हिंदी सिनेमा के कुछ गीत ऐसे रहे हैं, जिन्होंने समय की सीमा से परे जाकर असर दिखाया है. दौर कोई भी रहा हो लेकिन इन गानों का जादू कभी कम नहीं हुआ. 1983 में आई फिल्म अवतार का गाना 'चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है' भी ऐसा ही गाना है. राजेश खन्ना और शबाना आजमी पर फिल्माया गया यह गाना माता वैष्णों देवी के भक्तों के बीच आज भी उतना ही लोकप्रिय है जितना 43 साल पहले था. इस गीत को महेंद्र कपूर, आशा भोंसले और नरेंद्र चंचल ने गाया है. इसका संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का है जबकि इसके लिरिक्स आनंद बख्शी ने लिखे हैं.
नरेंद्र चंचल की आवाज ने बनाया एवरग्रीन
अवतार फिल्म के इस गीत को नरेंद्र चंचल ने गाया था. नरेंद्र चंचल उस समय तक बॉलीवुड में बॉबी, बेनाम और रोटी कपड़ा और मकान जैसी फिल्मों में गीत गा चुके थे. इसके अलावा 'आशा' फिल्म का 'तूने मुझे बुलाया' गीत भी गा चुके थे. वह भी काफी पॉपुलर हुआ था. लेकिन लक्ष्मीकांत प्यारेलाल और आनंद बख्शी की सुपरहिट जोड़ी के साथ जब नरेंद्र चंचल आए तो छा ही गए.
अवतार के गाने की दिलचस्प कहानी
'चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है' गीत को लिखने के पीछे एक दिलचस्प कहानी भी बताई जाती है. बताया जाता है कि आनंद बख्शी और राजेश खन्ना अवतार के गाने लिखने के लिए साथ बैठे थे. महफिल जमी हुई थी. आनंद बख्शी लिखे जा रहे थे और पन्ने फाड़ते जा रहे थे. कुछ क्लिक नहीं कर रहा था. तभी राजेश खन्ना ने कहा, 'या तो पीना छोड़ दो या लिखना छोड़ दो.'
तभी आनंद बख्शी महफिल छोड़कर बाहर चले गए और जब लौटे तो उन्होंने तुरंत लिखा, 'चलो बुलावा आया है.' इस तरह यह गाना तैयार हुआ. राजेश खन्ना का कहना था कि आनंद बख्शी आम आदमी की जुबान में गीत लिखते हैं. इस बात को आनंद बख्शी के अधिकतर गानों में अच्छे से महसूस भी किया जा सकता है. इस गाने की इन पंक्तियों को पढ़कर ही आप समझ जाएंगे कि लेखनी में कितनी गहराई है...
जय माता दी कहते जाओ आने जाने वालों को
चलते जाओ तुम मत देखो अपने पांव के छालों को
चलते जाओ तुम मत देखो अपने पांव के छालों को
हो जिसने जितना दर्द सहा है उतना चैन भी पाया है
चलो बुलावा आया है
माता ने बुलाया है
जय माता दी...
राजेश खन्ना के करियर को दिया जीवन-दान
अवतार को मोहन कुमार ने डायरेक्ट किया था. ये फिल्म राजेश खन्ना के लिए काफी अहम फिल्म थी क्योंकि यह उस दौर में रिलीज हुई थी जब उनका करियर ढलान पर था. लेकिन इस फिल्म में उनकी एक्टिंग ने एक बार फिर से उन्हें मेनस्ट्रीम में लाने का काम किया. फिल्म के रीमेक तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम सभी भाषाओं में बने थे. फिल्म का बजट लगभग 1.60 करोड़ रुपये था जबकि इसने 7 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया.
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