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ऑस्कर में 'गोंधल' की एंट्री से सुभाष घई हुए खुश, इशिता देशमुख पर जताया गर्व, फिल्म देखने की अपील

बधाई दी. उन्होंने ‘गोंधळ’ की पूरी रचनात्मक टीम की मेहनत को स्वीकार करते हुए फिल्म की इस उपलब्धि को भारतीय सिनेमा के लिए गौरव का क्षण बताया.

ऑस्कर में 'गोंधल' की एंट्री से सुभाष घई हुए खुश, इशिता देशमुख पर जताया गर्व, फिल्म देखने की अपील
सुभाष घई ने ईशिता देशमुख की ‘गोंधळ’ की उपलब्धि पर जताया गर्व
नई दिल्ली:

दिग्गज फिल्ममेकर और बॉलीवुड के ‘शोमैन' सुभाष घई (Subhash Ghai) के लिए सिनेमा सिर्फ फिल्मों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि नई प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें सही प्रशिक्षण देना और उनके सपनों को एक मंच प्रदान करना भी उनकी लंबे समय से चली आ रही सोच का हिस्सा रहा है. यही वजह है कि जब मराठी फिल्म गोंधळ (Gondhal) को ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के रूप में चुना गया, तो यह उपलब्धि उनके लिए व्यक्तिगत तौर पर भी बेहद खास बन गई. फिल्म की मुख्य अभिनेत्री ईशिता देशमुख (Ishita Deshmukh), जो व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल के एक्टर स्टूडियो की पूर्व छात्रा हैं, अब अपनी प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच की ओर बढ़ रही हैं.

प्रशिक्षण और मार्गदर्शन

ईशिता की इस उपलब्धि पर सुभाष घई ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी खुशी और गर्व जाहिर किया. उन्होंने ‘गोंधळ' की पूरी टीम को बधाई देते हुए खास तौर पर ईशिता के सफर को रेखांकित किया. सुभाष घई ने लिखा, “ऑस्कर मायने रखता है। आज व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल को अपनी स्टूडेंट इशिता देशमुख पर गर्व है, जो व्हिसलिंग वुड्स एक्टर स्टूडियो की पूर्व छात्रा हैं। उनकी मराठी फ़िल्म 'गोंधल' को ऑस्कर अवॉर्ड्स के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर चुना गया है”. सुभाष घई का यह संदेश सिर्फ एक फिल्म की सफलता का जश्न नहीं है, बल्कि उस प्रतिभा और मेहनत की भी पहचान है, जिसे एक संस्थान ने प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के जरिए आगे बढ़ने का अवसर दिया. व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल लंबे समय से फिल्म और मनोरंजन जगत में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं को प्रोफेशनल ट्रेनिंग और इंडस्ट्री-ओरिएंटेड एक्सपोजर देने की दिशा में काम करता रहा है. ईशिता का सफर इसी सोच की एक मिसाल के तौर पर सामने आता है. ईशिता देशमुख ने अपने करियर में अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए खुद को एक कलाकार के रूप में स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं. ‘गोंधळ' में उनकी भूमिका ने उन्हें एक बड़े सिनेमाई मंच तक पहुंचाया है. फिल्म के ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री चुने जाने के बाद उनके काम को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है.

गौरव का क्षण

अपने संदेश में सुभाष घई ने फिल्म के लेखक-निर्देशक संतोष डावखर को भी विशेष बधाई दी. उन्होंने ‘गोंधळ' की पूरी रचनात्मक टीम की मेहनत को स्वीकार करते हुए फिल्म की इस उपलब्धि को भारतीय सिनेमा के लिए गौरव का क्षण बताया. किसी फिल्म का ऑस्कर की आधिकारिक एंट्री के रूप में चुना जाना उसके कलाकारों और पूरी टीम के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है और ‘गोंधळ' की इस उपलब्धि ने इसके कलाकारों को भी वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला दिया है. ईशिता का सफर हालांकि केवल ‘गोंधळ' तक सीमित नहीं रहा है. सुभाष घई ने उनके पिछले काम को भी याद किया और दूरदर्शन के टेलीविजन ड्रामा ‘जानकी' में उनकी मुख्य भूमिका का उल्लेख किया. यह शो मुक्ता आर्ट्स फिल्म्स द्वारा निर्मित था और ईशिता ने इसमें 208 एपिसोड में काम किया था. टेलीविजन से लेकर फिल्मों तक का यह सफर उनके अभिनय करियर में निरंतरता और विविधता को दर्शाता है. इस साल की शुरुआत में ईशिता को फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में बेस्ट डेब्यू का सम्मान भी मिला. ऐसे में ‘गोंधळ' का ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री बनना उनके करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जुड़ गया है. लगातार मिल रहे इन अवसरों और पहचान के बीच ईशिता ने यह दिखाया है कि मजबूत प्रशिक्षण के साथ कलाकार के लिए निरंतर मेहनत और अपने हुनर पर विश्वास भी उतना ही जरूरी है.

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निश्चित रूप से

ईशिता की कहानी व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल के उस विजन को भी सामने लाती है, जिसके तहत उभरती प्रतिभाओं को सिर्फ तकनीकी प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि अपनी रचनात्मक पहचान विकसित करने का अवसर देने पर जोर दिया जाता है. सुभाष घई के लिए किसी कलाकार की यात्रा संस्थान से निकलने के बाद खत्म नहीं होती, बल्कि वहीं से उसके पेशेवर सफर की शुरुआत होती है. एक्टिंग स्टूडियो से निकलकर ‘गोंधळ' जैसी फिल्म का हिस्सा बनना और फिर फिल्म का भारत की आधिकारिक ऑस्कर एंट्री के रूप में चुना जाना ईशिता के लिए निश्चित रूप से एक यादगार पड़ाव है. यह यात्रा उन युवा कलाकारों के लिए भी प्रेरणा का उदाहरण बन सकती है, जो अभिनय को अपना करियर बनाना चाहते हैं और इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने का सपना देखते हैं. सुभाष घई का यह संदेश एक गुरु, फिल्ममेकर और फिल्म शिक्षा के समर्थक के तौर पर उनकी भावना को दर्शाता है. ईशिता देशमुख की यात्रा और ‘गोंधळ' की उपलब्धि इस बात की याद दिलाती है कि भारतीय सिनेमा में नई प्रतिभाओं के लिए संभावनाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है. अब जब ‘गोंधळ' वैश्विक मंच की ओर आगे बढ़ रही है, ईशिता देशमुख और पूरी टीम के लिए यह सफर एक नए अध्याय की शुरुआत है.

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