13 मार्च 1996 की शाम को कोलकाता के ईडन गार्डन्स स्टेडियम में हजारों भारतीय इकट्टठा हुए थे. तो वहीं घर पर बैठे करोड़ों लोगों की नजरें टेलीविजन पर टिकी थीं. क्योंकि मैदान पर चल रहा था भारत और श्रीलंका का क्रिकेट वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल. इस मैच को उस वक्त एक फेमस एक्टर भी इस मैच को देखने के लिए स्टेडियम पर मौजूद था. एक ऐसा कलाकार, जिसने फिल्मों में पुलिस अफसर से लेकर विलेन और सपोर्टिंग रोल से घर-घर में अपनी पहचान बनाई. लेकिन महज 50 साल की उम्र में ही इस दुनिया को अलविदा कह दिया, उनकी अचानक हुई इस मौत ने इंडस्ट्री को झकझोर दिया था. आज उनकी जिंदगी का ये लास्ट चैप्टर याद किया जाता है. आइए जानते हैं शफी इनामदार की बॉलीवुड जर्नी के बारे में.
'अर्ध सत्य' ने दिलाई पहचान, फिर कई यादगार किरदार
शफी इनामदार को कभी किसी बड़े हीरो जैसी स्टारडम नहीं मिली, लेकिन करीब दो दशकों तक वे इंडस्ट्री के सबसे सम्मानित कैरेक्टर एक्टर्स में गिने जाते रहे. 23 अक्टूबर 1945 को महाराष्ट्र के पांगरी, दापोली में जन्मे शफी ने 1982 में आई फिल्म 'विजेता' से फिल्मों में कदम रखा. इसके बाद वो गोविंद निहलानी की 'अर्ध सत्य' में इंस्पेक्टर हैदर अली के रोल में नजर आए और इस रोल के बाद उनकी पहचान मजबूत बनी. इसके बाद शफी ने 'आज की आवाज' , 'जुर्म', 'कुदरत का कानून', 'वर्दी', 'इज्जतदार' जैसी फिल्मों में एक्टिंग की. फिल्म 'आज की आवाज' के लिए उन्हें फिल्मफेयर में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के नॉमिनेट भी किया गया था. . नाना पाटेकर के साथ फिल्म 'यशवंत' में निभाया गया उनका किरदार ही उनकी अंतिम फिल्मी उपस्थिति साबित हुआ.
'ये जो है जिंदगी' ने बनाया घर-घर का चेहरा
फिल्मों के अलावा शफी भारतीय टेलीविजन का भी जाना-पहचाना चेहरा थे. उन्होंने 'ये जो है जिंदगी', 'इंतजार', 'श्रीमान श्रीमती', 'अधिकार' और 'प्यार की दास्तां' जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों में काम किया और अपने दौर के सबसे पहचाने जाने वाले टीवी कलाकारों में शामिल हो गए. सीरियल 'ये जो जिंदगी है' ने उनको एक अलग पहचान दिलाई. इस सीरियल में उनके साथ स्वरूप संपत और राकेश बेदी भी अहम भूमिकाओं में थे. यह शो इतना लोकप्रिय हुआ कि शफी का नाम टीवी दर्शकों के बीच घर-घर पहचाना जाने लगा. एक्टिंग के साथ ही शमी थिएटर से भी जुड़े रहे और 1982 में अपनी थिएटर कंपनी 'Hum Productions' शुरू की थी. वे एक्टिंग के साथ नाटक लिखना और डायरेक्ट भी करते थे.
मैच देखते समय ली आखिरी सांस
13 मार्च 1996 को भारत और श्रीलंका के बीच कोलकाता में क्रिकेट वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल खेला जा रहा था. इस मैच को देखने के लिए शफी इनामदार भी पहुंचे थे. वहां पर मैच खत्म होने से पहले ही उनको दिल का दौरा पड़ा और 50 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. शफी ने भक्ति बर्वे से शादी की थी, जो एक जानी-मानी अभिनेत्री और थिएटर एक्ट्रेस थीं. वो मराठी, हिंदी और गुजराती थिएटर से जुड़ी रहीं और 'जाने भी दो यारों' जैसी फिल्म में भी नजर आईं. 50 साल की उम्र में उनका सफर भले थम गया, लेकिन फिल्मों, टीवी और थिएटर में छोड़ी उनकी छाप आज भी उनके काम के जरिए याद की जाती है.
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