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30 हजार गाने गाने वालीं लता मंगेशकर की अंतिम विदाई में गूंजा था उनका ये सदाबहार गीत, 56 साल पहले शम्मी-आशा की एक्टिंग ने कर दिया था अमर

30 हजार से ज्यादा गानों को आवाज देने वालीं लता मंगेशकर की अंतिम विदाई में उनका 56 साल पुराना एक गीत भी गूंजा था. शम्मी कपूर और आशा पारेख पर फिल्माया यह नगमा आज भी सुनने वालों को भावुक कर देता है.

30 हजार गाने गाने वालीं लता मंगेशकर की अंतिम विदाई में गूंजा था उनका ये सदाबहार गीत, 56 साल पहले शम्मी-आशा की एक्टिंग ने कर दिया था अमर
शम्मी कपूर और आशा पारेख का 56 साल पुराना यह गाना आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है

अपने करियर में 30 हजार से अधिक गाने गाने वालीं लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की आवाज में वो जादू था, जो किसी भी गीत को यादगार बना देता था. उनके गाए गानों में प्यार भी था, जुदाई भी और ऐसी कसक भी, जो सुनने वालों की आंखें नम कर देती थी. यही वजह है कि उनके जाने के बाद भी उनके गीत लोगों के दिलों में जिंदा हैं. 6 फरवरी 2022 को जब 92 साल की उम्र में सुरों की मल्लिका ने दुनिया को अलविदा कहा, तो हर आंख नम थी. उनकी अंतिम विदाई से जुड़ी एक ऐसी ही भावुक याद है, जिसमें उनके 56 साल पुराने गीत ‘तुम मुझे यूं भुला न पाओगे' का जिक्र होता है. शम्मी कपूर और आशा पारेख पर फिल्माया गया यह गीत आज भी लता दीदी की याद दिलाता है और बताता है कि कुछ आवाजें कभी भुलाई नहीं जा सकतीं.

लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी ने गाया था गाना

फिल्म ‘पगला कहीं का' का यह गीत अपनी धुन और इमोशनल लिरिक्स के लिए खास पहचान रखता है. इसे लता मंगेशकर के साथ मोहम्मद रफी ने भी अपनी आवाज दी थी. गाने के बोल मशहूर गीतकार हसरत जयपुरी ने लिखे थे, जबकि इसका संगीत शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने तैयार किया था. फिल्म में लता मंगेशकर का गाया फीमेल वर्जन  आशा पारेख पर फिल्माया गया था. गाने के बोल बीते रिश्तों और उन यादों की बात करते हैं, जिन्हें चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता. यही वजह है कि यह गीत समय के साथ अपनी लोकप्रियता बनाए रखने में कामयाब रहा. 

गाना सुनने के लिए यहां क्लिक करें 

क्या थी शम्मी कपूर की फिल्म की कहानी?

निर्देशक शक्ति सामंत की फिल्म ‘पगला कहीं का' साल 1970 में रिलीज हुई थी. इसमें शम्मी कपूर ने सुजीत और आशा पारेख ने डॉ. शालिनी की भूमिका निभाई थी. प्रेम चोपड़ा, हेलेन और के. एन. सिंह भी फिल्म का हिस्सा थे. कहानी सुजीत की जिंदगी पर आधारित थी, जिसे बचपन से ही मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

बड़े होने पर सुजीत की मुलाकात श्याम नाम के एक संगीतकार से होती है, जो उसे नाइट क्लब में गाने का मौका देता है. वहां उसकी मुलाकात डांसर जेनी से होती है और दोनों प्यार करने लगते हैं. लेकिन उनकी जिंदगी में मुश्किलें तब बढ़ जाती हैं, जब क्लब के मालिक की हत्या हो जाती है. सुजीत इस मामले में खुद को फंसा हुआ पाता है और उसे मानसिक अस्पताल भेज दिया जाता है. आगे चलकर डॉ. शालिनी उसकी जिंदगी में अहम भूमिका निभाती हैं. फिल्म की कहानी में प्यार, धोखे और संघर्ष के कई मोड़ आते हैं. 

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