हिंदी सिनेमा में कई गाने बनते हैं जो सिर्फ सुनने में ही नहीं बल्कि रुह को सुकून देने वाले होते हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही गाने के बारे में बताएंगे जिसकी धुन आपने भी किसी दरगाह पर जरूर सुनी होगी, या किसी महफिल में लोगों को इस गाने पर झूमते हुए आपने देखा होगा. इस गाने को सुनते ही एक अलग एहसास होता है. खास बात ये है कि हम जिस गाने की बात कर रहे हैं वो अमीर खुसरों की 700 पुरानी कलाम से बना है. इसको नए अंदाज में नुसरत फतेह अली खान से लेकर हंस राज हंस जैसे कई दूसरे कलाकारों ने अपनी आवाज दी है. तो चलिए जानते हैं अमीर खुसरों की उस रचना के बारे में जिसनें बॉलीवुड को एक बेहतरीन औप यादगार गीत दिया.
अमीर खुसरो से जुड़ा है इस कलाम का इतिहास
हम बात कर रहे हैं 'दमा दम मस्त कलंदर' की, मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस कलाम को 13वीं शताबंदी के महान सूफी कवि अमीर खुसरो से है. इसको बाबा लाल शाहजाब कंलदर को सम्मान देने के लिए इस सूफी कलाम को गाया जाता था. बाद में बाबा बुल्ले शाह ने इसमें कुछ पंजाबी और सिन्धी भाषा की लाइनें शामिल की थी. इस कलाम में सहवान और शाहबाज कलंदर का जिक्र आता है. यही वजह है कि यह कलाम समय के साथ सूफी संगीत और लोक परंपरा का अहम हिस्सा बन गया.
क्या थे गाने के बोल
गाने का हर छंद 'दमादम मस्त क़लन्दर, अली दम-दम दे अन्दर' पर ख़त्म होता है जिसका मतलब है 'दम-दम में मस्ती रखने वाला क़लन्दर (फ़क़ीर), जो हर सांस में रब (अली) को रखता है.'
ओ लाल, मेरी पत्त रखियो बला झूले लालण,
सिन्धड़ि दा, सेवन दा, सख़ी शाहबाज़ क़लन्दर!
दमादम मस्त क़लन्दर, अली दम-दम दे अन्दर!
चार चिराग़ तेरे बरन हमेशा,
पंजवां बारन आईआं बला झूले लालण,
सिन्धड़ि दा, सेवन दा, सख़ी शाहबाज़ क़लन्दर!
दमादम मस्त क़लन्दर, अली दम-दम दे अन्दर!
हिंद-सिंद पीरा तेरी नौबत वाजे,
नाल वजे घड़ेयाल बला झूले लालण,
सिन्धड़ि दा, सेवन दा, सख़ी शाहबाज़ क़लन्दर!
दमादम मस्त क़लन्दर, अली दम-दम दे अन्दर!
मावाँ नूं पीरा बच्चड़े देना ई,
पैणा नूं देना तूं वीर मिला झूले लालण,
सिन्धड़ि दा, सेवन दा, सख़ी शाहबाज़ क़लन्दर!
दमादम मस्त क़लन्दर, अली दम-दम दे अन्दर!
उच्चा रोज़ा पीरा तेरा,
हेठ वग्गे दरिया बला झूले लालण,
सिन्धड़ि दा, सेवन दा, सख़ी शाहबाज़ क़लन्दर!
दमादम मस्त क़लन्दर, अली दम-दम दे अन्दर!
हर दम पीरा तेरी ख़ैर होवे,
नाम-ए-अली बेड़ा पार लगा झूले लालण,
सिन्धड़ि दा, सेवन दा, सख़ी शाहबाज़ क़लन्दर!
दमादम मस्त क़लन्दर, अली दम-दम दे अन्दर!
इनमें से एक छंद में झूले लाल की बढ़ाई की गयी है और दूसरे में कहा गया है के एक दुखियारी औरत उनके मजार पर हाजरी देने आई है और उनके लिए दिया जला रही है.
बॉलीवुड फिल्मों मे भी शामिल हुआ गाना
'दमा दम मस्त कलंदर' एक फेमस सूफी गाना है जो कई बॉलीवुड फिल्मों में अलग-अलग तरह से इस्तेमाल किया गया. जैसे साल 2013 में आई फिल्म डेविड और डी-डे फिल्म में इस गाने को अलग-अलग तरीकों से गाया गया है. इसके साथ ही शाहरुख खान की men 2018 में आई फिल्म जीरो में भी इस गाने को शामिल किया गया. फिल्म में इस गाने का संगीत तनिष्क बागची ने तैयार किया था और इसे अल्तमाश फरीदी ने अपनी आवाज से सदाबहार कर दिया.
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