विज्ञापन

दिलीप कुमार की एक बात ऐसी चुभी कि उर्दू सीखने के लिए लेने लगीं ट्यूशन, 5000 से ज्यादा गाने गा चुकीं सिंगर का अनसुना किस्सा

दिलीप कुमार हिंदी सिनेमा के एक ऐसे एक्टर रहे हैं जिन्होंने इमोशन को पर्दे पर जीवंत करने के मामले में हर किसी को पीछे छोड़ दिया. उन्होंने एक बार एक नई नवेली सिंगर को लेकर भाषा से जुड़ा एक कमेंट किया तो उन्हें बहुत बुरा लगा था.

दिलीप कुमार की एक बात ऐसी चुभी कि उर्दू सीखने के लिए लेने लगीं ट्यूशन, 5000 से ज्यादा गाने गा चुकीं सिंगर का अनसुना किस्सा
दिलीप कुमार की बात ने लता मंगेशकर को किया था नाराज!
Social Media
नई दिल्ली:

भारत की स्वर कोकिला कही जाने वाली लता मंगेशकर की आवाज से शायद ही कोई अनजान हो. उन्होंने हिंदी ही नहीं, बल्कि मराठी और बंगाली जैसी कई दूसरी भाषाओं में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा. उनकी गायकी में शब्दों का उच्चारण, भाव और आवाज की मिठास इतनी खास थी कि हर गीत सीधे दिल तक पहुंचता था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लता मंगेशकर ने अपने उर्दू उच्चारण को बेहतर बनाने के लिए बाकायदा उर्दू की तालीम ली थी. इसके पीछे का दिलचस्प किस्सा मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार से जुड़ा है. लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर में हुआ था. कम उम्र से ही उनका जुड़ाव संगीत से हो गया था. पिता दीनानाथ मंगेशकर से संगीत की शुरुआती शिक्षा लेने के बाद उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर फिल्मी दुनिया में अलग पहचान बनाई.

दिलीप कुमार से मुलाकात का किस्सा

कहा जाता है कि साल 1947 में संगीतकार अनिल विश्वास ने लता मंगेशकर की मुलाकात अभिनेता दिलीप कुमार से कराई थी. यह मुलाकात बेहद खास थी, क्योंकि उस समय लता अपने करियर के शुरुआती दौर में थीं और दिलीप कुमार फिल्म इंडस्ट्री में बड़ा नाम बन चुके थे. दिलीप कुमार को जब पता चला कि लता मंगेशकर महाराष्ट्रीयन हैं, तो उन्होंने उनके उर्दू उच्चारण को लेकर टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि जो गायक उर्दू भाषा से अच्छी तरह परिचित नहीं होते, उन्हें उर्दू के शब्दों के सही उच्चारण में परेशानी होती है. लता मंगेशकर को उस समय यह बात चुभ गई.

यह भी पढ़ें: लता मंगेशकर ने 13 साल की उम्र में गाया था पहला गाना, 1942 में रिलीज हुई फिल्म लेकिन थियेटर में नहीं बजा वो गीत

हालांकि बाद में उन्होंने इस टिप्पणी को सिर्फ आलोचना के तौर पर नहीं लिया. उन्होंने इस पर गंभीरता से विचार किया और घर लौटने के बाद उर्दू सीखने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने एक विद्वान मौलाना से उर्दू की तालीम लेना शुरू किया. उन्होंने उर्दू के शब्दों के उच्चारण, उनके सही इस्तेमाल और भाषा की बारीकियों को समझने पर ध्यान दिया. बाद में लता मंगेशकर ने दिलीप कुमार की आत्मकथा 'द सब्सटेंस एंड द शैडो: एन ऑटोबायोग्राफी' में इस मुलाकात और उर्दू सीखने के अनुभव को याद किया. उन्होंने इस टिप्पणी को अपने लिए एक तरह का अनजाना तोहफा बताया था. उनका मानना था कि उस बातचीत ने उन्हें अपनी कमी पहचानने और उसे दूर करने की प्रेरणा दी.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Dilip Kumar, Dilip Kumar Movies, Lata Mangeshkar, Lata Mangeshkar Birthday, Entertainment
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com