Nusrat Fateh Ali Khan hit songs: संगीत की कोई उम्र नहीं होती, और जब बात सूफी संगीत की आती है तो बस सकून भरी राहत और एक ऐसा ऐहसास याद आता है जो दिल को अंदर तक सहला जा जाता है, जिसे सुनकर ऐसा लगता है कि हां इसी से दिल के हर उस दर्द को कम करने का रास्ता मिल जाता है जिसे किसी के सामने चाहकर भी बयां नहीं कर पाते है. ऐसे में शहंशाह उस्ताद नुसरत फतेह अली खान की आवाज में श्रोताओं को वही सूकून मिला जो दशकों बाद भी आज भी उनके सिर चढ़कर बोलती है. इन दिनों सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम रील्स पर एक पुरानी कव्वाली का नया रीमेक वर्जन धूम मचा रहा है, जिस पर आज की जेन जी भी जमकर रील्स बना रही है. इस सदाबहार और दर्दभरी कव्वाली के बोल हैं- "यादां बिछड़े साजन दियां आइयां..."
यादां बिछड़े साजन दियां आइयां सूफी कव्वाली के पीछे की कहानी
उस्ताद नुसरत फतेह अली खान साहब ने अपनी यह प्रसिद्ध कव्वाली 'यादां बिछड़े साजन दियां आइयां' (Yaadan Vichhre Sajan Diyan Aiyan) मूल रूप से 1985 में बर्मिंघम (यूके) के डिगबर्थ सिविक हॉल में लाइव परफॉर्म की थी, जिसे बाद में ओरिएंटल स्टार एजेंसी (OSA) के जरिए 1986–1988 के दौर में आधिकारिक तौर पर ऑडियो और कैसेट के रूप में रिलीज किया गया था. उस वक्त लंदन के मिडलसेक्स स्थित ऐतिहासिक 'हैरॉ लेजर सेंटर' (Harrow Leisure Centre) में सजी इस लाइव महफिल में नुसरत साहब ने अपनी जादूई आवाज से समां बांध दिया था. उनके साथ हारमोनियम पर उनके भाई फर्रुख फतेह अली खान उनका साथ दे रहे थे.
यहां सुने गाना
रील्स से मिली पुरानी विरासत को पहचान
लगभग चार दशक बाद, इस क्लासिक सूफी कलाम को एक नए बीट और आधुनिक अंदाज के साथ रीमेक करके पेश किया गया है. जहां 80 के दशक में इसने दर्द और रूहानियत से दिलों को छुआ था, वहीं आज इसका नयापन रील्स ट्रेंड में सबसे ऊपर बना हुआ है. पुराने संगीत का यह नया रंग की दौर चाहे कितना भी पुराना है पर विरासतों का जादू आज भी उसी तरह बना हुआ है जितना सालों पहले.
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