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बॉलीवुड की पहली करोड़पति एक्ट्रेस, कभी किया दूसरों के घर में काम, जब हजारों में बनती थीं फिल्में, लेती थीं लाखों में फीस, जानते हैं नाम ?

इस एक्ट्रेस ने आज से करीब सौ साल पहले इतनी फीस ली थी, जितने में उस दौर में 4-5 फिल्में बन जातीं. आइए जानते है कि वह एक्ट्रेस कौन हैं.

बॉलीवुड की पहली करोड़पति एक्ट्रेस, कभी किया दूसरों के घर में काम, जब हजारों में बनती थीं फिल्में, लेती थीं लाखों में फीस, जानते हैं नाम ?
बॉलीवुड की पहली करोड़पति एक्ट्रेस
नई दिल्ली:

रेखा से लेकर श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित से लेकर आलिया भट्ट और दीपिका पादुकोण तक बॉलीवुड में एक से बढ़कर एक अभिनेत्रियों ने अपनी छाप छोड़ी है. आज की एक्ट्रेसेस एक फिल्म से करोड़ों की कमाई कर रही हैं. लेकिन आज हम जिस एक्ट्रेस की बात कर रहे हैं, वो देश की पहली करोड़पति अभिनेत्री थीं. उन्हें देश की पहली सुपरस्टार एक्ट्रेस भी कहा जाता है. इस एक्ट्रेस ने आज से करीब सौ साल पहले इतनी फीस ली थी, जितने में उस दौर में 4-5 फिल्में बन जातीं. आइए जानते है कि वह एक्ट्रेस कौन हैं.

कौन हैं वो एक्ट्रेस

हम जिस एक्ट्रेस की बात कर रहे हैं उनका नाम है कानन देवी. कानन ने 1926-59 तक फिल्मों में काम किया. वह 1930-40 के दशक की हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस थी. एक्टिंग के साथ वह अपनी आवाज से भी जादू बिखेरती थीं, वह बहुत शानदार सिंगर भी थीं. हिंदी सिनेमा की शुरुआती गायिकाओं और अभिनेत्रियों में से एक, कानन देवी का निधन 30 साल पहले हुआ था.

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कितनी फीस लेती थीं कानन देवी

कानन देवी एक फिल्म के लिए 5 लाख रुपये और एक गाने के लिए 1 लाख रुपये लेती थीं. यह रकम बहुत बड़ी थी क्योंकि उन दिनों कुछ फिल्में महज लगभग 15,000-20,000 रुपये के बजट में बन जाया करती थीं. अगर हम उनकी उस समय की कमाई को आज के समय के हिसाब से देखें, तो कह सकते हैं कि कानन देवी भारत की पहली 'करोड़पति' अभिनेत्री थीं.

कानन देवी का परिवार

कानन देवी का जन्म 22 अप्रैल, 1916 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में एक गरीब परिवार में हुआ था. उनके असली माता-पिता के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. उनकी जीवनी के अनुसार, कानन देवी की परवरिश रतन चंद्र दास और राजोबाला नाम के एक जोड़े ने की थी, इसलिए वह उन्हें ही अपने माता-पिता मानने लगी थीं. रतन चंद्र ने कानन देवी को अपनी बेटी की तरह माना और उन्हें संगीत की ट्रेनिंग दी, लेकिन कुछ सालों बाद उनकी मौत हो गई. उनकी मौत के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आ गया. कानन और उनकी मां ने लोगों के घरों में काम किया. उस वक्त कानन महज 7 साल की थी.

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कैसे हुए फिल्मों में एंट्री

मदन मूवी स्टूडियो कानन देवी की खूबसूरती से प्रभावित हुआ और उन्हें 'जयदेव' फिल्म के लिए 5 रुपये प्रति महीने की सैलरी पर साइन किया. कानन देवी को फिल्म में एक छोटा सा रोल मिला. कानन ने 1928-31 के बीच कुछ फिल्मों में काम किया और इस दौरान उन्होंने संगीतकार हिरेन बोस, गीतकार धीरेन दास और कवि काजी नजरुल इस्लाम के साथ कुछ गाने भी रिकॉर्ड किए. कानन देवी ने शंकराचार्य, ऋषि प्रेम, जोरबारात, विष्णु माया और प्रह्लाद जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया. कानन देवी ने 'विष्णु माया' और 'प्रह्लाद' फिल्मों में पुरुष मुख्य भूमिका निभाई थी. मनमयी गर्ल्स स्कूल में उनका नाम कानन बाला था, जिसे बाद में उन्होंने बदलकर कानन देवी कर लिया. 21 साल की उम्र तक कानन देवी अपनी खूबसूरती और बेहतरीन एक्टिंग के लिए मशहूर हो चुकी थीं. राधा फिल्म कंपनी के साथ काम करते हुए कानन देवी सुपरस्टार बन गईं. वह अपने समय की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली एक्ट्रेस थीं. जब कुछ फिल्म का बजट 15,000-20,000 रुपये होता था, तब कानन एक गाने के लिए 1 लाख रुपये और एक फिल्म के लिए 5 लाख रुपये लेती थीं.

57 फिल्में, 40 गाने

कानन देवी ने कुल 57 फ़िल्मों में काम किया और लगभग 40 गाने गाए. वह फिल्म जगत की पहली महिला थीं जिन्हें पुरुषों के दबदबे वाले इस इंडस्ट्री में 'मैडम' कहकर बुलाया जाता था. हिंदी सिनेमा में कानन देवी ने के.एल. सहगल, पंकज मलिक, प्रथमेश बरुआ, पहाड़ी सान्याल, छवि बिस्वास और अशोक कुमार जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ भी काम किया.

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शादी और तलाक

कानन देवी ने दिसंबर 1940 में अशोक मैत्रा से शादी की. वह ब्रह्म समाज के शिक्षाविद हेरंबा चंद्र मैत्रा के बेटे थे. उस समय के रूढ़िवादी समाज को यह शादी पसंद नहीं आई. यह शादी ज्यादा दिन नहीं चली और कानन देवी ने 1945 में तलाक के लिए अर्जी दे दी. 1949 में कानन देवी ने हरिदास भट्टाचार्य से शादी की, जो उस समय बंगाल के गवर्नर के ADC थे. हरिदास बाद में डायरेक्टर बन गए, लेकिन उन्हें हमेशा कानन देवी के पति के तौर पर ही जाना जाता रहा और यही बात बाद में दोनों के बीच झगड़े की वजह बनी. हरिदास 4 अप्रैल 1987 को कानन का घर छोड़कर चले गए, लेकिन उन्होंने उनसे तलाक नहीं लिया.

अकेलापन और मौत

17 जुलाई 1992 को 76 साल की उम्र में कानन देवी का निधन हो गया, लेकिन हरिदास उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए. कुछ रिपोर्टों का दावा है कि कानन देवी अपने आखिरी दिनों में अकेलापन महसूस करती थीं और उन्हें इस बात का दुख था कि उस समय हरिदास उनके साथ नहीं थे.

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