मध्यप्रदेश के सागर जिले के अगरा गांव के रहने वाले दृष्टिबाधित गायक सुनील लोधी इन दिनों अपनी आवाज और हुनर के दम पर पहचान बना रहे हैं. फिल्म ‘हनुमान अंश' के गीत से सुर्खियों में आए सुनील की कहानी सिर्फ एक गायक की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उन मुश्किलों से आगे बढ़ने की कहानी है, जिनका सामना उन्होंने बचपन से किया. सुनील की आंखों की रोशनी नहीं थी, लेकिन संगीत के प्रति उनका हुनर और परिवार का साथ उनकी ताकत बना. उनके घर पहुंची NDTV की टीम ने परिवार से बातचीत की और जाना कि कैसे कठिन परिस्थितियों के बीच सुनील ने अपनी पहचान बनाई.
बचपन में लोगों के ताने सुनते थे सुनील
सुनील की मां ने भावुक होकर बताया कि उनका बेटा बचपन से ही देख नहीं पाता था. गांव और समाज के कुछ लोग उसे ‘सूरे-सूरे' यानी अंधा कहकर चिढ़ाते और उसका मजाक उड़ाते थे. मां के मुताबिक, सुनील का बचपन बेहद कठिनाइयों में बीता, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी. मां ने बताया कि लोगों के तानों और अभावों के बीच भी सुनील आगे बढ़ते रहे. आज वही बेटा अपनी प्रतिभा के दम पर परिवार और गांव का नाम रोशन कर रहा है. उनकी आवाज ने उन्हें एक नई पहचान दिलाई है.
‘हनुमान अंश' के गीत से मिली नई पहचान
फिल्म ‘हनुमान अंश' के गीत से सुर्खियों में आए सुनील लोधी अब अपनी गायकी के लिए पहचाने जा रहे हैं. उनकी मां ने कहा कि जिन लोगों ने कभी उनके बेटे का मजाक उड़ाया था, आज उसी बेटे ने अपनी प्रतिभा से परिवार का नाम रोशन कर दिया है. सुनील के छोटे भाई महेश लोधी ने भी कहा कि उनके भैया ने अपनी मेहनत से पूरे परिवार का नाम रोशन किया है. परिवार को उनकी उपलब्धि पर गर्व है.
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कभी अभाव और लोगों के तानों के बीच जिंदगी गुजारने वाले सुनील आज अपनी आवाज को अपनी ताकत बनाकर आगे बढ़ रहे हैं. उनकी कहानी बताती है कि काबिलियत और हौसले के सामने शारीरिक चुनौतियां भी रास्ते की दीवार नहीं बन सकतीं.
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