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This Article is From Oct 06, 2025

शाहरुख के साथ ‘वीर-जारा’ में हीरोइन नहीं बनी, पर मां की सीख ने बना दिया स्टार” — दिव्या दत्ता की दिल छू लेने वाली कहानी

अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने मानसिक दबाव पर बच्चों से की खुलकर बातचीत कि . इस मौके पर उन्होंने मानसिक तनाव, सोशल मीडिया के दबाव और आज के प्रतिस्पर्धी दौर में खुद को संभालने के तरीकों पर बेहद सहजता से बातें कीं.

शाहरुख के साथ ‘वीर-जारा’ में हीरोइन नहीं बनी, पर मां की सीख ने बना दिया स्टार” — दिव्या दत्ता की दिल छू लेने वाली कहानी
दिव्या दत्ता की दिल छू लेने वाली कहानी
नई दिल्ली:

अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने मानसिक दबाव पर बच्चों से की खुलकर बातचीत कि . इस मौके पर उन्होंने मानसिक तनाव, सोशल मीडिया के दबाव और आज के प्रतिस्पर्धी दौर में खुद को संभालने के तरीकों पर बेहद सहजता से बातें कीं. बातों ही बातों में दिव्या ने अपने शुरुआती दिनों का जिक्र किया, “मैंने बहुत पहले सोच लिया था कि मुझे अभिनेत्री बनना है. मैं बस अच्छा अभिनय करना चाहती थी, लोगों के दिलों में अपने काम से जगह बनाना चाहती थी.” उन्होंने बच्चों से मुस्कुराकर पूछा, “आप लोगों ने ‘वीर-जारा' देखी है? देखो जरूर, शाहरुख़ ख़ान की बहुत खूबसूरत फिल्म है.”

फिर दिव्या ने बताया कि उस फिल्म में उन्हें काम तो मिला, मगर वह भूमिका वैसी नहीं थी जैसी उन्होंने सोची थी, “मैं चाहती थी कि मैं हीरोइन बनूं, गाने और नाच वाले सीन करूं, और शाहरुख़ के साथ स्क्रीन शेयर करूं. लेकिन ‘वीर-जारा' में मेरा रोल कुछ और था मैं न तो शाहरुख़ के साथ थी, न ही केंद्र में. तब मैंने माँ से कहा कि मुझे वो नहीं मिला जिसकी मैंने चाह रखी थी.” दिव्या की मां ने तब उन्हें समझाया, “जो भी काम मिले, उसे पूरे दिल से करो. जो तुम्हें मिला है, वही तुम्हारा अवसर है. और उसमें कुछ ऐसा जोड़ो जो सिर्फ तुम्हारा हो वही होगा तुम्हारा ‘X फैक्टर'.”

दिव्या मुस्कुराईं और बोलीं, “मैंने मां की बात मानी. अपने उस किरदार में दिल से मेहनत की, उसमें अपनी सच्चाई और भावनाएं डालीं. और उसी रोल ने मुझे पहचान दिलाई. मैंने तब सीखा कि जो काम आपको मिले, उसे इतना अच्छा करो कि वो याद रह जाए.” उन्होंने बच्चों को यह संदेश दिया कि हर सफर में निराशा आती है, लेकिन वही पल हमें बेहतर बनाते हैं. “अगर आपको वो नहीं मिला जो आप चाहते थे, तो शिकायत मत कीजिए उसे इतना अच्छा कीजिए कि दुनिया आपको देखे,” उन्होंने कहा.

दिव्या ने बच्चों से मानसिक स्वास्थ्य पर भी खुलकर बात की और कहा कि “आज के समय में पढ़ाई, सोशल मीडिया और अपेक्षाओं का दबाव बच्चों को अंदर से थका देता है. लेकिन अगर आप परेशान हैं, तो बात कीजिए ये कमजोरी नहीं, हिम्मत की निशानी है.” अंत में उन्होंने कहा कि “अपने सपनों का पीछा करते समय खुद को खोना नहीं चाहिए. हर किसी की अपनी गति, अपनी चमक होती है. उसे पहचानिए और उसे मन से जियो.”

दिव्या दत्ता हिंदी सिनेमा की सशक्त और संवेदनशील अभिनेत्रियों में से एक हैं. उन्होंने “वीर-जारा”, “भाग मिल्खा भाग”, “इरादा”, “शेयरनी”, “स्टैनली का डब्बा” जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता है. राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता दिव्या हाल के वर्षों में कई वेब सीरीज और सामाजिक अभियानों से भी जुड़ी हैं और अपने अनुभवों से लोगों को प्रेरित कर रही हैं.

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