अगर बात बॉलीवुड एक्ट्रेस मंदाकिनी की हो और फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली' की न हो ये तो मुमकिन ही नहीं है. 1985 में आई इस फिल्म ने मंदाकिनी को रातोंरात पहचान दिलाई थी और इसके गानों ने भी खूब लोकप्रियता हासिल की. इन्हीं में एक गीत था ‘सुन साहिबा सुन'. मंदाकिनी और राजीव कपूर पर फिल्माए गए इस गाने में प्यार का इजहार है, साथ निभाने की इच्छा है और अपने दिल की बात सामने रखने की बेकरारी भी. ऐसे में हसरत जयपुरी के बेहतरीन बोलों को अगर एक शानदार धुन और लता मंगेशकर की आवाज मिल जाए तो क्या ही कहना. यही वजह है कि 41 साल बाद भी यह गाना पुराने सिनेमा के चाहने वालों को पसंद आता है.
'सुन साहिबा सुन'
इस गीत को लता मंगेशकर ने आवाज दी थी. इसका संगीत रविंद्र जैन ने तैयार किया था, जबकि गीत के बोल हसरत जयपुरी ने लिखे थे. गाने की धुन और लता की आवाज मिलकर इसे एक ऐसा रोमांटिक रंग देती है, जो आज भी पुराना नहीं लगता. दिलचस्प बात ये है कि हसरत जयपुरी ने यह गीत काफी पहले राज कपूर की फिल्म ‘अजंता' के लिए लिखा था और शंकर-जयकिशन ने इसे संगीतबद्ध भी किया था. लेकिन वह फिल्म नहीं बन सकी और यह गाना लंबे समय तक राज कपूर के पास रहा. बाद में ‘राम तेरी गंगा मैली' बनाते समय राज कपूर को लगा कि यह गीत फिल्म की एक सिचुएशन के लिए बिल्कुल सही है और इसे इसमें शामिल कर लिया गया.
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मंदाकिनी के करियर का यादगार गाना
‘राम तेरी गंगा मैली' राज कपूर के निर्देशन में बनी थी और इसमें राजीव कपूर और मंदाकिनी मुख्य भूमिकाओं में थे. फिल्म की कहानी और इसके कुछ दृश्यों को लेकर खूब चर्चा हुई, लेकिन इसके गाने भी दर्शकों की याद में लंबे समय तक बने रहे. मंदाकिन उस वक्त एक नया चेहरा थी, उनका मासूम अंदाज, राजीव कपूर के साथ उनकी केमिस्ट्री को दर्शकों ने हाथोंहाथ लिया.आज इतने साल गुजरने के बाद भी ‘सुन साहिबा सुन' सिर्फ एक पुराना गाना बनकर नहीं रह गया, बल्कि पुराने दौर के रोमांस की याद दिलाने वाला गीत बना हुआ है.
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