हिंदू लड़का है, लेकिन यह सच में बहुत बेवकूफी भरी और बचकानी हरकत थी." माता-पिता के विरोध के बावजूद गौरी और शाहरुख ने 25 अक्टूबर 1991 को शादी की और तब से साथ जिंदगी बिता रहे हैं. दोनों के तीन बच्चे हैं - आर्यन, सुहाना और अबराम. उसी इंटरव्यू में गौरी ने बताया कि उनके बच्चे हिंदू और मुस्लिम दोनों त्योहार कैसे मनाते हैं.
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गौरी ने कहा, "जब दिवाली होती है, तो मैं पूजा करवाती हूं और परिवार साथ देता है. ईद पर शाहरुख अगुवाई करते हैं और हम उनका साथ देते हैं. मुझे लगता है कि यह सब बहुत सुंदर है और बच्चे इसे अपनाते हैं. असल में मेरे बच्चे शाहरुख की बात ज्यादा मानते हैं. उनके लिए दिवाली, ईद, सब शानदार हैं."
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