आज के दौर में विज्ञापन कुछ सेकंड में आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब किसी ब्रांड का विज्ञापन उसकी पहचान बन जाता था. दूरदर्शन के जमाने में टीवी पर आने वाले कुछ विज्ञापन इतने लोकप्रिय हुए कि उनके जिंगल लोगों को विज्ञापन से ज्यादा याद रहने लगे. ऐसा ही एक नाम था वाशिंग पाउडर निरमा. सफेद कपड़ों में घूमती लड़कियां, घूमती हुई निरमा गर्ल और कानों में पड़ते ही जुबान पर चढ़ जाने वाला जिंगल- यह सब 80 और 90 के दशक में भारतीय टेलीविजन का हिस्सा बन चुका था.
उस दौर में घर-घर में दूरदर्शन देखा जाता था. टीवी पर जैसे ही निरमा का विज्ञापन आता, बच्चे हों या बड़े, इसकी धुन पहचान लेते थे. खास बात यह थी कि इसे याद करने के लिए किसी कोशिश की जरूरत नहीं पड़ती थी. इसकी सरल धुन और बार-बार दोहराए जाने वाले बोल इसे ऐसा बनाते थे कि विज्ञापन खत्म होने के बाद भी लोग इसे गुनगुनाते रहते थे.
‘वाशिंग पाउडर निरमा' बना घर-घर की जुबान
निरमा के विज्ञापन का सबसे बड़ा आकर्षण उसका जिंगल था. “वाशिंग पाउडर निरमा…” से शुरू होने वाली इसकी धुन इतनी आसानी से याद हो जाती थी कि यह महज विज्ञापन नहीं रह गया था. यह रोजमर्रा की बातचीत और लोगों की यादों का हिस्सा बन गया.
निरमा का ब्रांड 1969 में शुरू हुआ था और बाद के वर्षों में उसके विज्ञापनों ने इसे देश के घर-घर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई. सफेद कपड़ों में दिखती ‘निरमा गर्ल' ब्रांड की पहचान बन गई. विज्ञापन में सफेद कपड़ों की चमक और तेज, आकर्षक जिंगल ने मिलकर निरमा को उस दौर के सबसे पहचाने जाने वाले विज्ञापनों में शामिल कर दिया.
दूरदर्शन के दौर में विज्ञापन भी बनते थे यादों का हिस्सा
आज टीवी पर एक साथ सैकड़ों चैनल और इंटरनेट पर अनगिनत वीडियो मौजूद हैं. लेकिन दूरदर्शन के दौर में दर्शकों के पास विकल्प सीमित थे. इसलिए टीवी पर आने वाले विज्ञापन भी लोगों की यादों का हिस्सा बन जाते थे. निरमा का जिंगल इसी दौर की ऐसी धुन थी जिसे सुनते ही एक पूरा समय आंखों के सामने आ जाता है. टीवी के सामने बैठा परिवार, दूरदर्शन के कार्यक्रम और उनके बीच आने वाले वही जाने-पहचाने विज्ञापन, इन सबने मिलकर इस जिंगल को कई पीढ़ियों की यादों में बसा दिया.
फिल्मी गानों से अलग, फिर भी उतना ही लोकप्रिय
उस दौर में फिल्मी संगीत का दबदबा था. लोग रेडियो और कैसेट पर फिल्मी गाने सुनते थे और नए गाने घर-घर में जल्दी लोकप्रिय हो जाते थे. लेकिन निरमा का जिंगल एक विज्ञापन होने के बावजूद अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहा. इसकी सफलता की वजह इसकी सरल भाषा, दोहराव और आसानी से याद हो जाने वाली धुन थी. यही कारण है कि दशकों बाद भी जब निरमा का जिंगल सुनाई देता है तो कई लोगों को अपना बचपन और दूरदर्शन का दौर याद आ जाता है.
निरमा का यह विज्ञापन इस बात की मिसाल है कि अच्छा विज्ञापन सिर्फ किसी प्रोडक्ट को बेचने का जरिया नहीं होता, बल्कि वह लोगों की यादों का हिस्सा भी बन सकता है. आज विज्ञापन की दुनिया काफी बदल चुकी है, लेकिन ‘वाशिंग पाउडर निरमा' का जिंगल उन चुनिंदा धुनों में है जिसे सुनकर लोग आज भी अनायास गुनगुनाने लगते हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं