5 सितंबर को टीचर्स डे मनाया जाता है. हम सभी की जिंदगी में टीचर का काफी बड़ा योगदान रहा है. टीचर के महत्व को फिल्मों के जरिए पर दर्शकों तक पहुंचाया गया है. ऐसा ही एक गाना है, जिसमें एक टीचर अपने बच्चों के इंसाफ और सही रास्ते पर चलने की अहमियत बताता है. यह गाना ना केवल कल्ट को बल्कि इसको देश की धरोहर के तौर पर भी देखा जा सकता है. दरअसल हम बात कर रहे हैं, हिंदी सिनेमा के स्वर्ण युग की याद दिलाती क्लासिक फिल्म गंगा जमुना (1961) का एक गाने की जो आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है.
गाना देता है बड़े-छोटो को बड़ी सीख
इस गाने का नाम ‘इंसाफ की डगर पे' है जो उस समय फिल्म की आत्मा बन गया. हेमंत कुमार की मधुर आवाज, शकील बदायूंनी के बोल और नौशाद अली का संगीत मिलकर इस गीत को कालजयी बना देते हैं. ‘इंसाफ की डगर पे' के बोल बहुत सीधे और सच्चे हैं. जिसमें एक टीचर गाने के जरिए इंसाफ, सच्चाई और सही रास्ते पर चलने की बात करते हैं. शकील बदायूंनी ने ऐसे बोल चुने जो आम आदमी के दिल को छू लें. नौशाद साहब का संगीत भी साधारण लेकिन प्रभावशाली है. हेमंत कुमार की गहरी और भावपूर्ण आवाज ने गीत को और गहराई दे दी.
हर चुनावी प्रचार, सरकार और स्कूली कार्यक्रम बजता गाना
एक जमाना था जब ‘इंसाफ की डगर पे' गाना हर चुनावी प्रचार, सरकार और स्कूली कार्यक्रम में सुनने को मिलता था. बात करें फिल्म गंगा जमुना की तो इस फिल्म का निर्देशन नितिन बोस ने किया था. इसमें दिलीप कुमार, वैजयंती माला, नासिर खान, आजरा और लीला चिटनिस जैसे कलाकारों ने यादगार भूमिकाएं निभाईं. कहानी दो भाईयों की है, जो अलग-अलग रास्तों पर चलते हैं. एक इंसाफ का साथ देता है, दूसरा कानून से टकराता है. इसी संघर्ष के बीच यह गीत फिल्म में गूंजता है.
फिल्म के बारे में
गंगा जमुना उस दौर की फिल्म है जब हिंदी सिनेमा सामाजिक संदेश भी देता था. दिलीप कुमार की अदाकारी ने फिल्म को नई ऊंचाई दी. वैजयन्ती माला की भूमिका भी यादगार रही. फिल्म का संगीत पूरे परिवार को जोड़ता था. ‘इंसाफ की डगर पे' जैसे गाने सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सोचने पर मजबूर करते थे. रेडियो पर जब यह गीत बजता है तो लोग भावुक हो जाते हैं. कई पीढ़ियां इसे सुनकर बड़ी हुई हैं. यह गीत बताता है कि सच्चाई और इंसाफ का रास्ता कभी पुराना नहीं पड़ता.
हिंदी सिनेमा के इतिहास में ऐसे गाने कम ही हैं जो इतने साल बाद भी उतने ही प्रासंगिक लगते हैं. ‘इंसाफ की डगर पे' न सिर्फ एक गीत है, बल्कि एक संदेश भी है. यह याद दिलाता है कि सही रास्ता चुनना हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन जरूरी जरूर होता है. पुरानी फिल्मों के प्रशंसक आज भी इस गीत को दोहराते हैं.
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